
जबलपुर। नरसिंहपुर जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और ग्रामीण विकास प्राधिकरण के तहत कराए गए सड़क निर्माण कार्यों में बड़ी अनियमितता सामने आई है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ जबलपुर ने घटिया निर्माण और सरकारी धन के दुरुपयोग के मामले में तत्कालीन महाप्रबंधक, सहायक प्रबंधक और लेखा अधिकारी सहित ठेकेदारों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की है। जांच में पाया गया है कि इस पूरे मामले में सरकारी खजाने को 65 लाख रुपये की चपत लगाई गई है।
तकनीकी जांच में निर्माण गुणवत्ता मानकों के विपरीत मिली
ग्वालियर के निवासी हेमंत खरे द्वारा जबलपुर ईओडब्ल्यू में की गई शिकायत के आधार पर इस मामले की तकनीकी जांच शुरू की गई थी। जांच टीम ने पाया कि कोड़िया से लिलवानी, गाडरवारा-तेन्दूखेड़ा रोड से लिलवानी मार्ग और गोटीटोरिया से सिंगपुर रोड तक बनाई गई सड़कों के निर्माण में भारी लापरवाही बरती गई। जनवरी 2023 के दौरान हुए इन कार्यों में उपयोग की गई सामग्री के सैंपल लैब टेस्ट में फेल हो गए। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि सड़कों का निर्माण निर्धारित मानकों के विपरीत बेहद घटिया स्तर का था।
फर्जी वाहन व्यय और प्रशासनिक मिलीभगत का खुलासा
जांच के दौरान केवल निर्माण संबंधी खामियां ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। सड़क निरीक्षण के नाम पर 5.50 लाख रुपये का अवैध भुगतान किया गया। यह राशि उन वाहनों के उपयोग के नाम पर निकाली गई, जिनका वास्तविक अस्तित्व या उपयोग संदेहास्पद पाया गया। इस फर्जीवाड़े में तत्कालीन महाप्रबंधक विष्णु कुमार टेंटवाल और लेखा अधिकारी अनिल वासनिक की सीधी संलिप्तता पाई गई है। अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया।
इन पांच जिम्मेदारों को बनाया गया आरोपी
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने साक्ष्यों के आधार पर पांच प्रमुख लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। आरोपियों की सूची में तत्कालीन महाप्रबंधक विष्णु कुमार टेंटवाल, तत्कालीन सहायक प्रबंधक श्रीमती आयुषी उपाध्याय और लेखा अधिकारी अनिल वासनिक शामिल हैं। इनके साथ ही निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार मेसर्स मदनलाल एण्ड पार्टनर्स जिला नरसिंहपुर और मेसर्स श्रीराम कंस्ट्रक्शन मुरैना के विरुद्ध भी कार्यवाही की गई है। इन सभी पर आपसी मिलीभगत और आपराधिक षडयंत्र के तहत सरकारी राशि का गबन करने के आरोप हैं।
जनता की गाढ़ी कमाई का गबन और आपराधिक षडयंत्र
पूरी पड़ताल के बाद यह निष्कर्ष निकला कि गुणवत्ताहीन सड़कों के लिए लगभग 65 लाख रुपये का भुगतान जानबूझकर किया गया था। निर्माण की गुणवत्ता शून्य होने के बावजूद अधिकारियों ने कागजी खानापूर्ति कर ठेकेदारों को भुगतान जारी कर दिया। ईओडब्ल्यू के अनुसार यह मामला जनता के पैसे की धोखाधड़ी और एक सुनियोजित आपराधिक साजिश का उदाहरण है। फिलहाल विभाग ने सभी संबंधित दस्तावेजों को जब्त कर आगे की वैधानिक कार्यवाही तेज कर दी है ताकि इस भ्रष्टाचार में शामिल अन्य कड़ियों का भी पता लगाया जा सके।


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