
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रशासनिक हलकों में इन दिनों एक अनोखी “वैकेंसी” चर्चा का विषय बनी हुई है। महिला प्रशासनिक अधिकारी लक्ष्मी गामड़ द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पोस्ट में ऐसे सहायक की जरूरत बताई गई है, जो “जब भी आवश्यकता हो, सामने वाले को दो थप्पड़ रसीद कर सके।”
पहली नजर में यह पोस्ट भले ही असामान्य लगे, लेकिन इसके पीछे छिपा संदेश प्रशासनिक व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करता है। आम जनता अक्सर सरकारी दफ्तरों में धीमी प्रक्रिया, लापरवाही और जवाबदेही की कमी से जूझती है। ऐसे में यह पोस्ट इस बात की ओर इशारा करता है कि लोगों का धैर्य अब जवाब देने लगा है।
सूत्रों की मानें तो इस “कल्पनात्मक पद” के लिए योग्यता भी कम दिलचस्प नहीं होगी उम्मीदवार में तुरंत निर्णय लेने की क्षमता, साहस और परिस्थिति के अनुसार “एक्शन लेने” का हुनर जरूरी बताया जा रहा है। हालांकि यह सब एक विचार के रूप में सामने आया है, लेकिन प्रशासनिक सुधार की जरूरत पर सवाल जरूर खड़े करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पोस्ट सरकारी तंत्र में व्याप्त सुस्ती और जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति पर एक करारा कटाक्ष है। डिजिटल इंडिया और सुशासन के दावों के बीच, जमीनी स्तर पर काम की गति अब भी चिंता का विषय बनी हुई है।
फिलहाल, “दो थप्पड़ असिस्टेंट” की यह वैकेंसी भले ही वास्तविक न हो, लेकिन यह जरूर दर्शाती है कि जनता अब तेज, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन चाहती है ऐसे में व्यवस्था में सुधार की जरूरत और अधिक महसूस की जा रही है।



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