

अनूपपुर से कोतमा तक फैला ऑनलाइन गेमिंग ठगी रैकेट – 7 गिरफ्तार, 40 से अधिक फर्जी बैंक खाते और निजी बैंकों की संदिग्ध भूमिका उजागर
डिजिटल ठगों तक की साजिश
कोतमा का एक संकीर्ण गली, मोबाइल पर झुका एक युवक आंखें स्क्रीन पर, और पीछे बजता एक वॉइस ओवर
“₹5000 लगाएंगे, ₹15,000 मिलेंगे… गेमिंग एप 11xPlay में किस्मत चमकाइए!”
लेकिन ये “किस्मत” दरअसल एक सुनियोजित डिजिटल धोखाधड़ी का फंदा था, जिसे इंदौर से संचालित किया जा रहा था और जिसकी जड़ें कोतमा, भिलाई, बिहार और डिंडौरी तक फैली थीं।
पर्दाफाश – डिजिटल जालसाजी का चक्रव्यूह टूटा
अनूपपुर पुलिस अधीक्षक श्री मोती उर रहमान के विश्वसनीय सूत्रों से मिले इनपुट पर जब कोतमा और कोयलांचल क्षेत्र की जांच शुरू हुई, तो पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम को एक चौंकाने वाला ऑनलाइन ठगी नेटवर्क मिला — जहां “गेमिंग एप” की आड़ में लोगों को दोगुना-तिगुना रकम कमाने का लालच देकर फर्जी खातों, सट्टेबाजी और धनशोधन का गोरखधंधा चल रहा था।
घटना का आरंभ – एक शिकायत, बड़ी साजिश
12 जुलाई 2025 को दीपक राठौर (निवासी अनूपपुर) ने शिकायत दर्ज कराई कि दो युवकों — संस्कार जायसवाल और घनश्याम बसोर (दोनों कोतमा निवासी) ने 11xPlay गेमिंग एप के ज़रिए ₹5000 की ठगी की।
शिकायत पर थाना कोतवाली अनूपपुर में FIR क्रमांक 350/25 दर्ज की गई, जिसमें बी.एन.एस. की धारा 318(4), 3(5), 112 और पब्लिक गैम्बलिंग एक्ट की धारा 4(क) लगाई गई।
जांच व गिरफ्तारी – इंदौर और भिलाई तक रेड
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर बनी टीम ने इंदौर के प्लेटिनम पैराडाइज कॉलोनी में छापा मारा, जहाँ से गिरोह के मास्टरमाइंड मोहम्मद कैफ और मोहम्मद रिज़वान की गतिविधियाँ सामने आईं।
7 मुख्य आरोपी गिरफ्तार किए गए
1. संस्कार जायसवाल (कोतमा)2. घनश्याम बसोर (कोतमा)3. प्रवीण पंडित (मधुबनी, बिहार)4. सानित मानिकपुरी (डिंडौरी)5. सारिक अली (भिलाई, छत्तीसगढ़)6. रोहित जोशी (भिलाई)7. आकाश कटारे (भिलाई)
जब्ती और बैंकिंग धोखाधड़ी का खुलासा
पुलिस ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण और बैंकिंग दस्तावेज ज़ब्त किए:
₹25,000 नकद40 बैंक पासबुक55 एटीएम कार्ड13 एंड्रॉइड मोबाइल03 टैबलेट20 सिम कार्ड
सभी संबंधित बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज किया गया है।
निजी बैंकों की भूमिका संदिग्ध!
सवाल यह उठता है — कोतमा और कोयलांचल क्षेत्र में इतनी संख्या में फर्जी बैंक खाते कैसे खुल गए? क्या स्थानीय प्राइवेट बैंकों की लापरवाही या मिलीभगत इस गिरोह के संचालन में भूमिका निभा रही थी?
पुलिस के अनुसार, “म्यूल बैंक अकाउंट” (पैसा ट्रांजिट कराने के लिए उपयोग किए गए खाते) कई बैंकों में बिना उचित KYC दस्तावेजों के खोले गए थे। यह मुद्दा अब आरबीआई और वित्तीय इंटेलिजेंस यूनिट की जांच की मांग कर सकता है।

पुलिस की चेतावनी – लालच में न आएं, सतर्क रहें
अनूपपुर पुलिस अधीक्षक श्री मोती उर रहमान ने जिलेवासियों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए कहा
“दोगुना-तिगुना पैसा कमाने का लालच देने वाले किसी भी एप या लिंक पर क्लिक न करें। ऑनलाइन संपर्क या फोन कॉल के माध्यम से अगर कोई इस तरह के प्रस्ताव दे, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को सूचित करें।”
अब आगे क्या? – जांच का विस्तार
आरोपियों से रिमांड में विस्तृत पूछताछ जारी है।
अन्य फर्जी खातों, स्थानीय दलालों, बैंक कर्मियों और डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म की भूमिका की जांच शुरू की गई है।
फर्जी बैंकिंग नेटवर्क पर एक समर्पित SIT गठन की संभावना।
कोतमा में डिजिटल अपराध की नई परतें
यह केस केवल एक ऑनलाइन ठगी नहीं, बल्कि डिजिटल अपराध और बैंकिंग तंत्र के संभावित दुरुपयोग की गंभीर चेतावनी है। सवाल अब सिर्फ सात गिरफ्तारियों का नहीं बल्कि उन सैकड़ों मासूमों का है, जो लालच के जाल में फंसकर सब कुछ गंवा चुके हैं। इनके तार अंतर्राष्ट्रीय जुड़े हुए होने की संभावना जताई जा रही है।



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