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मां नर्मदा की उद्गमस्थली पर भव्य आयोजन, धर्म-अध्यात्म, योग, संस्कृति और रोमांच का संगम
अनूपपुर, 30 जनवरी 2025 – भारत की पुण्य सलिला, मोक्षदायिनी मां नर्मदा की उद्गमस्थली अमरकंटक इस वर्ष एक भव्य और ऐतिहासिक आयोजन का गवाह बनने जा रही है। 3, 4 एवं 5 फरवरी को आयोजित होने वाले “अमरकंटक नर्मदा महोत्सव 2025” में श्रद्धा, भक्ति, योग, ध्यान, सांस्कृतिक उत्सव, आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रकृति प्रेमियों के लिए अद्भुत सौंदर्य का समावेश होगा।
इस ऐतिहासिक महोत्सव को अनूपपुर जिले के कलेक्टर हर्षल पंचोली के कुशल नेतृत्व और दूरदर्शिता के साथ नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा रहा है। महोत्सव में पहली बार टेंट सिटी, लेजर लाइट शो, एडवेंचर स्पोर्ट्स, नर्मदा आरती, आध्यात्मिक संगोष्ठी, सांस्कृतिक संध्या और पारंपरिक लोक कलाओं का भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिससे नर्मदा भक्तों और पर्यटकों को अविस्मरणीय अनुभव मिलेगा।
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अमरकंटक की अलौकिक भोर प्रकृति, योग और ध्यान का दिव्य संगम
सूर्योदय के समय जब अमरकंटक की पर्वत श्रृंखलाओं से स्वर्णिम आभा निकलती है, ठंडी हवाएं श्वासों को निर्मल करती हैं और मां नर्मदा के जल की लहरें मंत्रोच्चार करती प्रतीत होती हैं, तब यह स्थान एक दिव्य ऊर्जा का केंद्र बन जाता है। महोत्सव का प्रत्येक दिन प्रकृति के इस अनुपम सौंदर्य के साथ सुबह 7:00 से 8:00 बजे तक योग, ध्यान और प्राणायाम से आरंभ होगा।
तीन दिवसीय भव्य आयोजन का संपूर्ण कार्यक्रम
3 फरवरी 2025: आस्था और भक्ति का आरंभ
सुबह 7:00 – 8:00: मैकल पार्क में योगाभ्यास एवं ध्यान सत्र
सुबह 10:00 – दोपहर 1:00: भव्य नर्मदा शोभा यात्रा (मां नर्मदा मंदिर प्रांगण से दीनदयाल चौक तक)
दोपहर 1:00 – 2:00: अखंड कीर्तन (मां नर्मदा मंदिर परिसर में)
दोपहर 2:00: महोत्सव का भव्य उद्घाटन (रामघाट)
शाम 6:30: महाआरती एवं लेजर लाइट शो (रामघाट)
रात्रि 8:00: सांस्कृतिक संध्या (रामघाट परिसर)
4 फरवरी 2025: नर्मदा जयंती – आध्यात्मिक ऊर्जा का उत्कर्ष
सुबह 7:00 – 8:00: मैकल पार्क में योग सत्र
सुबह 10:00: मां नर्मदा मंदिर प्रांगण में पूजन एवं हवन
दोपहर 12:00: कन्या भोज एवं महाप्रसाद (मां नर्मदा मंदिर प्रांगण में)
दोपहर 2:00 – शाम 6:00: सांस्कृतिक प्रस्तुतियां (रामघाट परिसर)
शाम 6:30: नर्मदा महाआरती एवं लेजर लाइट शो (रामघाट)
रात्रि 8:00: भक्ति संध्या – बाबा हंसराज रघुवंशी का विशेष कार्यक्रम (मेला ग्राउंड, सर्किट हाउस के पीछे)
5 फरवरी 2025: संस्कृति, सम्मान और समापन
सुबह 7:00 – 8:00: मैकल पार्क में योग एवं ध्यान
दोपहर 2:00 – शाम 6:00: सांस्कृतिक कार्यक्रम (रामघाट)
शाम 6:30: महाआरती एवं लेजर लाइट शो (रामघाट)
रात्रि 8:00: लोक कला मंच प्रस्तुति, सांस्कृतिक संध्या एवं सम्मान समारोह (रामघाट)
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प्राकृतिक सौंदर्य और श्रद्धा का अनुपम संगम
अमरकंटक, जहां मां नर्मदा का जन्म हुआ, अपनी मनोरम पर्वत श्रृंखलाओं, घने वनों, गहरी घाटियों और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। महोत्सव के दौरान जब रात में लेजर लाइट शो मां नर्मदा के जल पर बिखरेगा, तो ऐसा लगेगा जैसे देवताओं का स्वयं यहां आगमन हुआ हो।
रात के अंधकार में पर्वतों की चोटियों से दिखने वाली रोशनी, जल में पड़ने वाली चंद्रमा की छवि और दूर से गूंजती शंख और घड़ियाल की ध्वनि एक अलौकिक वातावरण रचेगी। यह महोत्सव प्रकृति प्रेमियों, ध्यान साधकों, पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए एक दिव्य अनुभव बनेगा।
कलेक्टर हर्षल पंचोली की दूरदर्शिता एक ऐतिहासिक पहल
इस महोत्सव को वैश्विक पहचान देने के लिए कलेक्टर हर्षल पंचोली के नेतृत्व में इसे और अधिक भव्य बनाया जा रहा है। इस बार पहली बार टेंट सिटी स्थापित की जा रही है, जहां श्रद्धालु और पर्यटक प्राकृतिक वातावरण में ठहर सकेंगे। साथ ही पुलिस अधीक्षक मोती ऊर्रहमान के मार्गदर्शन में सुरक्षा और यातायात प्रबंधन की सुदृढ़ व्यवस्था की गई है।
महोत्सव में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष बस सेवाएं, सूचना केंद्र, मेडिकल सुविधाएं, आपातकालीन सेवाएं और स्वच्छता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे किसी भी आगंतुक को कोई असुविधा न हो।
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धर्म, आस्था और रोमांच का समागम
इस वर्ष के महोत्सव में एडवेंचर स्पोर्ट्स का भी समावेश किया गया है। श्रद्धालु और पर्यटक अमरकंटक की पहाड़ियों में ट्रेकिंग, रोप क्लाइंबिंग, पैराग्लाइडिंग और साइकलिंग का आनंद ले सकते हैं। इससे अमरकंटक को एक धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थल के रूप में राष्ट्रीय पहचान मिलेगी।
नर्मदा महोत्सव 2025: एक नई परंपरा का शुभारंभ
इस ऐतिहासिक आयोजन से नर्मदा परिक्रमा वासियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक नया आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक द्वार मिलेगा। इस महोत्सव के माध्यम से अमरकंटक की दिव्यता, यहां की पारंपरिक लोक कला, योग, ध्यान और भक्ति संगीत को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।
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अमरकंटक बुला रहा है!
यदि आप प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक शांति, भक्ति संगीत, ध्यान, योग, संस्कृति और रोमांच का अद्भुत संगम अनुभव करना चाहते हैं, तो 3, 4 एवं 5 फरवरी 2025 को अमरकंटक नर्मदा महोत्सव में अवश्य पधारें!
यह महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि धर्म, प्रकृति और संस्कृति का एक अनुपम संगम है, जहां आप मां नर्मदा के दिव्य आंचल में अपने मन, शरीर और आत्मा को एक नई ऊर्जा से भर पाएंगे।
जय नर्मदा मईया जय अमरकंटक ।
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