शहडोल में 16 जनवरी 2025 को रीजनल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव समिट कानून व्यवस्था का पुख्ता निरीक्षण

शहडोल, 7 जनवरी 2025
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में आगामी 16 जनवरी 2025 को शहडोल में आयोजित होने वाले रीजनल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव समिट की तैयारियां जोरों पर हैं। इस महत्वपूर्ण आयोजन का उद्देश्य क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति देना और निवेशकों को आकर्षित करना है। समिट में प्रतिष्ठित उद्योगपति और अन्य गणमान्य प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम स्थल यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, शहडोल का आज जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया गया।
प्रशासनिक तैयारी और निरीक्षण
निरीक्षण दल में शहडोल कमिश्नर सुरभि गुप्ता, पुलिस महानिरीक्षक अनुराग शर्मा, कलेक्टर केदार सिंह, और पुलिस अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव शामिल थे। उन्होंने कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा और कानून व्यवस्था का जायजा लिया। अधिकारियों ने समिट के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
क्षेत्रीय विकास पर उठे सवाल
शहडोल संभाग के अंतर्गत आने वाले अनूपपुर, शहडोल, और उमरिया जिलों में कई बड़े उद्योग और परियोजनाएं की जरूरत है ।इनमें कोयला, बॉक्साइट, ग्रेनाइट और अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित उद्योग शामिल हैं। हालाँकि, कई परियोजनाएं जैसे अमरकंटक थर्मल पॉवर प्लांट, मंगठार मोजरबियर जैतहरी प्लांट, तो है उनमें उनसे जुड़े उद्योग की जरूरत है ।बिजुरी बेलस्पन पॉवर प्लांट को मंजूरी तो मिली थी, लेकिन कोल ब्लॉक न मिलने के कारण ये परियोजनाएं अब तक शुरू नहीं हो पाई हैं।
इन परियोजनाओं के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी, लेकिन विकास कार्य न होने से जमीन बेकार पड़ी है। स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि जिला प्रशासन को इन मामलों को चिन्हित कर जमीन वापस लेनी चाहिए और वहां नए प्रोजेक्ट शुरू कराए जाने चाहिए, जिससे स्थानीय बेरोजगारी को कम किया जा सके।
अनूपपुर में अधूरी घोषणाएं और विकास कार्य
मुख्यमंत्री द्वारा अगस्त 2024 में अनूपपुर को कई सौगातें दी गई थीं, जिनमें प्रमुख हैं
गीता भवन निर्माण
अनूपपुर नगर पालिका क्षेत्र में बस स्टैंड और सब्जी मंडी का निर्माण
मेडिकल कॉलेज की स्थापना
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि इन परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाना चाहिए। यदि प्रशासन शीघ्र कदम उठाए, तो यह क्षेत्रीय विकास में मील का पत्थर साबित हो सकता है।



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