
ठेकेदारों की रॉयल्टी प्रमाण पत्र सत्यापन अनिवार्य: कलेक्टर हर्षल पंचोली
ठेकेदारों की रॉयल्टी चोरी रोकने कलेक्टर सख्त, बिना सत्यापन नहीं होगा भुगतान
ऑनलाइन रॉयल्टी सत्यापन अनिवार्य, अवैध खनन पर कड़ी निगरानी
निर्माण कार्यों में खनिज उपयोग का ऑनलाइन सत्यापन जरूरी, ठेकेदारों को निर्देश
खनिज विभाग से सत्यापन के बिना ठेकेदारों को भुगतान नहीं – कलेक्टर पंचोली
कलेक्ट्रेट में समीक्षा बैठक आयोजित, खनिज राजस्व हानि रोकने के लिए सख्त निर्देश
अनूपपुर, 26 मार्च 2025 कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय के नर्मदा सभागार में जिले के सभी निर्माण कार्यों से जुड़े अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की। इस बैठक में लोक निर्माण, जल संसाधन, ग्रामीण यांत्रिकी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, पंचायत एवं नगर पालिका विभागों के कार्यपालन यंत्री तथा खनिज विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में उपयोग किए गए खनिज की रॉयल्टी का भुगतान अनिवार्य रूप से ऑनलाइन सत्यापित कराया जाए। खनिज विभाग द्वारा सत्यापन के बिना किसी भी ठेकेदार का भुगतान नहीं किया जाएगा। यह कदम खनिज रॉयल्टी की चोरी और शासन के राजस्व को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए उठाया गया है।
रॉयल्टी चोरी के तरीके और उन्हें रोकने की पहल
खनिज संसाधनों के अवैध दोहन और रॉयल्टी चोरी के कई तरीके हैं, जिन पर प्रशासन को सख्त नजर रखनी होगी। कलेक्टर पंचोली ने अधिकारियों को इन अनियमितताओं को रोकने के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए।
कैसे होती है रॉयल्टी चोरी?
फर्जी रसीदें और फर्जी बिलिंग
कई ठेकेदार ई-खनिज पोर्टल पर गलत डेटा दर्ज कर कम खनिज उपयोग दिखाते हैं और रॉयल्टी का भुगतान कम करते हैं।
कुछ मामलों में, निर्माण सामग्री खरीदने के लिए फर्जी बिल बनाकर खनिज विभाग को गुमराह किया जाता है।
बिना रॉयल्टी भुगतान के अवैध खनिज उपयोग:
कुछ ठेकेदार अवैध खदानों से बिना रॉयल्टी चुकाए ही खनिजों का उपयोग कर लेते हैं।
रात में या पुलिस चेक पोस्ट से बचकर, बिना रॉयल्टी भुगतान किए ट्रकों से खनिज परिवहन किया जाता है।
रॉयल्टी भुगतान के नाम पर कम मात्रा दर्ज करना:
कई बार ठेकेदार 100 घन मीटर रेत का उपयोग करते हैं, लेकिन केवल 50 घन मीटर का ही भुगतान दिखाते हैं।
सरकारी अधिकारियों से मिलीभगत कर निर्माण में उपयोग किए गए खनिज की वास्तविक मात्रा को छिपाया जाता है।
एक ही रॉयल्टी रसीद का बार-बार उपयोग
एक बार खरीदी गई खनिज सामग्री की रसीद का बार-बार इस्तेमाल किया जाता है, जिससे शासन को वास्तविक राजस्व की प्राप्ति नहीं होती।अन्य जिलों से बिना अनुमति खनिज लाना
कुछ ठेकेदार एक जिले की खदान से खनिज निकालकर दूसरे जिले में उपयोग कर लेते हैं, जिससे राजस्व संग्रहण में गड़बड़ी होती है।
रॉयल्टी चोरी रोकने के लिए कलेक्टर ने उठाए ये कदम
ई-खनिज पोर्टल की अनिवार्यता: अब सभी ठेकेदारों को ई-खनिज पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होगा और निर्माण कार्य में उपयोग किए गए खनिज की पूरी जानकारी ऑनलाइन अपडेट करनी होगी।
ऑनलाइन सत्यापन प्रक्रिया खनिज विभाग से ऑनलाइन सत्यापन के बाद ही ठेकेदारों को भुगतान किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि खनिजों की खरीद-फरोख्त और उपयोग में किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो।
समन्वय और समीक्षा सभी निर्माण विभागों को खनिज अधिकारी के साथ समन्वय स्थापित कर हर परियोजना की ईटीपी (इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन प्रक्रिया) की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
सख्त निरीक्षण और कार्रवाई
अवैध खनन और बिना रॉयल्टी के खनिज उपयोग करने वाले ठेकेदारों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई होगी।
चेक पोस्ट पर खनिज परिवहन वाहनों की सख्त जांच होगी।
प्रत्येक निर्माण कार्य की ऑन-साइट जांच की जाएगी, जिससे यह पुष्टि हो सके कि रॉयल्टी भुगतान किया गया है या नहीं।
खनिज रॉयल्टी चोरी रोकने और शासन के राजस्व को बढ़ाने के लिए यह बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। कलेक्टर ने सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोई भी निर्माण कार्य बिना सत्यापन के आगे नहीं बढ़ेगा। अब हर ठेकेदार को ऑनलाइन रॉयल्टी भुगतान और सत्यापन कराना अनिवार्य होगा। इससे शासन को अधिक राजस्व प्राप्त होगा और खनिज संसाधनों के अवैध दोहन पर रोक लगेगी।



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