
आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ: एलपीजी के मुकाबले 25 प्रतिशत तक होगी बचत
जबलपुर। जबलपुर सहित 14 जिलों के ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राष्ट्रीय गैस ग्रिड और पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान के तहत गेल इंडिया ने नागपुर से जबलपुर तक प्राकृतिक गैस की मुख्य पाइपलाइन बिछाने का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस महत्वपूर्ण परियोजना की टेस्टिंग प्रक्रिया भी संपन्न हो चुकी है, जिससे अब प्रदेश के 14 जिलों के घरों तक सीधे गैस पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। जबलपुर के समीप कोसमघाट में एक अत्याधुनिक गैस प्लांट तैयार किया गया है, जो इस पूरे नेटवर्क के मुख्य जंक्शन के रूप में संचालित होगा। वर्तमान में इस पाइपलाइन के जरिए नागपुर स्थित जेएसडब्ल्यू प्लांट को गैस की आपूर्ति प्रारंभ कर दी गई है।
परियोजना की संरचना और निवेश का विवरण
इस विशाल गैस ग्रिड परियोजना को व्यवस्थित रूप से तीन चरणों में क्रियान्वित किया गया है। इसके पहले चरण में मुंबई से नागपुर तक 698 किमी लंबी लाइन का निर्माण किया गया है। दूसरे चरण में नागपुर से ओडिशा के झारसुगुड़ा तक 692 किमी का खंड विकसित किया जा रहा है। परियोजना के तीसरे और सबसे अहम हिस्से के रूप में नागपुर से जबलपुर के बीच 317 किमी लंबी पाइपलाइन का जाल बिछाया गया है। इस संपूर्ण बुनियादी ढांचे पर कुल 7844 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। विशेष रूप से नागपुर-जबलपुर खंड के निर्माण कार्य पर 1100 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इस तंत्र के सक्रिय होने से मध्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
शहरी वितरण नेटवर्क और समय सीमा
जबलपुर शहर के भीतर पाइपलाइन के माध्यम से गैस वितरण का जिम्मा मेघा इंफ्रास्ट्रक्चर को दिया गया है। शहरी क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाने की प्रक्रिया जारी है, हालांकि निर्माण कार्यों की जटिलता के कारण उपभोक्ताओं के घरों तक अंतिम कनेक्शन पहुंचने में लगभग 1 साल का समय लगने का अनुमान है। शहर के रिहायशी इलाकों में लगभग 45 किमी का पाइपलाइन नेटवर्क तैयार किया जाना है। इस कार्य के पूर्ण होते ही उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग और रिफिलिंग की प्रक्रिया से राहत मिल जाएगी। पाइप नेचुरल गैस के माध्यम से चौबीस घंटे निर्बाध गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।
आर्थिक लाभ और बिलिंग की नई व्यवस्था
पीएनजी के उपयोग से आम जनता को वित्तीय लाभ प्राप्त होगा। विशेषज्ञों के अनुसार एलपीजी सिलेंडर की तुलना में पीएनजी की लागत लगभग 25 प्रतिशत तक कम रहने की संभावना है। इसकी बिलिंग प्रणाली बिजली के मीटर की तरह ही काम करेगी। उपभोक्ता जितनी गैस का उपयोग करेंगे, उन्हें केवल उतने का ही भुगतान करना होगा। वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण एलपीजी की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती रहती है, ऐसी स्थिति में यह स्वदेशी ग्रिड एक विश्वसनीय विकल्प साबित होगा। यह ईंधन पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल है, जो वायु प्रदूषण को कम करने में भी सहायक होगा।
14 लाख घरों और औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेगी ऊर्जा
इस योजना का विस्तार जबलपुर के अलावा सिवनी और छिंदवाड़ा सहित कुल 14 जिलों तक रहेगा। परियोजना का लक्ष्य इन जिलों के लगभग 14 लाख परिवारों को पाइपलाइन कनेक्शन से जोड़ना है। घरेलू उपयोग के अलावा इस ग्रिड का लाभ औद्योगिक इकाइयों और सीएनजी स्टेशनों को भी मिलेगा। औद्योगिक क्षेत्रों को सस्ती गैस मिलने से उत्पादन लागत में कमी आएगी और परिवहन क्षेत्र को भी सस्ता ईंधन उपलब्ध होगा। कोसमघाट प्लांट के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद अब गेल इंडिया का ध्यान शहरी वितरण प्रणाली को गति देने पर केंद्रित है, ताकि निर्धारित अवधि में आम जनता को सस्ती और सुलभ ऊर्जा प्राप्त हो सके।


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