उस रात आसमान में चाँद अधूरा था, और शिवदामा आश्रम के चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ था। शिवदामा आश्रम, जो खडेश्वरी बाबा उर्फ भोलागिरी का निवास स्थान था, अब एक ऐसा स्थान बन गया था, जहाँ रहस्य और सन्नाटे ने अपना बसेरा बना लिया था। यह आश्रम गढ़ीदादर गाँव के बाहरी छोर पर, घने जंगलों के बीच एकांत में स्थित था। बाबा का सरल स्वभाव और लोगों के प्रति करुणा का भाव उनकी पहचान थी, जिसके कारण ग्रामीण उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखते थे। बाबा का जीवन पूरी तरह से अध्यात्म में डूबा हुआ था, और लोग उनके शिवदामा आश्रम में समस्याओं के समाधान के लिए आते थे।

लेकिन 9 अगस्त 2024 की सुबह सब कुछ बदल गया। आश्रम के एक भक्त ने देखा कि बाबा अपने आश्रम में मृत पड़े हैं। यह दृश्य देखकर वह स्तब्ध रह गया और तत्काल थाने में सूचना दी। राजेन्द्रग्राम थाने के प्रभारी ने मामले की गंभीरता को भाँपते हुए तुरंत घटनास्थल का रुख किया। आश्रम में बाबा की लाश का दृश्य ऐसा था मानो मौत ने अपनी पूरी क्रूरता से वार किया हो। उनकी आँखों में अजीब सी बेचैनी, और गले पर गहरे निशान किसी भयानक संघर्ष की कहानी कह रहे थे।
थाना प्रभारी ने शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवा दिया, और बाबा की हत्या का मामला दर्ज किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि बाबा की मौत गला दबाने से हुई थी। इस खबर ने पूरे गाँव में सनसनी फैला दी। लोग समझ नहीं पा रहे थे कि एक साधु, जो किसी का भी दुश्मन नहीं था, उसकी हत्या कौन कर सकता है?
अनूपपुर के पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम का गठन किया। टीम के नेतृत्व का भार अति. पुलिस अधीक्षक इसरार मंसूरी को सौंपा गया, जिन्हें क्षेत्र के सबसे कुशल अधिकारियों में गिना जाता था। विशेष टीम ने इस मामले की गहराई से जांच शुरू की।

गाँव के लगभग 100-150 लोगों से पूछताछ की गई, आश्रम के आसपास के संदिग्ध व्यक्तियों को चिन्हित किया गया, और आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों का सहारा लेते हुए विवेचना आगे बढ़ाई गई। जांच के दौरान बाबा के परिचितों में से एक नाम सामने आया – बीरेंद्र सिंह।
बीरेंद्र सिंह, जो अक्सर शिवदामा आश्रम आता-जाता रहता था, बाबा का परिचित था। कहा जाता था कि वह बाबा से आशीर्वाद लेने और कुछ व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान के लिए अक्सर आता था। जांच टीम ने पाया कि 7 अगस्त की रात वह बाबा के पास आश्रम में आया था। उस रात दोनों के बीच किसी बात को लेकर वाद-विवाद हुआ। कोई नहीं जानता था कि उस एकांत में क्या हुआ, लेकिन इस बार बीरेंद्र ने अपना आपा खो दिया था।
विवेचना के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि विवाद के समय बाबा ने बीरेंद्र को किसी बात पर फटकार लगाई थी। यह फटकार उसके अहंकार को चोट पहुँचाने वाली थी। उस रात उसके भीतर एक गहरा क्रोध जाग गया। आश्रम का एकांत वातावरण, और गुस्से से जलते मन ने बीरेंद्र को क्रूरता की ओर धकेल दिया। उसने खडेश्वरी बाबा का गला घोंट दिया, और बिना किसी अपराधबोध के घटना स्थल से भाग गया।

जांच टीम ने बीरेंद्र की तलाश शुरू की। वह भागकर झारखंड के जमशेदपुर में छिप गया था। पुलिस ने अपने जाल को व्यापक किया और आखिरकार उसे जमशेदपुर में पकड़ लिया। गिरफ्त में आने के बाद बीरेंद्र ने अपने अपराध को स्वीकार कर लिया। उसने पुलिस के सामने रोते हुए बताया कि उस रात वह क्रोध में आ गया था और उसने बाबा का गला घोंट दिया।
इस हत्याकांड ने पूरे गाँव को झकझोर कर रख दिया। बाबा के अनुयायी इस क्रूर हत्या से स्तब्ध थे। विश्व हिंदू परिषद ने भी हत्यारे की गिरफ्तारी की माँग करते हुए पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अपराधी को गिरफ्तार किया और न्यायालय में पेश किया।
इस घटना ने पूरे इलाके को एक सवाल के घेरे में खड़ा कर दिया। यह केवल एक हत्या नहीं थी; यह उस आस्था पर प्रहार था जिसे लोग बाबा के प्रति रखते थे।





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