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लोकसभा–विधानसभा से भी बड़ी है ग्रामसभा  शीतला शंकर विजय मिश्र

लोकसभा–विधानसभा से भी बड़ी है ग्रामसभा  शीतला शंकर विजय मिश्र



त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तिकरण के लिए एक और संविधान संशोधन की मांग

भोपाल/शिवपुरी।
मध्यप्रदेश राज्य पंचायत परिषद के तत्वावधान में शिवपुरी जिले के करेरा में आयोजित विशाल सम्मेलन में हजारों निर्वाचित प्रतिनिधियों ने पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने का संकल्प लिया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय पंचायत परिषद के मुख्य महामंत्री शीतला शंकर विजय मिश्र ने कहा कि “लोकसभा और विधानसभा से भी बड़ी है ग्रामसभा”। उन्होंने भारत सरकार से मांग की कि 73वें और 74वें संविधान संशोधनों की मूल भावना के अनुरूप एक और संशोधन किया जाए ताकि पंचायती राज संस्थाओं को वास्तविक अधिकार मिल सकें और नौकरशाही पर निर्भरता खत्म हो।

श्री मिश्र ने स्पष्ट कहा कि कई राज्यों में ऐसे प्रावधान हैं, जिनके तहत कलेक्टर/कमिश्नर किसी निर्वाचित प्रतिनिधि को निलंबित कर सकते हैं। यह अलोकतांत्रिक है और नौकरशाही को अनुचित शक्ति प्रदान करता है। उन्होंने आग्रह किया कि केंद्र सरकार एक समान पंचायती राज मॉडल एक्ट बनाए, जो सभी राज्यों पर लागू हो। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक राज्यों को निर्देश दिए जाएं कि वे अपने पंचायती राज और नगरपालिका अधिनियमों से ऐसे प्रावधान तत्काल हटाएं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान की धारा 243(ब) में ग्रामसभा का प्रावधान है, लेकिन उसके अधिकार और कार्यपद्धति राज्यों पर छोड़ दी गई है। इसके चलते राज्यों में ग्रामसभा की शक्तियों में भारी अंतर है। यदि ग्रामसभा को स्पष्ट अधिकार दिए जाएं तो ही लोकतंत्र की असली ताकत गाँव तक पहुंचेगी।

वार्ड सभा का प्रावधान भी आवश्यक

सम्मेलन के मुख्य अतिथि एवं अखिल भारतीय पंचायत परिषद के अध्यक्ष अशोक सिंह जादौन ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में 74वें संशोधन के तहत वार्ड समितियों का प्रावधान है, किंतु ग्रामीण पंचायतों में ऐसा प्रावधान नहीं है। उन्होंने मांग की कि पंचायत एक्ट में भी वार्ड सभाओं का उल्लेख अनिवार्य किया जाए ताकि पारदर्शिता और लोक भागीदारी को व्यवहारिक बनाया जा सके।

संगठन में ही शक्ति है

विशिष्ट अतिथि महेंद्र कुमार सिंह यादव, उपाध्यक्ष अखिल भारतीय पंचायत परिषद ने कहा कि विभाजित संगठनों के कारण पंचायत प्रतिनिधियों की शक्ति कमज़ोर होती जा रही है और नौकरशाही हावी हो जाती है। उन्होंने अपील की कि सभी सरपंच, उपसरपंच एवं पंचायत प्रतिनिधि अपने-अपने संगठन को मध्यप्रदेश पंचायत परिषद में विलीन कर एक सशक्त धारा बनाएं।

चलो गाँव की ओर अभियान

सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए अशोक सिंह सेंगर, अध्यक्ष मध्यप्रदेश राज्य पंचायत परिषद ने कहा कि परिषद “चलो गाँव की ओर” अभियान के माध्यम से ग्राम सशक्तिकरण की दिशा में कार्य कर रही है। शीघ्र ही राज्यस्तरीय सम्मेलन आयोजित कर पंचायत प्रतिनिधियों की आवाज़ को और बुलंद किया जाएगा।

प्रतिनिधियों की बड़ी भागीदारी

इस अवसर पर महासचिव महेंद्र सिंह यादव, प्रधान सचिव बहादुर सिंह यादव, सरपंच नेता महेंद्र सिंह बुंदेला, प्रवक्ता नरेंद्र सिंह चौहान, महिला विंग की अध्यक्ष प्रेमलता सिंह, प्रदेश महासचिव बद्रीदास बैरागी, प्रदेश प्रवक्ता शैलेंद्र सिंह रावत सहित बड़ी संख्या में जिला एवं जनपद पंचायत अध्यक्ष, सरपंच, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य मौजूद रहे।

सम्मेलन में प्रतिनिधियों ने भ्रष्टाचार, नौकरशाही के हस्तक्षेप, और पंचायती राज संस्थाओं की चुनौतियों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। अंत में जिला पंचायत अध्यक्ष पाल जी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया और शीघ्र ही फिर मिलने की घोषणा की।

कार्यक्रम में शामिल सैकड़ों सरपंचों और जनप्रतिनिधियों ने नारा बुलंद किया –
“लोकसभा न विधानसभा, सबसे बड़ी है ग्रामसभा

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