Globe’s most trusted news site

स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, 121 क्लीनिक और 5 अस्पतालों के लाइसेंस रद्द

जबलपुर। स्वास्थ्य सुविधाओं के संचालन और नियमों के पालन को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने शहर के 121 क्लीनिकों और 5 अस्पतालों के पंजीयन निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं। इन सभी स्वास्थ्य केंद्रों को 1 अप्रैल से अवैध घोषित करते हुए वहां नए मरीजों की भर्ती और उपचार पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। नियमों के अनुसार निजी चिकित्सा संस्थानों को संचालन के लिए हर तीन साल में अपने पंजीकरण का नवीनीकरण कराना अनिवार्य होता है, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी इन संस्थानों ने आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं की थी।

​पंजीकरण प्रक्रिया और समय सीमा का उल्लंघन

​स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार क्लीनिक और अस्पताल संचालकों को नवीनीकरण के लिए 1 जनवरी से 28 फरवरी तक का पर्याप्त समय दिया गया था। इस अवधि के दौरान आवेदन न करने वाले संस्थानों को विभाग ने गंभीर माना है। जबलपुर में कुल 240 क्लीनिक संचालित हैं, जिनमें से 89 संचालकों ने नवीनीकरण के लिए किसी भी प्रकार का आवेदन प्रस्तुत नहीं किया। इसके अतिरिक्त 32 अन्य संस्थानों के दस्तावेजों में कमियां पाई गईं, जिसके कारण उनके आवेदन को अमान्य कर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग की इस बड़ी कार्रवाई के बाद शहर के निजी चिकित्सा जगत में खलबली मच गई है।

​अस्पतालों की खामियां और निरस्तीकरण के कारण

​विभाग ने जिन पांच प्रमुख अस्पतालों के लाइसेंस रद्द किए हैं, उनमें अलग-अलग तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं। एससी गुप्ता मेमोरियल हॉस्पिटल में निरीक्षण के दौरान मरीजों की देखभाल के लिए आवश्यक स्टाफ की भारी कमी पाई गई। संकल्प हॉस्पिटल के मामले में नगर निगम से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन नहीं हो सका। नामदेव नर्सिंग होम ने निर्धारित समय में पंजीकरण नवीनीकरण की फाइल ही जमा नहीं की थी। वहीं बटालिया आई हॉस्पिटल और सरकार हॉस्पिटल की ओर से स्वयं ही संस्थान बंद करने की इच्छा जताते हुए आवेदन दिया गया था। इन सभी केंद्रों को अब तत्काल प्रभाव से चिकित्सा कार्य बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।

​क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब पर गाज

​जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि बड़े अस्पतालों की तुलना में क्लीनिकों की स्थिति कहीं अधिक चिंताजनक है। पंजीयन रद्द होने वाले 121 क्लीनिकों की सूची में केवल एलोपैथी ही नहीं, बल्कि आयुर्वेदिक और होम्योपैथी क्लीनिक भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। इसके साथ ही कई पैथोलॉजी लैब और डायग्नोस्टिक सेंटरों के लाइसेंस भी नियमों की अनदेखी के कारण निरस्त किए गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ नवनीत कोठारी ने स्पष्ट किया है कि यदि 1 अप्रैल के बाद भी इनमें से कोई संस्थान संचालित होता पाया गया, तो मध्य प्रदेश नर्सिंग होम एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

​पुन: पंजीकरण और कानूनी प्रावधानों की अनिवार्यता

​विभाग ने उन संचालकों को राहत का रास्ता भी दिखाया है जिनसे समय सीमा चूक गई है। ऐसे संचालक एमपी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पुनः नए सिरे से पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि जब तक नया प्रमाण पत्र जारी नहीं होता, तब तक वे किसी भी मरीज का इलाज नहीं कर पाएंगे। शासन के नियमों के तहत चिकित्सा संस्थानों के पास अग्नि सुरक्षा, नगर निगम की एनओसी और योग्य पैरामेडिकल स्टाफ का होना अनिवार्य है। इन मानकों को पूरा किए बिना कोई भी केंद्र वैध नहीं माना जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

Tags

Leave a Reply

Ad with us

Contact us : admin@000miles.com

Admin

Kailash Pandey
Anuppur
(M.P.)

Categories

error: Content is protected !!