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बिना परमिट, फिटनेस और बीमा के सड़कों पर मौत दौड़ रही है अनूपपुर बस दुर्घटना ने खोली पोल

बिना परमिट, फिटनेस और बीमा के सड़कों पर मौत दौड़ रही है अनूपपुर बस दुर्घटना ने खोली पोल



अनूपपुर।
आज सुबह अमरकंटक-अनूपपुर मार्ग पर हुई भीषण बस दुर्घटना न सिर्फ तीन निर्दोष ग्रामीणों की जान लेकर चली गई, बल्कि हमारे यात्री परिवहन तंत्र की जर्जर, गैर-जिम्मेदार और असंवेदनशील व्यवस्था को उजागर कर गई। बड़हर गांव की रहने वाली सुखिया बाई, मोहवती गोंड और राजकुमार गोंड मंडी में अनाज बेचने जा रहे थे, पर लौटे ही नहीं। एक झटके में परिवार बिखर गया, रोटियों के स्रोत खत्म हो गए, और जिम्मेदारी किसकी है — यह सवाल पूरे जिले में तैर रहा है।
दुर्घटना में शामिल बस की फिटनेस, परमिट और बीमा स्थिति संदिग्ध बताई जा रही है। कलेक्टर हर्षल पंचोली ने स्वयं जिला अस्पताल जाकर घायलों का हालचाल लिया और जांच के आदेश दिए।
कौन चला रहा है हमारी बसें?
जिले में बिना वैध परमिट, फिटनेस सर्टिफिकेट और यात्रियों के बिना बीमा कवर के बसों का संचालन कोई नई बात नहीं है।
कई निजी बस ऑपरेटर थर्ड पार्टी बीमा भी नवीनीकृत नहीं करवाते। यात्रियों को जो टिकट दिए जाते हैं, उनमें बीमा, परमिट संख्या, ड्राइवर की पहचान और वाहन पंजीकरण की जानकारी तक नहीं होती।
इन परिस्थितियों में यदि दुर्घटना होती है तो पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिलना टेढ़ी खीर बन जाता है।
भारत में बस सेवा संचालन के वैधानिक नियम – जिन्हें तोड़ा जा रहा है
परमिट अनिवार्य (Permit)
हर बस ऑपरेटर को राज्य या राष्ट्रीय स्तर का परमिट लेना होता है, जिसमें रूट, स्टॉपेज, बस प्रकार और अनुमत यात्रियों की संख्या का स्पष्ट उल्लेख होता है।
परमिट RTO या STA से जारी होता है।
फिटनेस सर्टिफिकेट (Fitness Certificate):
हर बस के लिए वार्षिक रूप से फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य है। यदि वाहन सड़क पर चलने योग्य नहीं है, तो उसके संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध है।
बीमा (Insurance)
हर यात्री वाहन के लिए न्यूनतम थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य है। Comprehensive बीमा यात्रियों की मृत्यु या चोट की दशा में कवरेज प्रदान करता है। यह न होने की स्थिति में बीमा कंपनी कोई दायित्व नहीं उठाती।

टिकट में कौन-कौन सी जानकारी होनी चाहिए – पर नहीं होती
यात्रा तिथि व समय
सीट संख्या
रूट/गंतव्य
बस का रजिस्ट्रेशन नंबर
ड्राइवर का नाम
परमिट संख्या
बीमा पॉलिसी का विवरण
ऑपरेटर एजेंसी का नाम व संपर्क
पर ज़मीनी सच्चाई ये है कि यात्रियों को कभी कभार केवल सीट नंबर और बस का नाम मिलता है — बाकी सब भगवान भरोसे।
बीमा और मुआवज़ा जब सिस्टम सोया रहे, तो जनता कैसे जागे?
Motor Vehicles Act 1988 की धारा 163-A के अनुसार यदि बस का बीमा वैध है तो मृतकों के परिजनों को 2 से 5 लाख रुपये तक का मुआवज़ा मिल सकता है।
यदि बीमा/परमिट/फिटनेस अवैध है, तो पूरा बोझ निजी ऑपरेटर या मालिक पर आ जाता है जो अपना पल्ला झाड़ लेता है— और फिर वर्षों तक मामला Motor Accident Claims Tribunal (MACT) में चलता है।
ऐसे में पीड़ित परिवार कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटते हैं, और कभी-कभी एक वक्त की रोटी तक के मोहताज हो जाते हैं।
कलेक्टर के सख्त निर्देश अब और नहीं चलेगी मनमानी
कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली ने जिले में यात्री बसों की गति और मानकों की अनदेखी पर कड़ा संज्ञान लेते हुए निम्न आदेश पारित किए  सभी बसों में स्पीड गवर्नर अनिवार्य, अधिकतम गति 60 किमी/घंटा।
ड्राइवर का मेडिकल व दृष्टिदोष प्रमाणपत्र अनिवार्य।
वर्दी, नेमप्लेट, फायर एग्जिंग्विशर, प्राथमिक उपचार किट, GPS व पैनिक बटन अनिवार्य।
बिना परमिट, फिटनेस व बीमा के बसों पर तत्काल प्रतिबंध।
रिफ्लेक्टर टेप और इमरजेंसी गेट हर बस में होना जरूरी।
ओवरलोडिंग पर तत्काल जुर्माना व वाहन जप्ती।

दर्दनाक हादसे का दृश्य – एक स्याह सुबह की चीख
सुबह की ताज़ी धूप थी। खोह गांव के लोग मंडी जा रहे थे  उम्मीदों से भरे, अनाज बेचने की आस में। तभी एक मोड़ पर, तेज गति से आती बस, जैसे मौत बनकर टूटी उस ऑटो पर।
धुएं और टूटे प्लास्टिक के बीच चिल्लाते लोग, बहता खून, और बिखरे अनाज के दाने — किसी की उम्मीदें, किसी की रोटियां और किसी का सुहाग बिखर गया।
एक बुजुर्ग गोंड महिला की टूटी चूड़ियां और पास में पड़ी मटमैली थैली, अब भी मिट्टी में लिपटी पड़ी हैं। उस थैली में आज उसके बेटे के लिए कुछ मिठाई थी। अब वही मिठाई मलबे में दब गई।
प्रशासन का आह्वान नियमों का पालन करें, जान बचाएं
कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली जी ने स्पष्ट कहा
“अब कोई भी बस बिना परमिट, फिटनेस, बीमा या GPS के नहीं चलेगी। जो भी नियम तोड़ेगा, उसके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत सख्त कार्यवाही होगी।”
अनूपपुर की यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, सिस्टम की नींद में डूबी संवेदनहीनता की सामूहिक विफलता है।
अब वक्त आ गया है कि हर विभाग — RTO, परिवहन, पुलिस,  — जिम्मेदारी उठाए।
नियमों को सिर्फ कागज़ पर नहीं, सड़क पर भी लागू करें। क्योंकि हर हादसे के पीछे एक परिवार होता है, और हर परिवार में सपने होते हैं। सपनों के साथ परिवार भी उजड़ जाता है।

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Admin

Kailash Pandey
Anuppur
(M.P.)

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