
उज्जैन, मध्य प्रदेश: आज उज्जैन के पवित्र महामृत्युंजय द्वार पर एक ऐतिहासिक और धार्मिक आयोजन के साक्षी बने लोग, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महाकालेश्वर मंदिर के पवित्र लड्डू प्रसाद को केसरी ध्वज दिखाकर अयोध्या के लिए रवाना किया। 1,11,111 लड्डुओं का यह प्रसाद श्रीराम के जयकारों और भक्ति भाव के बीच रवाना किया गया। इस प्रसाद को अयोध्या के रास्ते जनकपुर, नेपाल ले जाया जाएगा, जहां यह श्री राम-सीता विवाह उत्सव के दौरान भक्तों को वितरित किया जाए
इस आयोजन का उद्देश्य न केवल धार्मिक आस्था को बढ़ावा देना था, बल्कि उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की महिमा को अयोध्या और जनकपुर तक पहुंचाना भी है। भगवान शिव और भगवान राम की इस अद्भुत सांस्कृतिक और धार्मिक कड़ी को नए आयाम देने का प्रयास किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा
“महाकाल की भूमि से भगवान राम के भक्तों के लिए प्रसाद भेजना हमारे लिए गौरव की बात है। जनकपुर में आयोजित श्री राम-सीता विवाह उत्सव में यह प्रसाद धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करे महामृत्युंजय द्वार पर भव्य आयोजन
महामृत्युंजय द्वार को इस अवसर पर विशेष रूप से सजाया गया था। सैकड़ों भक्त भगवान शिव और भगवान राम के जयकारे लगाते हुए इस शुभ कार्य के गवाह बने।
लड्डू प्रसाद की विशेषता
महाकालेश्वर मंदिर के इन प्रसाद लड्डुओं को विशेष रूप से तैयार किया गया है। यह प्रसाद न केवल भक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह उज्जैन की पवित्रता और धार्मिकता का भी प्रतिनिधित्व करता है।
केसरी ध्वज, जो साहस, भक्ति और शक्ति का प्रतीक है, को दिखाकर इस पवित्र यात्रा की शुरुआत की गई। यह ध्वज धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है श्रीराम के जयकारे
पूरे आयोजन के दौरान “जय श्रीराम” और “हर हर महादेव” के गगनभेदी जयकारे गूंजते रहे। यह आयोजन भगवान शिव और राम के अद्भुत संगम को दर्शाने का एक सुंदर उदाहरण बना
महाकालेश्वर से अयोध्या तक की यात्रा
यात्रा का मार्ग
लड्डू प्रसाद की यह यात्रा उज्जैन से अयोध्या तक जाएगी, जहां भगवान राम से जुड़े पवित्र स्थलों पर इसे रखा जाएगा। इसके बाद यह प्रसाद जनकपुर, नेपाल भेजा जाएगा।
जनकपुर में श्री राम-सीता विवाह उत्सव


नेपाल के जनकपुर में हर साल श्री राम-सीता विवाह उत्सव का आयोजन होता है। इस उत्सव में लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर का प्रसाद वहां बांटा जाएगा, जिससे इस आयोजन को और भव्यता मिलेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस आयोजन को एक नई पहचान दी है। उन्होंने कहा कि यह प्रसाद भगवान शिव और भगवान राम के भक्तों के बीच धार्मिक एकता का संदेश देगा। डॉ. यादव ने उज्जैन को धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनाने के लिए कई प्रयास किए हैं, और यह आयोजन उनकी इसी सोच का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री का संदेश
“महाकालेश्वर मंदिर का यह प्रसाद भगवान राम की भूमि अयोध्या और जनकपुर तक ले जाना हमारे धार्मिक संबंधों को और मजबूत करेगा। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और परंपरा का भी संरक्षण है।”
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
1. भगवान शिव और राम का संबंध
भगवान शिव और भगवान राम के बीच का आध्यात्मिक संबंध भारतीय धर्म और संस्कृति का एक प्रमुख हिस्सा है। इस आयोजन ने इस संबंध को और गहराई दी।
2. महाकालेश्वर मंदिर की महिमा
महाकालेश्वर मंदिर, जो 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, इस आयोजन के माध्यम से एक बार फिर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया।
3. अयोध्या और जनकपुर का जुड़ाव
अयोध्या और जनकपुर भारतीय संस्कृति के दो प्रमुख केंद्र हैं। इस आयोजन के जरिए इन दोनों स्थानों को उज्जैन से जोड़ा गया।
आगे की योजनाएं
1. धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा
इस आयोजन के बाद उज्जैन, अयोध्या, और जनकपुर के धार्मिक स्थलों को जोड़कर पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना है।
2. अन्य मंदिरों की भागीदारी
महाकालेश्वर मंदिर के साथ-साथ अन्य प्रमुख मंदिरों को भी इस प्रकार की पहल में शामिल करने की योजना है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस आयोजन को लेकर उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी।
स्थानीय भक्तों की राय:
महेश शर्मा: “महाकाल का प्रसाद अयोध्या और जनकपुर तक ले जाना हमारे लिए गर्व की बात है।”
सुमित्रा देवी: “यह आयोजन भगवान शिव और राम की कृपा को पूरी दुनिया तक पहुंचाने का एक अद्भुत प्रयास है।







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