आत्मनिर्भर ग्रामीण विकास हेतु संसाधनों की आवश्यकता

ऑल इंडिया पंचायत परिषद का 68वां स्थापना दिवस, संवैधानिक अधिकार और त्रिस्तरीय व्यवस्था की उपलब्धियां

जबलपुर। भेड़ाघाट में अखिल भारतीय पंचायत परिषद के 68वें स्थापना दिवस का आयोजन किया गया। मध्य प्रदेश राज्य पंचायत परिषद के तत्वावधान में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम की अध्यक्षता अशोक सिंह सेंगर ने की। समारोह में देशभर से आए प्रतिनिधियों ने ग्रामीण स्वशासन को और अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा की।

​पंचायत परिषद की ऐतिहासिक यात्रा

​मुख्य वक्ता के रूप में परिषद के मुख्य महामंत्री शीतला शंकर विजय मिश्र ने संस्थान के गौरवशाली इतिहास की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 12 अप्रैल 1958 को गठित इस परिषद ने अपने अस्तित्व के 68 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इस लंबी अवधि में संस्था ने निरंतर पंचायतों के अधिकारों की वकालत की है। संगोष्ठी के दौरान त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में परिषद के योगदान और 1993 के संवैधानिक बदलावों के बाद आए सुधारों का विश्लेषण किया गया।

​संवैधानिक अधिकार और संसाधनों की उपलब्धता

​कार्यक्रम में 73वें संविधान संशोधन के प्रभाव पर विशेष शोध पत्र पढ़े गए। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि संवैधानिक दर्जा मिलने से गांवों को नई शक्ति मिली है, किंतु वास्तविक सशक्तीकरण के लिए पर्याप्त बजट और संसाधनों की आवश्यकता अभी भी बनी हुई है। शीतला शंकर विजय मिश्र ने मत रखा कि गांवों का स्वावलंबन केवल नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके लिए धरातल पर ठोस वित्तीय आवंटन जरूरी है।

​पंचायत भवनों का आधुनिकीकरण

​परिषद ने ग्राम सभाओं को अधिक कार्यकारी शक्तियां प्रदान करने का प्रस्ताव रखा। चर्चा के दौरान आधुनिक सुविधाओं से युक्त पंचायत सचिवालयों के निर्माण पर बल दिया गया, ताकि ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे सभी शासकीय सुविधाएं मिल सकें। इसके साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सरपंचों और पंचों को प्रोत्साहित करने हेतु प्रतिवर्ष 24 अप्रैल को पंचायत दिवस के अवसर पर विशेष सम्मान समारोह आयोजित करने का सुझाव भी सर्वसम्मति से पारित हुआ।

​चलो गांव की ओर अभियान का लक्ष्य

​मुख्य अतिथि अशोक सिंह जादौन ने परिषद की भावी योजनाओं का खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने चलो गांव की ओर अभियान की घोषणा की, जिसके माध्यम से देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में जन-जागरण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इस अभियान का उद्देश्य अंतिम छोर पर बैठे जनप्रतिनिधियों को उनके अधिकारों के प्रति शिक्षित करना और स्थानीय स्तर पर नेतृत्व क्षमता का विकास करना है।

​महिला नेतृत्व के संग सामूहिक संकल्प

​शिव प्रताप पटेल द्वारा संचालित इस समारोह में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई महिला सरपंचों और पंचायत पदाधिकारियों ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। विभिन्न सत्रों में ग्रामीण विकास की चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तृत संवाद हुआ। समापन अवसर पर उपस्थित सभी प्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप से पंचायतों को भ्रष्टाचार मुक्त और विकासोन्मुख बनाने का संकल्प लिया। बड़ी संख्या में मौजूद जनसमूह ने लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को मजबूत करने की शपथ के साथ कार्यक्रम का समापन किया।

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