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मध्य प्रदेश के सभी हायर सेकंडरी स्कूलों में अब पढ़ाया जाएगा कृषि संकाय, छात्रों को मिलेगा रोजगारमुखी शिक्षा का अवसर

मध्य प्रदेश के सभी हायर सेकंडरी स्कूलों में अब पढ़ाया जाएगा कृषि संकाय, छात्रों को मिलेगा रोजगारमुखी शिक्षा का अवसर

मध्य प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत एक नई पहल की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत प्रदेश के सरकारी हायर सेकंडरी स्कूलों में कृषि संकाय को शामिल किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य छात्रों को कृषि के क्षेत्र में ज्ञान प्रदान करना और उन्हें रोजगार की दिशा में प्रेरित करना है। इस प्रकार, अब छात्रों को कला, विज्ञान, और वाणिज्य जैसे परंपरागत विषयों के अलावा कृषि में भी अध्ययन का अवसर मिलेगा।

योजना का उद्देश्य और पृष्ठभूमि:

मध्य प्रदेश को कृषि प्रधान राज्य माना जाता है, जहां की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था का आधार है और यह स्थानीय रोजगार सृजन का एक प्रमुख साधन है। ऐसे में, स्कूली शिक्षा में कृषि को शामिल कर यह प्रयास किया जा रहा है कि विद्यार्थी इस क्षेत्र में आवश्यक कौशल और जानकारी प्राप्त करें। इससे न केवल उनके शैक्षणिक दायरे का विस्तार होगा, बल्कि वे भविष्य में कृषि के क्षेत्र में स्वरोजगार की संभावनाओं का लाभ उठा सकेंगे।


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत उठाया गया है, जिसके उद्देश्य छात्रों को व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इसी दिशा में कृषि और उससे जुड़े हुए विषय जैसे उद्यानिकी, मत्स्य पालन, डेयरी, और पशुपालन को भी शामिल करने पर विचार किया गया है।

प्रस्तावित संरचना और कार्यान्वयन की योजना:

मध्य प्रदेश के सभी 8,000 हायर सेकंडरी स्कूलों में अगले शैक्षणिक सत्र से कृषि संकाय की शुरुआत की जाएगी। फिलहाल प्रदेश में 18 स्कूलों में यह पाठ्यक्रम संचालित है, लेकिन अब इसे बड़े पैमाने पर विस्तारित करने की योजना है। योजना के तहत उन स्कूलों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनके पास कृषि कार्य हेतु एक से डेढ़ बीघा भूमि है। इस भूमि पर विद्यार्थी कृषि कार्य के प्रैक्टिकल कर सकेंगे। जिन स्कूलों के पास कृषि के लिए भूमि नहीं है, वहां आसपास के किसानों से अनुबंध किया जाएगा ताकि विद्यार्थी उनके खेतों में जाकर प्रयोगात्मक कार्य कर सकें।

पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण


कृषि संकाय के लिए विशेष पाठ्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। यह पाठ्यक्रम छात्रों को फसल उत्पादन, बागवानी, मत्स्य पालन, और डेयरी प्रबंधन जैसे विषयों में व्यावहारिक जानकारी देगा। इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत कृषि विज्ञान के सिद्धांतों के साथ-साथ नवीनतम कृषि तकनीकों, जैविक खेती, और सिंचाई प्रणालियों पर भी जोर दिया जाएगा। इसके अलावा, इस संकाय में पढ़ाई करने वाले छात्रों को कृषि उत्पादन के बाद की प्रक्रियाओं जैसे भंडारण, पैकेजिंग, और विपणन के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

शिक्षक नियुक्ति और प्रशिक्षण

कृषि संकाय को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इसमें कृषि विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा जो छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। केवल उन्हीं स्कूलों में कृषि संकाय प्रारंभ किया जाएगा, जहां 70 या उससे अधिक विद्यार्थी कृषि संकाय में नामांकन करना चाहते हैं।



कृषि संकाय के माध्यम से छात्रों को विभिन्न रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकेंगे। इस शिक्षा प्रणाली से निकलने वाले विद्यार्थी कृषि उद्यमी बन सकते हैं या कृषि आधारित व्यवसायों जैसे कि डेयरी, मत्स्य पालन, और बागवानी में अपना करियर बना सकते हैं। इस पाठ्यक्रम में रोजगारोन्मुखी विषयों के माध्यम से छात्र कृषि के क्षेत्र में न केवल नौकरियों के लिए तैयार होंगे बल्कि वे अपने व्यवसाय की स्थापना भी कर सकते हैं।

समाज पर प्रभाव और लाभ

मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि संकाय का व्यापक प्रभाव पड़ेगा। यह न केवल छात्रों के लिए एक बेहतर भविष्य की दिशा तैयार करेगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी सशक्त करेगा। छात्र अब कृषि को एक सम्मानजनक और लाभकारी करियर विकल्प के रूप में देख सकेंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन में भी कमी आ सकती है।

इस योजना का एक अन्य लाभ यह होगा कि इससे छात्रों में कृषि के प्रति रुचि जागृत होगी और वे अपने पारिवारिक कृषि व्यवसाय को आधुनिकता और तकनीकी के सहारे आगे बढ़ा सकेंगे।

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