
जबलपुर।मध्य प्रदेश के दो अलग-अलग मामलों में फांसी की सजा पाने वाले दो आरोपियों ने हाईकोर्ट का रुख किया है। दोनों आरोपियों ने निचली अदालतों द्वारा दिए गए फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस एके सिंह की डिवीजन बेंच ने दोनों अपीलों पर मंगलवार को सुनवाई की। हाईकोर्ट ने इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए 12 मई की तारीख तय की है। इन दोनों मामलों में मासूमों और आम लोगों की हत्या जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं।
तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्याकांड
पहला मामला शहडोल जिले के खैरहा थाना क्षेत्र का है। यह घटना मार्च 2023 की है। तीन साल की मासूम बच्ची घर में मौजूद थी और उसकी मां एक शादी समारोह में गई हुई थी। बच्ची का पिता पहले से ही किसी अन्य मामले में जेल में बंद था। जब मां शादी से लौटी तो बच्ची घर के अंदर अचेत अवस्था में मिली। उसके चेहरे, गाल और गले पर गंभीर चोट के निशान थे। मां ने जब पूछताछ की तो भानू उर्फ रामनारायण ढीमर ने नशे की हालत में मारपीट और घटना को अंजाम देने की बात कबूल की। पुलिस में शिकायत करने पर उसने जान से मारने की धमकी भी दी थी। मेडिकल रिपोर्ट में बच्ची के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। इस मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट के जज सुशील कुमार अग्रवाल ने 13 जनवरी 2026 को आरोपी भानू उर्फ रामनारायण ढीमर को फांसी की सजा सुनाई थी। जज ने इस घटना को दिल्ली के निर्भया कांड के समान गंभीर माना था।
जमीनी विवाद में छह लोगों की नृशंस हत्या
दूसरा मामला मंडला जिले के मनेरी का है। 15 जुलाई 2020 को हरि उर्फ हरीश ने अपने भाई संतोष के साथ मिलकर चार चचेरे भाइयों और दो मासूमों की कुल्हाड़ी और तलवार से हत्या कर दी थी। इस खौफनाक हमले में पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जांच में सामने आया कि आरोपियों का सरकारी आवास योजना के तहत मकान स्वीकृत हुआ था, लेकिन किसी कारणवश वह निरस्त हो गया था। आरोपियों को शक था कि उनके चचेरे भाई जो उपसरपंच के पद पर थे, उन्होंने ही उनका नाम योजना से कटवाया है। इसी शक के कारण हरि और संतोष ने इस वारदात को अंजाम दिया। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने हरि उर्फ हरीश को मौके से गिरफ्तार कर लिया था, जबकि उसका भाई संतोष पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।
निचली अदालत का फैसला और कानूनी कदम
मंडला जिले के अपर सत्र न्यायालय निवास के एडीजे प्रवीण कुमार सिन्हा ने 24 फरवरी 2026 को हरि उर्फ हरीश सोनी को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। अब इस मामले में दोनों ही दोषियों ने अपनी-अपनी फांसी की सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और आगामी सुनवाई के लिए 12 मई का दिन तय किया है। अदालत यह तय करेगी कि निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखा जाए या इसमें कोई बदलाव किया जाए। पूरे मामले पर स्थानीय लोगों की पैनी नजर बनी हुई है।


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