
अनूपपुर रेलवे स्टेशन चौराहा, जहां यात्रियों और स्थानीय लोगों को सुरक्षा और सुविधा मिलनी चाहिए थी, आज अपराधियों और नशेड़ियों के लिए एक सुरक्षित अड्डा बन गया है। दिन में दिखने वाला यह व्यस्त चौराहा रात में एक अलग ही माहौल में तब्दील हो जाता है। चाय-पान के ठेले और सड़क पर फैला अतिक्रमण न केवल आवागमन में बाधा बनता है बल्कि चोरी और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए जमीन तैयार करता है।
रात का अंधेरा नशेड़ियों और अपराधियों का समय
रात के समय इस चौराहे पर ऐसे चेहरों का आना-जाना शुरू हो जाता है जो आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त होने के लिए बदनाम हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि शहर में चोरी की बढ़ती घटनाओं का मुख्य कारण यह चौराहा और यहां रातभर जमा रहने वाले नशेड़ी हैं। चोरी की वारदातें, झगड़े और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ जैसी घटनाएं इस क्षेत्र में आम हो गई हैं।
चाय और पान के ठेले, जो दिन में यात्रियों की सुविधा के लिए होते हैं, रात में नशे का कारोबार और अपराधियों के ठिकाने में बदल जाते हैं। यह स्थिति न केवल यात्रियों के लिए असुरक्षित है बल्कि पूरे स्टेशन क्षेत्र को खतरनाक बना देती है।
तीसरी आंख का अंधापन
रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिन्हें ‘तीसरी आंख’ के नाम से जाना जाता है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह तीसरी आंख सचमुच खुली है? चौराहे पर रातभर जो गतिविधियां होती हैं, क्या वे कैमरे में कैद नहीं होतीं? अगर होती हैं, तो फिर जिम्मेदार अधिकारी इन्हें नजरअंदाज क्यों कर रहे हैं?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी अगर चाहें तो अपने कार्यालय में बैठे-बैठे इस चौराहे की वास्तविक स्थिति देख सकते हैं। लेकिन उनकी चुप्पी और उदासीनता से ऐसा लगता है कि या तो कैमरे काम नहीं कर रहे, या फिर उन्हें चलाने जानबुझ कर अनजान बन जाते हैं।
नशेड़ियों का जमावड़ा और सुरक्षा का सवाल
इस चौराहे पर रातभर चलने वाली गतिविधियों में नशेड़ियों का जमावड़ा प्रमुख है। शराब, गांजा और अन्य नशीले पदार्थों का खुलेआम सेवन होता है। इसके कारण आम लोग, विशेष रूप से महिलाएं और बच्चे, इस क्षेत्र में असुरक्षित महसूस करते हैं। रात के अंधेरे में यहां आने-जाने वाले यात्रियों को डर के साए में सफर करना पड़ता है।
चोरी और आपराधिक घटनाओं का बढ़ता ग्राफ
स्थानीय निवासियों और यात्रियों का कहना है कि स्टेशन चौराहा रात में अपराधियों के लिए मुफ़ीद स्थान बन गया है। कई बार चोरी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और यात्रियों का सामान गायब होने की घटनाएं यहां आम हो गई हैं। लेकिन इन घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
पुलिस और प्रशासन की नाकामी
जीआरपी और आरपीएफ, जो रेलवे स्टेशन की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं, इस मामले में पूरी तरह विफल नजर आते हैं। चाय और पान ठेले वालों की मनमानी और नशेड़ियों के खुलेआम घूमने पर पुलिस की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन ठेले वालों और पुलिस के बीच साठगांठ है, जिसके कारण उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। इसके अलावा, पुलिस की गश्त न होने से नशेड़ियों और अपराधियों का मनोबल बढ़ गया है।
स्थानीय निवासियों और यात्रियों की मांग
स्थानीय लोग और यात्री चाहते हैं कि इस चौराहे की स्थिति पर तुरंत ध्यान दिया जाए। उनका सुझाव है चौराहे से अतिक्रमण हटाया जाए।रात में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए।
नशेड़ियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
सीसीटीवी कैमरों की नियमित निगरानी हो और उनकी रिकॉर्डिंग का उपयोग अपराध रोकने में किया जाए। सुरक्षा की सख्त जरूरत
रेलवे स्टेशन चौराहा अब केवल एक आवागमन का स्थान नहीं रहा, यह अब अराजकता और असुरक्षा का प्रतीक बन चुका है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि यात्रियों और आम लोगों को राहत मिल सके। यह समस्या केवल अतिक्रमण या नशेड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासन की निष्क्रियता और उदासीनता का भी परिणाम है।
यदि इस पर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह चौराहा एक बड़े अपराध केंद्र में बदल सकता है। स्थानीय लोगों और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना रेलवे प्रशासन और पुलिस की प्राथमिकता होनी चाहिए।



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