
मंडला। जबलपुर और मंडला पुलिस की संयुक्त सक्रियता से क्रिकेट सट्टे के एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क को ध्वस्त करने में सफलता मिली है। मंडला के कटरा इलाके में एक किराए के मकान को ठिकाना बनाकर संचालित हो रहे आईपीएल सट्टे पर पुलिस ने आधी रात को छापा मारा। इस कार्रवाई में जबलपुर के रहने वाले 3 सट्टेबाजों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए आरोपियों के पास से करोड़ों के दांव और लाखों के लेनदेन का कच्चा चिट्ठा बरामद हुआ है। पुलिस की इस कार्रवाई से सट्टा बाजार में हड़कंप मच गया है क्योंकि इसके तार जबलपुर के बड़े सटोरियों से जुड़े पाए गए हैं।
दबिश के दौरान भागने का प्रयास और गिरफ्तारी
पुलिस अधीक्षक को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कटरा क्षेत्र के एक मकान में बाहरी युवक संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त हैं। सूचना की तस्दीक के बाद पुलिस टीम ने मकान की घेराबंदी की। जिस वक्त पुलिस ने दरवाजा खटखटाया, उस समय रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और मुंबई इंडियंस के बीच मुकाबला चल रहा था और आरोपी मोबाइल फोन के जरिए दांव लगवा रहे थे। पुलिस को देखते ही आरोपियों ने छत के रास्ते भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद जवानों ने घेराबंदी कर जमुना प्रसाद पटेल, शुभम कोरी और आकाश राजभर को धर दबोचा। पकड़े गए तीनों आरोपी मूल रूप से जबलपुर के निवासी हैं और पिछले कुछ समय से मंडला में छिपकर काम कर रहे थे।
भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और रिकॉर्ड जब्त
तलाशी के दौरान पुलिस को मौके से सट्टेबाजी में इस्तेमाल होने वाला हाई-टेक सेटअप मिला है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 17 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, वाई-फाई राउटर, वॉइस रिकॉर्डर और बिजली कटौती से बचने के लिए रखा गया इन्वर्टर जब्त किया है। इसके अलावा आरोपियों की 2 मोटरसाइकिल भी पुलिस ने अपने कब्जे में ली हैं। मौके से मिले रजिस्टर और मोबाइल एप के डेटा की जांच करने पर पुलिस अधिकारियों के होश उड़ गए। शुरुआती जांच में ही लगभग 50 लाख रुपए के अवैध लेनदेन का हिसाब सामने आया है। इस रजिस्टर में मंडला, जबलपुर और डिंडौरी समेत आसपास के कई जिलों के ग्राहकों और एजेंटों के नाम दर्ज हैं।
मुख्य सरगना मनीष जिमनानी के नेटवर्क का पर्दाफाश
पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे केवल मोहरे के तौर पर काम कर रहे थे और इस पूरे अवैध कारोबार का असली सूत्रधार जबलपुर का मुख्य सटोरिया मनीष जिमनानी है। आरोपियों ने बताया कि वे मंडला और आसपास के क्षेत्रों से सट्टे की बुकिंग लेते थे और सारा डेटा सीधे मनीष जिमनानी को भेजते थे। दांव की रकम का मिलान और अंतिम हिसाब-किताब जबलपुर से ही मनीष द्वारा संचालित किया जाता था। इस जानकारी के बाद पुलिस ने मनीष जिमनानी को मुख्य आरोपी बनाते हुए उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है और उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
पड़ोसी जिलों तक फैला था सट्टेबाजी का जाल
पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपियों ने जानबूझकर मंडला को अपना केंद्र बनाया था ताकि वे जबलपुर पुलिस की सीधी नजरों से बच सकें। वे तकनीकी उपकरणों के जरिए जबलपुर के सट्टा बाजार से जुड़े हुए थे। जब्त किए गए दस्तावेजों से स्पष्ट हुआ है कि सट्टे का यह जाल केवल शहरों तक सीमित नहीं था, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी इसमें फंसाया जा रहा था। पुलिस अब उन नंबरों की कॉल डिटेल खंगाल रही है जिनसे सट्टे के भाव तय किए जाते थे। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ अन्य बड़े नामों के खुलासे होने की पूरी संभावना है।


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