मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से वित्तीय धोखाधड़ी की एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ आम लोगों और सेवानिवृत्त (Retired) कर्मचारियों को कम समय में करोड़पति बनने और भारी मुनाफा कमाने का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया है। यह पूरा खेल बुढ़ार थाना क्षेत्र के धनपुरी रोड स्थित खंडेलवाल कॉम्प्लेक्स में संचालित ‘जीएनएस फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ (GNS Financial Services Pvt Ltd) नामक कंपनी द्वारा खेला जा रहा था।
📍 इन इलाकों के लोग हुए सबसे ज्यादा प्रभावित
ठगी का यह जाल केवल एक शहर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसने पूरे कोयला बेल्ट (कोयलांचल क्षेत्र) को अपनी चपेट में ले लिया। सबसे ज्यादा प्रभावित लोग इन जगहों से हैं:
- अनूपपुर जिला: अनूपपुर मुख्य शहर, कोटमा (Kotma), जैतहरी (Jaithari), भालूमाड़ा (Bhalumada), जमुना (Jamuna) और फूंगा (Funga)।
- शहडोल जिला: बुढ़ार, धनपुरी, अमलाई और शहडोल मुख्यालय।
इन इलाकों में रहने वाले SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) के रिटायर्ड कर्मचारियों को निशाना बनाया गया, जिन्होंने अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई (PF और ग्रेच्युटी का पैसा) इस उम्मीद में कंपनी को सौंप दी कि उन्हें बुढ़ापे में अच्छा रिटर्न मिलेगा।
पीड़ितों की लगातार शिकायतों और बढ़ते दबाव के बाद शहडोल पुलिस ने इस फर्जी फाइनेंस कंपनी के डायरेक्टर सहित 5 मुख्य पदाधिकारियों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज की है और मामले की गहराई से जांच के लिए एक एसआईटी (SIT) का गठन भी किया है।
📄 समाचार रिपोर्ट: शहडोल में निवेश के नाम पर महाघोटाला
कैसे जाल में फंसाते थे आरोपी? (मोडस ऑपेरेंडी)
कंपनी के संचालकों और एजेंटों ने ग्रामीण व शहरी इलाकों के भोले-भाले लोगों, विशेषकर SECL के रिटायर्ड कर्मचारियों को अपना निशाना बनाया। ठगी के लिए निम्नलिखित हथकंडे अपनाए गए:
- पैसा दोगुना करने का झांसा: निवेशकों को दावा किया गया कि उनका पैसा मुंबई की जानी-मानी संस्था ‘मोतीलाल ओसवाल’ में इन्वेस्ट किया जा रहा है।
- अवास्तविक गारंटेड रिटर्न: जमा राशि पर हर महीने 1% ब्याज और 5 साल में मूलधन दोगुना करने का आकर्षक वादा किया गया।
- नौकरी का लालच: गोपालपुर निवासी पीड़ित मृगनयन सिंह की शिकायत के अनुसार, एजेंटों ने उनके परिवार से ₹30 लाख का निवेश कराया और झांसा दिया कि प्रति माह ₹30,000 ब्याज के साथ परिवार के एक सदस्य को ₹15,000 मासिक वेतन पर 65 वर्ष की उम्र तक नौकरी दी जाएगी।
- शुरुआती भरोसा और फिर धोखा: विश्वसनीयता जीतने के लिए शुरुआती कुछ महीनों में निवेशकों को ब्याज का भुगतान किया गया, लेकिन जैसे ही बड़ी रकम जमा हो गई, कंपनी ने भुगतान बंद कर दिया।
बिना अनुमति के डीमैट खातों में ट्रेडिंग का खेल
पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कंपनी विभिन्न लोगों से पैसे एकत्र कर उनके नाम पर अलग-अलग खाते (Demat Accounts) खोलती थी। निवेशकों को इसकी भनक भी नहीं होती थी और आरोपी उनकी बिना अनुमति के इन खातों से खुद शेयर ट्रेडिंग करते थे, जिससे निवेशकों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
इन 5 रसूखदार आरोपियों पर दर्ज हुई FIR
जब पीड़ितों ने अपनी मैच्योरिटी अवधि पूरी होने या आपात स्थिति (जैसे बीमारी) में अपना पैसा वापस मांगा, तो कंपनी के संचालकों ने साफ मना कर दिया और उन्हें जान से मारने की धमकियां तक दीं। इसके बाद आरोपी दफ्तर में ताला लगाकर फरार हो गए।
बुढ़ार पुलिस ने जांच के बाद कंपनी के मुख्य कर्ताधर्ताओं सहित 5 लोगों पर आपराधिक मामला दर्ज किया है:
- सुखनंदन यादव (कंपनी संचालक)
- मुकेश यादव
- सरोज यादव (संचालक की पत्नी)
- विजय पाल
- मोहम्मद अनीम
800 से ज्यादा शिकार, अन्य थानों तक पहुंचा मामला
प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक, इस जालसाजी में 800 से अधिक निवेशक प्रभावित हुए हैं और ठगी का आंकड़ा कई करोड़ रुपये का हो सकता है। इस घोटाले की गूंज अब अन्य क्षेत्रों में भी सुनाई दे रही है। बुढ़ार के बाद, शहडोल के ही अमलाई थाने में भी जीएनएस कंपनी के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई है, जहाँ एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से लाखों रुपये की ठगी की बात सामने आई है।
लिस और प्रशासन की कार्रवाई
लगातार शिकायतों के बाद पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपियों के वित्तीय रिकॉर्ड्स, बैंक खातों के लेन-देन और तकनीकी साक्ष्यों को खंगालना शुरू कर दिया है। बुढ़ार पुलिस द्वारा गठित एसआईटी (SIT) इस पूरे सिंडिकेट के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।