
“किसी भी अनजान कॉल, डर या धमकी के आगे झुकिए नहीं। डिजिटल अरेस्ट एक जाल है कानून से बड़ा कुछ नहीं।”
“डरो मत – FIR करो। पुलिस आपके साथ है।”
अपराध की डिजिटल दुनिया से न्याय की सुबह तक
उस सुबह की शुरुआत…
हर सुबह की तरह थी वो भी। मगर अनूपपुर जिले के कोतमा निवासी व्यापारी आशीष ताम्रकार के लिए, वो सुबह आठ साल पहले ही खत्म हो चुकी थी — जब एक अनजाने फोन कॉल ने उसकी जिंदगी की नींव हिला दी।
53 वर्षीय आशीष, एक प्रतिष्ठित भाजपा नेता अवधेश ताम्रकार का पुत्र और इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारी — जिसकी मेहनत, निवेश और साख… एक डिजिटल गिरोह के निशाने पर आ चुकी थी।
वायदा का बहाना, ठगी की बुनियाद
साल 2017 आशीष ने वायदा बाजार में 23 लाख रुपए का निवेश किया था। रकम मिलने ही वाली थी कि अचानक एक कॉल आया
“हम नीमच थाने से बोल रहे हैं… आपके निवेश की रकम हवाला से जुड़ी है। CBI जांच कर रही है। आपको तुरंत सहयोग करना होगा, वरना गिरफ्तारी तय है।”
वह दिन था और अगले आठ साल तक डर की गिरफ़्त नहीं टूटी।डर का डिजिटल कारोबार
मोबाइल स्क्रीन पर पुलिस की वर्दी में नकली लोग
वीडियो कॉल पर फर्जी अदालत बैकग्राउंड में सायरन धमकी, गिरफ्तारी और ‘जमानत’ की मांग
“आपको अभी बेल चाहिए? ₹2 लाख तुरंत ट्रांसफर करें। नहीं तो टीम रवाना हो रही है।”
महेंद्र शर्मा, रवि डेहरिया, और सौरभ शर्मा – तीन नाम, जो कभी CBI अफसर बनते, कभी हाईकोर्ट वकील।
और एक नया शब्द, जिसे इस गिरोह ने गढ़ा था – “डिजिटल अरेस्ट”।
जिसमें न हथकड़ी थी, न वॉरंट सिर्फ डर, इतना गहरा कि व्यापारी 45 लाख तक फंसता गया।
साज़िश की मशीनरी गिरोह ने भोपाल और विदिशा में खोलीं फर्जी कंपनियां R.B. ट्रेडर्स तिरुपति फिनटेक
वेबकैम से अदालत ऑडियो मॉड्यूलेटर से अलग-अलग पहचान फर्जी नोटिस कई बैंक खाते और UPI ID
पुलिस को भी भ्रमित करने वाला ऐसा सेटअप, जो किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं था।
गिरोह का टूटता साम्राज्य
2022महेंद्र शर्मा, जो पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड था — विदिशा बाजार में चाकूओं से गोदकर मारा गया।
कुछ ही माह बाद, टेक ऑपरेटर रवि डेहरिया सड़क हादसे में मारा गया।
मगर सबसे खतरनाक था सौरभ शर्मा, जो अब भी नेटवर्क चला रहा था।
पुलिस का प्लान, साइबर ठग की हार
शिकायत जब पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान तक पहुंची, उन्होंने तत्काल दो टीमें गठित कीं

टीम लीडर्स
एसडीओपी आरती शाक्य एएसपी इसरार मंसूरी थाना प्रभारी रत्नांबर शुक्ला
टीम में शामिल रहे
लालजी श्रीवास्तव, रामखेलावन यादव, मनोज उपाध्याय, राजेंद्र अहिरवार, पंकज मिश्रा
हर कॉल की CDR रिपोर्ट, बैंक ट्रांसफर की ट्रेसिंग, IMEI ट्रैकिंग और साइबर विशेषज्ञों की मदद से सौरभ शर्मा (32), गिरधर कॉलोनी, विदिशा को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तारी – पर्दे के पीछे की दुनिया
सौरभ के पास से जब्त1 लैपटॉप 2 मोबाइल 17 फर्जी दस्तावेज
एक डिजिटल डायरी — जिसमें 8 साल के लेनदेन का पूरा लेखा-जोखा
जांच में सामने आया हर स्क्रिप्ट पहले से तय होती थी
‘डिजिटल अरेस्ट’ पूरी तरह मनोवैज्ञानिक जाल था डर को हथियार बनाकर करोड़ों की ठगी
न्याय की सुबह 8 साल बाद व्यापारी ने पहली बार निडर होकर चैन की नींद ली।₹45 लाख की क्षति के बावजूद उसे मिला
“डर से आज़ादी… और न्याय का भरोसा”
इस ऐतिहासिक कार्रवाई से कोतमा थाने ने अनूपपुर जिले का पहला बड़ा साइबर अपराध केस सुलझाया।
पुलिस की सूझबूझ, जनता की जागरूकता
पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान की सतर्क निगरानी और टीम की सूझबूझ ने साबित कर दिया
“सिर्फ हथियारों से नहीं, सूचनाओं और साइबर बुद्धिमत्ता से भी अपराधी परास्त होते हैं।”
“किसी भी अनजान कॉल, डर या धमकी के आगे झुकिए नहीं। डिजिटल अरेस्ट एक जाल है — कानून से बड़ा कुछ नहीं।”
“डरो मत – FIR करो। पुलिस आपके साथ है।”



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