
देवास जिले में ‘नकली अफसर, असली वसूली’ योजना के तहत एक अनोखी सेवा का भंडाफोड़ हुआ है। जनता की सेवा में जुटी भाजपा नेत्री सरिता मालवीय और उनके ‘सखा-सहयोगी’ धीरज राठौर ने खुद को एसडीएम घोषित कर दिया और धड़ल्ले से अवैध वसूली का महायज्ञ चला दिया।
सूत्रों के अनुसार, दोनों का ‘सरकारी सेवा’ का यह जुनून इस कदर हावी था कि चिकन विक्रेताओं को ‘गौ-मांस व्यापारी’ घोषित कर तुरंत रिश्वत लेने का उपक्रम प्रारंभ कर दिया गया। यह अलग बात है कि वसूली की रकम उनकी निजी अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए थी, ना कि सरकारी खजाने के लिए!

कांटाफोड़ पुलिस ने इस ‘सेवा भाव’ का संज्ञान लेते हुए दोनों को धर दबोचा। अब नेत्री जी और उनके ‘संघर्षशील’ पति जेल में आराम फरमा रहे हैं, जहां मुफ्त आवास और भोजन की उत्तम व्यवस्था है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस ‘अल्ट्रा स्पेशल’ फर्जीवाड़े के बीच नेताजी-नेत्री जी की कई नामचीन नेताओं के साथ फोटो भी वायरल हो रही हैं। वैसे, राजनीति में फोटो खिंचवाने की परंपरा इतनी पुरानी है कि नेतागण खुद सोच में पड़ गए हैं कि आखिर कितने ‘संभावित अभियुक्तों’ के साथ उनकी तस्वीरें होंगी!
फिलहाल, देवास की जनता को सावधान रहने की जरूरत है। कहीं अगला एसडीएम आपकी गली में ही तो नहीं घूम रहा?



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