
इजरायल से लौटी पीड़िता का भारत में खौफनाक अनुभव
जबलपुर। बरगी बांध में हुए क्रूज हादसे ने सभी को झकझोर दिया है। हादसे के बाद बचाव कार्य और घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम चल रहा था, उसी समय जबलपुर अस्पताल की अमानवीय कार्यप्रणाली सामने आई है। जिला प्रशासन ने घायलों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों की सेवाएं ली थीं। इस अस्पताल के संचालक राजेश धीरावाणी पर घायलों से इलाज के पहले पैसे मांगने के गंभीर आरोप लगे हैं।
बरगी हादसे के घायलों से पैसों की मांग
हादसे में घायल हुई सविता वर्मा वाराणसी की रहने वाली हैं। वे 16 साल तक इजरायल में रहने के बाद हाल ही में भारत लौटी थीं। नाव पलटने के दौरान उनके 22 साल के बेटे ने यात्रियों की मदद की और लाइफ जैकेट बांटी। सविता ने अपने हाथों में एक बच्चे को बचाया और नर्मदा नदी से बाहर आईं। अस्पताल लाए जाने पर उनके मोबाइल फोन पानी में भीगने के कारण बंद थे। उनके पास नकद पैसे नहीं थे और ऑनलाइन भुगतान भी नहीं हो पा रहा था।
सविता वर्मा का खौफनाक अनुभव
अस्पताल प्रबंधन ने बिना इलाज किए सविता और उनके परिजनों को तुरंत बिल थमा दिया। उनकी बहन को 3 से 4 टांके लगाए गए और कोई भी दवा नहीं दी गई, लेकिन 4700 रुपये का बिल बना दिया गया। सविता ने बताया कि वे मौत के मुंह से बाहर आई थीं और उन्हें चिकित्सा की जरूरत थी, लेकिन प्रबंधन पैसों की मांग कर रहा था। इस व्यवहार से शहर की छवि पर भी सवाल उठ रहे हैं।
सरकारी घोषणा के बाद भी अनदेखी
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने जबलपुर प्रवास के दौरान यह स्पष्ट घोषणा की थी कि बरगी हादसे के प्रभावित लोगों के इलाज का खर्च प्रदेश सरकार उठाएगी। इसके बावजूद जबलपुर अस्पताल प्रबंधन ने सरकारी आदेशों की अनदेखी की। घायलों का मुफ्त और त्वरित इलाज होना चाहिए था, लेकिन कमाई की हवस में अस्पताल ने पैसे मांगे। इस मामले में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।


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