
जबलपुर । पूरे मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को अब अधिक बिजली बिल का भुगतान करना पड़ेगा। मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड ने अप्रैल 2026 के लिए फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज की नई दर 5.36 प्रतिशत तय कर दी है। इस नई दर के लागू होने के बाद मई 2026 से उपभोक्ताओं पर कुल 6 प्रतिशत का अतिरिक्त बोझ पड़ गया है। मार्च 2026 में यह दर ऋणात्मक 0.63 प्रतिशत थी। अप्रैल 2026 में पहले ही 4.8 प्रतिशत की वृद्धि की जा चुकी थी। लगातार हो रही इन बढ़ोत्तरी से आम लोगों की आर्थिक चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। राज्य के सभी जिलों में इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है और लोग परेशान हो रहे हैं।
नई दरें और बढ़ोत्तरी का गणित
नियमों के अनुसार यदि सरचार्ज 5 प्रतिशत से अधिक हो जाता है, तो 5 प्रतिशत की वसूली अपने आप हो जाती है। शेष राशि का 90 प्रतिशत हिस्सा भी फॉर्मूले के माध्यम से अपने आप लिया जाता है। अप्रैल 2026 के लिए बची हुई राशि 0.40 प्रतिशत थी, जिसका 90 प्रतिशत 0.36 प्रतिशत होता है। इसे 5 प्रतिशत में जोड़ने पर कुल 5.36 प्रतिशत सरचार्ज बनता है। इस नई दर को 24 अप्रैल 2026 से 1 महीने की अवधि के लिए लागू कर दिया गया है। इस गणना के कारण ही आम उपभोक्ता पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ पड़ा है।
बिजली खरीद और लागत का पूरा विवरण
आंकड़ों के अनुसार फरवरी 2026 में कुल 8,492,730,417 kWh बिजली की खरीद की गई थी। इसमें से 335,678,710 kWh बिजली को बाहर के राज्यों में बेच दिया गया। इसके बाद शुद्ध रूप से 8,157,051,707 kWh बिजली बची। वास्तविक औसत लागत की बात करें तो यह 3.97 रुपये प्रति यूनिट रही, जबकि अनुमानित लागत 3.66 रुपये प्रति यूनिट आंकी गई थी। राज्य के बाहर से 5,403,616,295 kWh बिजली खरीदी गई और इसकी अंतर-राज्यीय हानि 3.62 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं राज्य के भीतर से 3,089,114,122 kWh बिजली की खरीद की गई, जिसकी हानि 2.61 प्रतिशत रही।
अधिकारियों की चुप्पी और जनता की अनभिज्ञता
पावर मैनेजमेंट कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक शैलेंद्र सक्सेना ने सभी संबंधित कंपनियों को यह आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही आईटी विभाग को इसे कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। इस बड़ी मूल्य वृद्धि के बावजूद किसी भी जिम्मेदार अधिकारी की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। दूसरी ओर आम जनता इस पूरे बदलाव से पूरी तरह अनजान है और उन्हें इस नए बोझ की कोई जानकारी नहीं है। राज्य सरकार की ओर से भी अभी तक इस संबंध में कोई सार्वजनिक सूचना जारी नहीं की गई है।
विशेषज्ञ की प्रतिक्रिया और चिंताएं
विद्युत मामलों के विशेषज्ञ राजेंद्र अग्रवाल ने इस कदम को पूरी तरह से अनुचित और अदूरदर्शी करार दिया है। उनका कहना है कि राज्य में पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद सरकार और बिजली कंपनियां लगातार जनता पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की गुप्त रूप से की गई बढ़ोतरी के स्थान पर बिजली कंपनियों को अपना आंतरिक ढांचा मजबूत करना चाहिए। इस ताबड़तोड़ वृद्धि से आम आदमी का मासिक बजट पूरी तरह से प्रभावित हुआ है और लोगों के बीच गहरा असंतोष देखा जा रहा है।
राज्य भर में बढ़ता आक्रोश और भविष्य की चुनौतियां
बिजली की दरों में लगातार हो रहे बदलावों से राज्य के अलग-अलग हिस्सों में उपभोक्ताओं की नाराजगी सामने आ रही है। उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं दोनों के लिए यह स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। आने वाले समय में यदि इसी प्रकार बिजली के दामों में वृद्धि होती रही तो लोगों की जेब पर इसका और अधिक गहरा प्रभाव पड़ेगा। अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों की चुप्पी से स्थिति और अधिक गंभीर हो रही है और उपभोक्ता एक स्पष्ट जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


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