
अनूपपुर बीजेपी जिलाध्यक्ष पद का चुनाव इस बार त्रिकोणीय संघर्ष का अखाड़ा बन गया है। चचाई, अनूपपुर और राजनगर से दावेदार अपनी-अपनी दावेदारी के तीर चला रहे हैं। हर खेमा अपनी रणनीति और सियासी समीकरणों के साथ मैदान में उतरा है। राजनीति के इस प्रहसन में, आज शाम तक पर्दा गिरने की संभावना है।
त्रिकोणीय संघर्ष की तासीर अनूपपुर मुख्यालय की उपेक्षा
अनूपपुर नगर पालिका क्षेत्र से अभी तक कोई बीजेपी जिलाध्यक्ष नहीं बन पाया है। नगरवासियों का मानना है कि मुख्यालय को हमेशा अनदेखा किया गया है। यदि इस बार संगठन ने मुख्यालय की पुकार सुनी, तो जितेंद्र सोनी का नाम सामने आ सकता है।
चचाई महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष रश्मि खरे की उम्मीद
चचाई से महिला मोर्चा की वर्तमान जिलाध्यक्ष भी दौड़ में हैं। यदि पुरुष पैनल में सहमति नहीं बनती है, तो शीर्ष संगठन उन्हें मौका देकर नई दिशा का संकेत दे सकता है।
राजनगर प्रेमचंद गुड्डू की पकड़
राजनगर से प्रेमचंद गुड्डू अपनी स्थानीय पकड़ और प्रभावशाली जनसंपर्क के दम पर इस त्रिकोणीय लड़ाई को दिलचस्प बना रहे हैं। उनकी दावेदारी ने समीकरण को और जटिल कर दिया है।
संगठन की चुप्पी और कार्यकर्ताओं की बेचैनी
संगठन ने साफ कर दिया है कि जो पहले से अन्य पदों पर हैं, पहले उन्हें उन्हीं पदों का निर्वहन करना चाहिए जिस पद पर वे पदासीन हैं लेकिन राजनीति में कुछ भी तय नहीं होता। शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी ने कार्यकर्ताओं को बेचैन कर दिया है, और हर तरफ कयासों का बाजार गर्म है।
क्या रामदास पुरी को मिलेगा तीसरा कार्यकाल?
रामदास पुरी, जिनका नंगे पैर चलने का संकल्प और शिवराज सिंह चौहान द्वारा जूते भेंट करने की घटना अब भी चर्चाओं में है, तीसरे कार्यकाल के लिए सबसे मजबूत दावेदार हैं। उनका प्रशासनिक अमले में हस्तक्षेप न करना और संगठन के प्रति सादगीपूर्ण समर्पण उन्हें बाकी दावेदारों से अलग बनाता है।
त्रिकोणीय संघर्ष का अंतिम दिन
इस लड़ाई में तीन ध्रुव—अनूपपुर, चचाई, और राजनगर—अपनी-अपनी ताकत झोंक रहे हैं।
अनूपपुर नगरवासियों की यह मांग कि जिलाध्यक्ष मुख्यालय से हो, एक ऐतिहासिक बदलाव ला सकती है।
चचाई महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने का संगठनात्मक एजेंडा इस बार निर्णायक हो सकता है।
राजनगर प्रेमचंद गुड्डू जैसे जमीनी नेताओं का उभरना पुराने समीकरणों को तोड़ सकता है। राजनीति में पल में तोला, पल में मासा होता है।
बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व कब क्या निर्णय ले, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। “पल में तोला, पल में मासा” की कहावत अनूपपुर की राजनीति पर पूरी तरह सटीक बैठती है। एक पल में दावेदार शीर्ष पर, और अगले ही पल संगठन का निर्णय सारा खेल बदल देता है।
संभावित परिणाम क्या अब दिल्ली दूर नहीं?
आज शाम तक इस सियासी ड्रामे का अंत होने की पूरी संभावना है। त्रिकोणीय संघर्ष का फैसला न केवल जिलाध्यक्ष के चयन को प्रभावित करेगा, बल्कि भविष्य की स्थानीय राजनीति की दिशा भी तय करेगा।




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