
जब रिश्ते कत्लगाह बन जाएं
शादी को प्यार, भरोसे और सुरक्षा का अटूट बंधन माना जाता है। लेकिन जब यह रिश्ता झूठ, धोखे और क्रूरता में बदल जाए, तो अंजाम भयानक हो सकता है। हाल ही में मेरठ और जोधपुर में सामने आए दो नृशंस हत्याकांडों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। एक मामले में पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या कर शव को ड्रम में सीमेंट से भरकर पैक कर दिया, तो दूसरे मामले में समलैंगिक संबंधों में बाधा बने पति के 12 टुकड़े कर सीवर में फेंक दिए गए।
ये दोनों घटनाएं सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि वैवाहिक संबंधों में बढ़ती दरारों, लालच, वासना और छल की भयानक तस्वीर पेश करती हैं।
पहला मामला मेरठ का ड्रम हत्याकांड
सौरभ राजपूत (30 वर्ष) – मर्चेंट नेवी अधिकारी, जिसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई।
मुस्कान रस्तोगी (29 वर्ष) – उसकी पत्नी, जिसने प्रेमी के साथ मिलकर यह साजिश रची।
साहिल शुक्ला (32 वर्ष) – मुस्कान का प्रेमी, जिसने हत्या में मुख्य भूमिका निभाई।
मेरठ में 4 मार्च 2025 की रात, जब सौरभ अपने घर में गहरी नींद में था, मुस्कान और साहिल ने मिलकर पहले उसे नशीली दवा देकर बेहोश किया। इसके बाद रस्सी से उसका गला घोंटकर मौत के घाट उतार दिया। लेकिन हत्या से भी बड़ा सवाल यह था कि शव को ठिकाने कैसे लगाया जाए?
दोनों ने शव को बड़े प्लास्टिक ड्रम में डालकर उस पर सीमेंट भर दिया।
मकसद था कि शव सड़कर दुर्गंध न फैलाए और पुलिस को शक न हो।
ड्रम को बेसमेंट में छिपा दिया गया, ताकि कोई उसे देख न सके।
पुलिस की होशियारी और राज़फाश
सौरभ की लापता रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने घर की तलाशी ली।
बेसमेंट में रखा सीमेंट से भरा भारी ड्रम संदेहास्पद लगा।
जब उसे तोड़ा गया, तो भीतर सौरभ का शव निकला, जो सीमेंट में पूरी तरह जकड़ा हुआ था।
मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया गया।
दूसरा मामला जोधपुर का 12 टुकड़ों वाला हत्याकांड
सुशील चौधरी (27 वर्ष) – कृषि विभाग में अधिकारी, जिसकी पत्नी ने हत्या कर दी।
सीमा (25 वर्ष) – उसकी पत्नी, जो समलैंगिक संबंधों में थी।
प्रियंका और बबीता – सीमा की बहनें, जिन्होंने हत्या की योजना में मदद की।
भीयाराम – सीमा का दोस्त, जिसने हत्या में सहयोग दिया।
अगस्त 2020 में जोधपुर में सुशील का शव 12 टुकड़ों में कटा हुआ मिला। हत्या की साजिश उसकी पत्नी सीमा ने अपनी समलैंगिक साथी और बहनों के साथ मिलकर रची थी।

हत्या की रोंगटे खड़े कर देने वाली योजना
सीमा ने सुशील को शराब में नशीला पदार्थ मिलाकर बेहोश किया।
जब वह बेसुध हो गया, तो चारों ने मिलकर गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी।
शव को ठिकाने लगाने के लिए इलेक्ट्रिक कटर से उसके 12 टुकड़े कर दिए गए।
टुकड़ों को काले प्लास्टिक बैग में भरकर अलग-अलग जगह फेंक दिया गया।कैसे खुला यह केस?
सीवर सफाई के दौरान एक स्वीपर को बैग में इंसानी खोपड़ी मिली।
दो दिन तक अलग-अलग इलाकों से शव के टुकड़े बरामद होते रहे।
एक बैग पर एक दुकान का नाम छपा मिला, जिससे जांच शुरू हुई।
पूछताछ में सीमा और उसकी बहनों ने हत्या की बात कबूल कर ली।
कौन सा अपराध ज्यादा भयावह?
अगर क्रूरता के स्तर पर देखें तो जोधपुर का हत्याकांड ज्यादा भयावह लगता है, क्योंकि वहां शरीर के 12 टुकड़े कर अलग-अलग जगह फेंके गए। लेकिन मेरठ का हत्याकांड भी कम डरावना नहीं था, क्योंकि वहां शव को हमेशा के लिए गायब करने की कोशिश की गई थी।
समाज के लिए चेतावनी क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे अपराध?
अवैध संबंधों की बढ़ती प्रवृत्ति
रिश्तों में ईमानदारी की कमी और वासना की बढ़ती लालसा के कारण हत्याएं हो रही हैं।साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर
अपराधी अब सिर्फ हत्या ही नहीं कर रहे, बल्कि लाशों को ठिकाने लगाने के लिए भयानक तरीके अपना रहे हैं।


पुलिस और कानून से बेखौफ होना
अपराधी अब इतने साहसी हो गए हैं कि वे हत्या के बाद सबूत मिटाने के नए तरीके खोज रहे हैं।
क्या प्यार इतना अंधा हो सकता है कि वह इंसान को दरिंदा बना दे? मेरठ और जोधपुर के ये दोनों हत्याकांड सिर्फ क्राइम स्टोरी नहीं, बल्कि रिश्तों में गहराती खाई, नैतिक पतन और इंसानियत की मौत को उजागर करते हैं।
मेरठ में सीमेंट से भरा ड्रम रिश्तों की कब्रगाह बन गया।
जोधपुर में 12 टुकड़ों में बंटा शव प्रेम और वासना की हद से गुजर चुकी दरिंदगी को दिखाता है।
यह समाज के लिए एक चेतावनी है कि वैवाहिक जीवन में ईमानदारी, संवाद और नैतिकता को प्राथमिकता दी जाए, वरना रिश्ते कब कत्लगाह में बदल जाएं, कहा नहीं जा सकता।
क्या इन घटनाओं से समाज कुछ सीखेगा, या अगली खबर और भी ज्यादा भयावह होगी?



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