

भोपाल, मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में दिवंगत भूतपूर्व सदस्यों और प्रसिद्ध जनजातीय कलाकार श्रीमती जोधइया बाई के योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने भाजपा नेता श्री प्रभात झा, पूर्व मंत्री श्री नटवर सिंह, एस. एम. कृष्णा, और भूतपूर्व सदस्य श्री आरिफ अकील के राजनीतिक योगदान को याद किया और कहा कि इन नेताओं ने अपने कार्यकाल में समाज और प्रदेश के विकास में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।
जोधइया बाई जनजातीय कला का गौरव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय कलाकार श्रीमती जोधइया बाई के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह मध्य प्रदेश की लोक संस्कृति और जनजातीय कला की धरोहर थीं। उन्होंने जोधइया बाई को “विशिष्ट जनजातीय कलाकार” कहते हुए बताया कि उनकी कला ने न केवल देश में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हासिल की।
जोधइया बाई का परिचय
जन्म और प्रारंभिक जीवन श्रीमती जोधइया बाई मध्य प्रदेश के मंडला जिले की गोंड जनजाति से थीं।
कलात्मक उपलब्धियां उनकी चित्रकला में जनजातीय परंपराओं और प्रकृति का अनूठा समावेश देखने को मिलता था। उनके चित्र पेरिस, लंदन और अन्य विश्वस्तरीय कला प्रदर्शनियों में प्रदर्शित किए गए थे।
सम्मान उन्हें भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा कई पुरस्कारों से नवाजा गया। उनकी कला ने गोंड जनजाति के जीवन और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई।
विशेष योगदान: उन्होंने जनजातीय कला को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित किया और उनके प्रशिक्षण के लिए कार्यशालाएं आयोजित कीं।
मुख्यमंत्री का वक्तव्य
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, “जोधइया बाई का योगदान कला और संस्कृति के क्षेत्र में अमूल्य है। उनका जीवन जनजातीय परंपराओं और सादगी का प्रतीक था। उनकी कला ने मध्य प्रदेश को विश्वस्तर पर पहचान दिलाई।”
श्रद्धांजलि अर्पित
सदन में मुख्यमंत्री के इस वक्तव्य के बाद सभी सदस्यों ने दिवंगत नेताओं और श्रीमती जोधइया बाई को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। विधानसभा अध्यक्ष ने भी इस अवसर पर उनके योगदान का स्मरण किया।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार जोधइया बाई की स्मृति में उनकी कलाओं को संरक्षित करने और प्रोत्साहित करने के लिए विशेष योजना बनाएगी, ताकि उनकी विरासत को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके।



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