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यूनियन कार्बाइड भोपाल गैस त्रासदी का जहरीला कचरा आखिरकार हटाया गया।

यूनियन कार्बाइड भोपाल गैस त्रासदी का जहरीला कचरा आखिरकार हटाया गया।


1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी ने न केवल भोपाल बल्कि पूरे देश को एक गहरे सदमे में डाल दिया था। इस घटना में 30,000 से अधिक लोग मारे गए थे और लाखों लोग प्रभावित हुए थे। यूनियन कार्बाइड के प्लांट से निकलने वाली जहरीली गैस ने पूरे शहर में तबाही मचाई। इसके बाद, इस त्रासदी से संबंधित कई रासायनिक तत्वों और कचरे को गोदामों में सुरक्षित रूप से रखा गया था। हालांकि इन खतरनाक तत्वों के निस्तारण में लंबे समय तक देरी हुई। अब, 40 साल बाद, इस कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और भोपाल को इस जहर से मुक्ति मिलने की उम्मीद है।
यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का असर
यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से निकलने वाला कचरा मुख्य रूप से रासायनिक तत्वों से बना हुआ था। इन तत्वों में एचसीएल (हाइड्रोक्लोरिक एसिड), हाइड्रोजन सायनाइड, कार्बन टेट्राक्लोराइड, और अन्य खतरनाक रासायनिक पदार्थ शामिल थे। ये सभी तत्व अत्यधिक जहरीले और पर्यावरण के लिए खतरनाक थे। इन रासायनिक पदार्थों के आसपास के क्षेत्र में न केवल मनुष्यों की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, बल्कि यह जल, हवा और मृदा प्रदूषण का कारण भी बने  ।यूनियन कार्बाइड के कचरे में कई रासायनिक तत्व ऐसे थे, जो सीधे तौर पर श्वसन तंत्र, त्वचा और आंतों को प्रभावित करते थे। इन रसायनों के संपर्क में आने से लोगों को त्वचा पर जलन, आंखों में जलन, सांस लेने में कठिनाई और उल्टी जैसी समस्याएं हुईं।
इन रासायनिक तत्वों का असर लंबी अवधि तक रहने वाला था। हजारों लोग कैंसर, अस्थि मज्जा (bone marrow) की समस्याओं, अंगों की कार्यक्षमता में गिरावट और न्यूरोलॉजिकल विकारों से पीड़ित हुए। कई लोगों को जीवन भर के लिए शारीरिक विकलांगता का सामना करना पड़ा।
प्रजनन स्वास्थ्य पर असर शोध से यह भी पता चला कि यूनियन कार्बाइड के कचरे के प्रभाव से प्रजनन स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ा था। कई महिलाएं गर्भपात की शिकार हुईं, और नवजात शिशुओं में जन्म दोषों की दर में वृद्धि हुई थी मानसिक और सामाजिक प्रभाव इस त्रासदी के मानसिक और सामाजिक प्रभाव भी काफी गहरे थे। प्रभावित परिवारों को न केवल शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ा, बल्कि मानसिक दबाव और आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ा।
कचरे का निस्तारण40 साल बाद उठाए गए कदम
चार दशकों से जहरीला कचरा भोपाल के गोदामों में पड़ा हुआ था, जिससे पर्यावरण और जन स्वास्थ्य पर लगातार खतरा मंडरा रहा था। अब, यह कचरा 12 कंटेनरों में लोड करके पीथमपुर स्थित विशेष निस्तारण केंद्र भेजा जा रहा है। इन कंटेनरों में प्रत्येक में औसतन 30 टन कचरा लोड किया गया है, जिससे कुल 337 मीट्रिक टन कचरा हटाया जाएगा। यह कचरा बेहद खतरनाक और विषैला है, और इसे नष्ट करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
निस्तारण की प्रक्रिया लागत और सुरक्षा उपाय
इस जहरीले कचरे के निस्तारण के लिए कई विशेष सुरक्षा उपाय किए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार का खतरा न हो। इसके लिए प्रशासन ने एक ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया है, जिसमें सामान्य ट्रैफिक को रोक दिया गया है। इस कचरे को ले जाने के लिए एम्बुलेंस, पुलिस बल और दमकल की गाड़ियां भी तैनात की गई हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता मिल सके। इसके अलावा, निस्तारण के दौरान सख्त निगरानी और सुरक्षा के लिए तकनीकी विशेषज्ञ भी मौजूद रहेंगे।
यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के निस्तारण में बहुत बड़ा आर्थिक खर्च आ रहा है। अनुमान के अनुसार, इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में संसाधन लगाए गए है , जिसमें विशेष सुरक्षा उपकरण, निस्तारण तकनीक और मानव संसाधन शामिल हैं। इस पूरी प्रक्रिया के लिए  करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है। यह खर्च न केवल कचरे को नष्ट करने के लिए आवश्यक उपकरणों और संसाधनों पर जाएगा, बल्कि सुरक्षा उपायों पर भी खर्च किया जाएगा।विशेष निस्तारण केंद्र में इस कचरे को नष्ट करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें उच्च तापमान पर रासायनिक पदार्थों को पूरी तरह से नष्ट किया जाएगा। यह तकनीक महंगी है और इसके लिए विशेष प्रकार के ट्रीटमेंट प्लांट और मशीनरी लगाई गई है
प्रक्रिया को लेकर पुलिस, एम्बुलेंस और दमकल जैसी आपातकालीन सेवाओं  के साथ एक महत्वपूर्ण खर्च है। इन सेवाओं के लिए वाहन, कर्मी, और उपकरणों का खर्च इस परियोजना का एक हिस्सा है इस कचरे के निस्तारण के लिए लगभग 200 से अधिक मजदूरों को काम पर लगाया गया है। इन मजदूरों को कड़ी सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करते हुए काम करना पड़ रहा है, और इसके लिए उन्हें विशेष प्रशिक्षण और सुरक्षा उपकरण प्रदान किए गए हैं।
यह सुनिश्चित करना कि निस्तारण की प्रक्रिया के दौरान पर्यावरण पर कोई नकरात्मक प्रभाव न पड़े, इसके लिए कड़ी निगरानी और परीक्षण की व्यवस्था की गई है। इसके तहत हवा, जल, और मृदा की गुणवत्ता की निरंतर जांच की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कचरा नष्ट करते समय कोई प्रदूषण न हो।
निस्तारण प्रक्रिया एक बड़ी राहत लेकर आई है, लेकिन इसके बाद भी कई समस्याएं सामने हैं। पहला, यह प्रक्रिया इतनी देर से शुरू हुई कि इसका प्रभाव पहले से ही समाज और पर्यावरण पर बहुत गहरा पड़ चुका था। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करने वाले लोग अब भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसके अलावा, इस कचरे का निस्तारण केवल एक छोटे हिस्से का समाधान है। भविष्य में भी अन्य रासायनिक कचरों और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए और कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है
भोपाल के इस जहरीले कचरे का निस्तारण एक बड़ा कदम है, समय पर कदम उठाए जाएं तो हम बड़ी पर्यावरणीय और स्वास्थ्य समस्याओं से निपट सकते हैं।

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