
मध्य प्रदेश की राजनीति में भूचाल भाजपा नेता बहादुर सिंह चौहान का ऑडियो चर्चा में
महिदपुर के पूर्व विधायक और भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष बहादुर सिंह चौहान का एक ऑडियो वायरल हुआ है, जिसने राजनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस पार्षदों से बातचीत में चौहान ने कहा, “अगर कांग्रेस की सरकार होती तो मैं मंत्री होता।” यह बयान राजनीति की उस असलियत को उजागर करता है जहां ‘खाते भाजपा का हैं, बजाते कांग्रेस का।
कुर्सी के दो रंग
भाजपा की कुर्सी पर बैठे नेता कांग्रेस की सत्ता का ख्वाब देखते हुए पकड़े गए। शायद ‘आत्मनिर्भर’ बनने की राह में, विचारधारा को झूले की तरह लटकाना जरूरी हो गया है।
राजनीति का नया मंत्र अब नेताओं का मंत्र स्पष्ट है
सत्ता मिले तो मंत्री, विचारधारा मिले तो संतरी।
बहादुर सिंह चौहान का यह बयान इस मंत्र की पराकाष्ठा का उदाहरण बन गया। रुपयों की खनक
ऑडियो में रुपयों के लेनदेन की चर्चा राजनीति की नई परिभाषा गढ़ती है। आजकल ‘सेवा’ और ‘सत्ता’ का मोल शायद बाजार के हिसाब से तय हो रहा है।
भाजपा के लिए यह घटना किसी ‘घर का भेदी लंका ढाए’ से कम नहीं है। पार्टी को समझना होगा कि जब नेता अपनी विचारधारा को गिरवी रखकर बयान दें, तो संगठन के सिद्धांत हवा में उड़ जाते हैं।
कांग्रेस नेताओं ने इस ऑडियो को हाथों-हाथ लेते हुए कहा, भाजपा के कई नेता कांग्रेस में मंत्री बनने का सपना देख रहे हैं।
आखिर कांग्रेस के विचारों का असर इतना गहरा है कि भाजपा में बैठे नेता भी इससे अछूते नहीं रह सके। नेताओं की राजनीति का नया स्वरूप
आज के नेता दो नावों पर सवारी करने में इतने कुशल हो गए हैं कि न तो उन्हें नैतिकता का भय है और न ही संगठन की साख की परवाह।
सत्ता की कुर्सी हो, तो भाजपा। पद की ख्वाहिश हो, तो कांग्रेस।
भाजपा को इस घटना से सीख लेनी होगी कि पार्टी के भीतर आत्ममंथन की जरूरत है। वरना, राजनीति की इस ‘कुर्सी यात्रा’ में संगठन का अस्तित्व कहीं खो न जाए।
यह घटना केवल बहादुर सिंह चौहान तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीति के बदलते समीकरणों और नेताओं की सत्ता-लालसा का सटीक उदाहरण है
इस ऑडियो के सत्यता की पुष्टि हम नहीं करते ।



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