
भोपाल। बोर्ड ने विभागीय कर्मचारियों के लिए आयोजित होने वाली जनरल डिपार्टमेंटल कंपेटेटिव एग्जामिनेशन (जीडीसीई) की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। इस नई नीति का मुख्य लक्ष्य भर्ती प्रक्रिया को पहले से अधिक पारदर्शी, सरल और त्वरित बनाना है। बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर अजय गोयल द्वारा जारी नवीन निर्देशों के अनुसार, अब जीडीसीई के माध्यम से प्रत्यक्ष भर्ती कोटे की 25 प्रतिशत रिक्तियों को भरने के लिए जोनल रेलवे स्तर पर ही परीक्षाएं संपन्न कराई जाएंगी। यह परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) या टैबलेट आधारित टेस्ट (टीबीटी) के माध्यम से सिंगल स्टेज में आयोजित होंगी।
एकीकृत परीक्षा की पुरानी व्यवस्था में संशोधन
पूर्व में रेलवे बोर्ड ने सभी जोनों को शामिल करते हुए भारतीय रेलवे स्तर पर एक एकीकृत परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए थे, जिसे अब बदल दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत जोनल रेलवे का समूह बनाने की पुरानी अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। अब प्रत्येक रेलवे जोन अपनी प्रशासनिक आवश्यकताओं और रिक्त पदों की संख्या के अनुसार स्वतंत्र रूप से जीडीसीई का आयोजन करने के लिए अधिकृत होगा। हालांकि, भविष्य में प्रशासनिक सुविधा को देखते हुए परीक्षा संचालन एजेंसी चरणों के आधार पर कुछ जोनों का समूह बना सकती है, लेकिन वर्तमान में जोनवार परीक्षा ही प्राथमिकता रहेगी।
विभिन्न श्रेणियों के लिए निर्धारित नया परीक्षा पैटर्न
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह नई परीक्षा प्रणाली तकनीशियन, जूनियर इंजीनियर, एनटीपीसी ग्रेजुएट और नॉन-ग्रेजुएट, सेक्शन कंट्रोलर और मिनिस्ट्रियल कैडर समेत अन्य श्रेणियों पर समान रूप से लागू होगी। इन पदों के लिए अभ्यर्थियों को बहुविकल्पीय प्रश्नों पर आधारित एक ही प्रश्नपत्र हल करना होगा। इस परीक्षा का कठिनाई स्तर रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) की द्वितीय चरण की परीक्षा के समकक्ष रखा गया है। वहीं, सहायक लोको पायलट (एएलपी) के पद के लिए अलग परीक्षा पैटर्न और विशेष पाठ्यक्रम निर्धारित किया गया है, ताकि इस पद की विशिष्ट तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
रिक्त पदों को भरने और वार्षिक कैलेंडर पर जोर
रेलवे बोर्ड ने भारतीय रेलवे में पदों को समय पर भरने के लिए एक वार्षिक भर्ती कैलेंडर भी जारी किया है। यदि पदोन्नति कोटे के तहत निर्धारित रिक्तियां विभागीय पदोन्नति के सामान्य माध्यमों से नहीं भर पाती हैं, तो उन्हें खाली रखने के स्थान पर लिमिटेड डिपार्टमेंटल कंपेटेटिव एग्जामिनेशन (एलडीसीई) या जीडीसीई के जरिए भरा जाएगा। यदि इन विभागीय परीक्षाओं के उपरांत भी पद रिक्त रह जाते हैं, तो उन्हें अगले वर्ष की सीधी भर्ती कोटे (डीआरक्यू) में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। जिन पदों के लिए विभागीय परीक्षा का नियम नहीं है, उन्हें सीधे आगामी वर्ष की सीधी भर्ती में जोड़ दिया जाएगा। इस पहल से रेलवे के परिचालन को मजबूती मिलेगी।
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