
अनूपपुर भाजपा संगठन में मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति, तीन मंडलों पर होल्ड से उभरे राजनीतिक सवाल
भाजपा अनूपपुर संगठन चुनाव और आपसी सहमति का संकट
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अनूपपुर जिले में मंडल अध्यक्षों की नई सूची जारी होने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। जहां जिले के अधिकांश मंडलों में अध्यक्ष घोषित कर दिए गए हैं, वहीं अनूपपुर नगर, अमरकंटक, और पसान मंडल पर नियुक्ति को लेकर अभी होल्ड जारी है। यह स्थिति भाजपा के आंतरिक संतुलन, गुटीय राजनीति और स्थानीय समीकरणों को लेकर सवाल खड़े कर रही है
मंडल अध्यक्षों की घोषणा और उनके राजनीतिक संदेश
घोषित मंडल अध्यक्षों की सूची में प्रमुख नाम शामिल हैं, जिनमें कोतमा नगर से पुष्पेन्द्र जैन, बिजुरी से रविन्द्र शर्मा, और जैतहरी से दिनेश राठौर शामिल हैं। इन नियुक्तियों में पुराने और नए चेहरों का मिश्रण देखा गया, जिससे भाजपा ने स्थानीय नेतृत्व को मजबूती देने की कोशिश की है।
हालांकि, अनूपपुर नगर, अमरकंटक, और पसान जैसे महत्वपूर्ण मंडलों पर सहमति न बन पाना यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर आपसी तालमेल में दिक्कतें हैं। ये मंडल न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि स्थानीय संगठनों में गहरी पकड़ वाले नेताओं का भी गढ़ माने जाते हैं।
क्यों है होल्ड?गुटीय राजनीति का प्रभाव
भाजपा अनूपपुर में दो प्रमुख गुटों के बीच रस्साकशी का प्रभाव स्पष्ट है। संगठन के कई नेता अपने करीबी उम्मीदवारों को मंडल अध्यक्ष बनाने के लिए सक्रिय हैं। अनूपपुर नगर और अमरकंटक जैसे क्षेत्रों में वरिष्ठ नेताओं का प्रभाव ज्यादा है, जिससे आम सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
क्षेत्रीय समीकरण और जातीय गणित
मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति में सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की जाती है। इन तीन मंडलों में जातीय विविधता अधिक होने के कारण, भाजपा को ऐसे नेता की तलाश है जो सभी वर्गों को संतुष्ट कर सके।
संगठनात्मक अनुशासन और पर्यवेक्षक की भूमिका
अनूपपुर में भाजपा संगठन ने अपने पर्यवेक्षक भगत नेताम और निर्वाचन अधिकारी विवेक शेजवलकर की सहमति से सूची जारी की है। लेकिन इन मंडलों पर सहमति न बन पाना पर्यवेक्षकों की भूमिका और पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े करता है।
घोषित मंडल अध्यक्षशक्ति संतुलन का संकेत
घोषित नामों में स्थानीय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी गई है, जिससे भाजपा ने जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है।
कोतमा ग्रामीण से राजेश वर्मा एक वरिष्ठ कार्यकर्ता, जिनकी छवि संगठन के प्रति वफादार नेता की है।
राजनगर नगर से कमलेश चतुर्वेदी युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने का संकेत।
जैतहरी से दिनेश राठौरअनुभव और संगठनात्मक क्षमता के लिए चुने गए।
हालांकि, इन नियुक्तियों से यह भी स्पष्ट है कि भाजपा ने जिला स्तर पर संतुलन बनाए रखने की रणनीति अपनाई है
तीन मंडलों पर होल्ड संभावित प्रभाव
अनूपपुर नगर, अमरकंटक, और पसान में मंडल अध्यक्ष की अनुपस्थिति से स्थानीय संगठन कमजोर हो सकता है। यह स्थिति विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, को राजनीतिक मुद्दा बनाने का मौका दे सकती है।
इन मंडलों में आपसी सहमति न बनने से भाजपा के स्थानीय नेतृत्व की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। इससे पार्टी के कार्यकर्ताओं में असंतोष फैल सकता है।
भाजपा को इन तीन मंडलों में नेताओं के चयन के लिए स्थानीय और जिला स्तर पर समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता है। पार्टी को यह सुनिश्चित करना होगा कि नियुक्तियां गुटीय राजनीति से ऊपर उठकर हों और संगठनात्मक मजबूती पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
भाजपा अनूपपुर में मंडल अध्यक्षों की सूची एक ओर जहां संगठन को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है, वहीं तीन महत्वपूर्ण मंडलों पर होल्ड पार्टी के सामने चुनौती पेश कर रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा इन असहमतियों को किस तरह हल करती है और अपनी राजनीतिक स्थिति को आगामी चुनावों के लिए कैसे मजबूत बनाती है।




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