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सतना अस्पताल में इलाज नहीं, केवल डिस्चार्ज और दवाई के नाम पर ‘कलेक्शन’ जारी, सरकारी अस्पताल का नया व्यापार मॉडल!

सतना अस्पताल में इलाज नहीं, केवल डिस्चार्ज और दवाई के नाम पर ‘कलेक्शन’ जारी, सरकारी अस्पताल का नया व्यापार मॉडल!



सतना जिला अस्पताल में मरीजों से डिस्चार्ज और दवाई के नाम पर पैसे लेने का वीडियो आया सामने, सरकारी अस्पतालों में लूट का सिलसिला जारी

सतना मध्य प्रदेश के सतना जिला अस्पताल में एक बार फिर मरीजों से अवैध तरीके से पैसे लेने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा मरीजों से डिस्चार्ज करने और दवाइयों के नाम पर पैसे वसूले जा रहे हैं। यह मामला सरकारी अस्पतालों में चल रही अवैध वसूली को लेकर एक और शर्मनाक उदाहरण पेश करता है।
इस वीडियो में मरीजों से इलाज के दौरान और डिस्चार्ज के समय पैसे लिए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने मरीजों के परिजनों से बिना किसी कारण के अतिरिक्त शुल्क लिया और यह सारा वाकया कैमरे में कैद हो गया।
सरकारी अस्पतालों में बढ़ती लूट की प्रवृत्ति
सतना जिला अस्पताल में यह घटना कोई पहली बार नहीं हुई है। इससे पहले भी अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों से दवाई, उपचार और भर्ती के नाम पर पैसे लेने के कई मामले सामने आ चुके हैं। सरकारी अस्पतालों में यह अवैध वसूली का सिलसिला आम हो चुका है, जिससे न सिर्फ मरीजों को परेशानी होती है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अस्पतालों में यह प्रवृत्ति सरकारी अधिकारियों और प्रशासन की मिलीभगत के कारण बढ़ रही है। मरीजों की स्थिति की नजदीकी जांच और प्रशासन की सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि अस्पतालों में ऐसे मामलों पर रोक लगाई जा सके।
प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल
सतना जिला अस्पताल में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति से सवाल उठते हैं कि क्या प्रशासन वास्तव में इन अस्पतालों में हो रही अवैध वसूली को रोकने के लिए गंभीर है। अस्पतालों में इस तरह की घटनाएं न केवल मरीजों की जान को खतरे में डालती हैं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की छवि को भी नुकसान पहुंचाती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज के बदले भी पैसे लिए जाते हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए, और जिम्मेदार कर्मचारियों पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
क्या कहता है प्रशासन?
इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच का आश्वासन दिया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह जांच केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाएगी या प्रशासन इस गंभीर समस्या पर ठोस कदम उठाएगा? लोगों की उम्मीद अब प्रशासन पर टिकी हुई है, ताकि उनके बच्चों, माता-पिता और प्रियजनों को सरकारी अस्पतालों में उचित और निष्पक्ष इलाज मिल सके।
यह घटना सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर स्थिति और मरीजों के प्रति प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कौन सी कार्रवाई करता है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।

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