
मध्यप्रदेश का अनूपपुर जिला हाल के दिनों में राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव का केंद्र बनता जा रहा है। कभी कोयले की राजनीति तो कभी भूमाफिया तो कभी शराब माफिया की धमक के बीच अब जिले के यातायात विभाग पर ‘सड़क से सत्ता तक की वसूली’ का आरोप नेता जी लगा रहे है। विधायक और पूर्व मंत्री विसाहूलाल सिंह ने खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर यातायात प्रभारी श्रीमती ज्योति दुबे को तत्काल हटाने की मांग कर दी है। आरोप सिर्फ़ प्रशासनिक नहीं, राजनीतिक रूप से भी गरम हैं—क्योंकि भाजपा के अपने युवा मोर्चा नेता भी चिंगारी फूंक रहे हैं।
29 अप्रैल 2025 को अनूपपुर विधायक विसाहूलाल सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। पत्र की भाषा भले ही प्रशासनिक हो, पर भावनाएं तीखी है—जिले की जनता त्रस्त है, कार्यकर्ता असहाय हैं और अफसर मदमस्त।
मुख्य आरोप इस प्रकार हैं भारी वाहनों से महीना वसूली
यातायात प्रभारी के द्वारा ट्रकों और भारी वाहनों से मासिक राशि वसूली का आरोप। पैसा दो, तो वाहन चले; नहीं दो, तो कार्रवाई झेले।
विधायक जी ने मुख्यमंत्री को प्रेषित पत्र में लिखा है नियमों की आड़ में, चालकों को रोका जाता है, धमकाया जाता है, और अंततः ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ के नाम पर फर्जी केस बना दिए जाते हैं।
जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से दुर्व्यवहार
भाजपा के ज़िला युवा मोर्चा अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने आरोप लगाया कि निर्दोष कार्यकर्ताओं और आम जनता को भी ‘चालान वसूली रैकेट’ का हिस्सा बना लिया गया है।
जहां सीटी बजाने से पहले रेट लिस्ट देखी जाती है,
जहां हेलमेट की जगह हाथ में रसीद बुक होती है
“जो देगा, वो बचेगा – जो बोलेगा, वो फंसेगा”
यह नियम अब शायद ट्रैफिक नियमों से बड़ा हो चला है।
जनता की त्रासदी या सत्ता की असहायता?
जब भाजपा के अपने विधायक और संगठन पदाधिकारी अफसरशाही के खिलाफ मोर्चा खोलने पर मजबूर हो जाएं, तो मामले में दो ही बातें होती है—
अधीन प्रशासन बेलगाम है,
या फिर राजनीतिक पकड़ शिथिल हो चुकी है।
अब देखना है कि मुख्यमंत्री की “सुनवाई वाली गाड़ी” इस ‘लूट केंद्र यातायात विभाग’ पर कब ब्रेक लगाती है… या फिर इसकी रफ्तार और भी तेज़ होगी—VIP पास के साथ! विभाग का कहना है सड़क दुर्घनाओं में मृत्यु के आंकड़े कम तो हुए हैं।



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