चेक पोस्ट चौकियों का वसूली चक्रभूपेंद्र सिंह के प्रश्न से उजागर हुआ परिवहन विभाग का सच
भोपाल

मध्य प्रदेश विधानसभा का सत्र हमेशा से बहस और राजनीति का अखाड़ा रहा है, लेकिन इस बार बहस ने खुद सत्ता पक्ष के गलियारों में हलचल मचा दी। पूर्व परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने एक ऐसा प्रश्न लगा दिया, जिसने सत्ता पक्ष के “परिवहन विभाग के स्वच्छता अभियान” की पोल खोलकर रख दी। सवाल था तो सीधे-सीधे चेक पोस्ट चौकियों की वैधता पर, पर इसकी गूंज उस वसूली तक जा पहुंची, जो हर ट्रक ड्राइवर के दिल में एक स्थायी डर बन चुकी है
भूपेंद्र सिंह का ‘ध्यानाकर्षण’ या ‘ध्यान भटकाने का प्रयास’?
पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह, जो कभी खुद इस विभाग की कमान संभाल चुके हैं, ने चेक पोस्टों को लेकर सवाल उठाया। उनका प्रश्न न केवल वर्तमान परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप को कठघरे में खड़ा करता है, बल्कि बीजेपी की नीतियों और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है।
दरअसल, यह वही विभाग है, जहां चेक पोस्टों पर वसूली की चर्चा आम है। सड़क पर खड़े ट्रकों से ‘पर्ची’ और ‘प्रणाम राशि’ लेने का यह खेल किसी गुप्त परंपरा जैसा है, जो सालों से जारी है। अगर कोई ट्रक मालिक या ड्राइवर नियमों से चलना भी चाहे, तो उसे इस ‘चेक पोस्ट चक्रव्यूह’ में फंसना ही पड़ता है।
जब गडकरी भी हो गए ‘गुजरात मॉडल’ के हिमायती
मध्य प्रदेश का परिवहन विभाग इतना चर्चित है कि केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी इसकी वसूली व्यवस्था से परेशान हो गए। गडकरी जी ने तो यहां तक कह दिया कि ‘गुजरात मॉडल’ अपनाओ और इस वसूली की समस्या से छुटकारा पाओ।
लेकिन सवाल यह उठता है कि गुजरात मॉडल को अपनाने के बाद भी, क्या यह वसूली खत्म हो पाएगी? या यह केवल एक राजनीतिक नारा बनकर रह जाएगा? क्योंकि वसूली का यह जाल सिर्फ मध्य प्रदेश में ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी फैला है।
कांग्रेस के लिए यह सवाल किसी बोनस से कम नहीं था। वर्षों से बीजेपी पर वसूली के आरोप लगाने वाली कांग्रेस, भूपेंद्र सिंह के सवाल को ‘स्वर्णिम अवसर’ मान बैठी है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि “हमारे आरोपों को अब खुद बीजेपी के नेता ही साबित कर रहे हैं।”
विपक्ष ने इस मुद्दे पर तीखे बयान दिए। “हम कहते थे कि परिवहन विभाग वसूली का अड्डा है, और अब तो उनके अपने ही मंत्री इसे मान रहे है
राव उदय प्रताप का जवाब ‘चेक पोस्ट वसूली बंद है!’
वर्तमान परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप ने इस मुद्दे पर सरकार की तरफ से सफाई दी कि “चेक पोस्टों पर वसूली पूरी तरह बंद है।” लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही बयां करती है।
ट्रक मालिक और ड्राइवरों का कहना है कि ‘वसूली बंद’ का ऐलान केवल कागजों में हुआ है। हकीकत में, हर चेक पोस्ट पर अभी भी ‘कलेक्शन’ चल रहा है।
सिस्टम का ‘परिवहन धर्म’ चुप रहो और भुगतान करो
मध्य प्रदेश के ट्रक चालकों के लिए यह कोई नई बात नहीं है
चेक पोस्टों की हालत ऐसी है कि वहां पर ‘चाय-पानी’ का खर्चा देना अनिवार्य है। अगर किसी ने विरोध किया, तो उसे घंटों रोका जाता है परिवहन विभाग का अंतहीन चक्रव्यूह
भूपेंद्र सिंह के इस प्रश्न ने न केवल चेक पोस्ट वसूली का पर्दाफाश किया, बल्कि यह भी दिखा दिया कि सिस्टम में पारदर्शिता और सुधार की कितनी जरूरत है।
वर्तमान सरकार को इस पर गंभीरता से कदम उठाना होगा, वरना यह मुद्दा विपक्ष के लिए बड़ा सवाल बन सकता है।




Leave a Reply