
कलेक्टर हर्षल पंचोली ने दिखाया संवेदनशील प्रशासन का उदाहरण, 66 आवेदकों की समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश
मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में आयोजित जनसुनवाई एक बार फिर प्रशासनिक संवेदनशीलता का उदाहरण बनी। कलेक्ट्रेट स्थित नर्मदा सभागार में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में 66 आवेदकों ने अपनी समस्याएं कलेक्टर हर्षल पंचोली के समक्ष प्रस्तुत कीं। कलेक्टर ने न केवल प्रत्येक आवेदन को गंभीरता से सुना, बल्कि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को त्वरित निर्देश दिए।
इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तन्मय वशिष्ठ शर्मा, सहायक कलेक्टर एवं एसडीएम अनूपपुर महिपाल सिंह गुर्जर, संयुक्त कलेक्टर दिलीप कुमार पाण्डेय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर ने इस जनसुनवाई में दिखाया कि प्रशासनिक जिम्मेदारी केवल कार्यवाही तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसमें मानवीय संवेदनाओं का समावेश भी आवश्यक है।
संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई का प्रमाण
कलेक्टर हर्षल पंचोली ने हर आवेदक की समस्या को न केवल ध्यानपूर्वक सुना, बल्कि उनके समाधान के लिए स्पष्ट और प्रभावी दिशा-निर्देश जारी किए। उनका दृष्टिकोण प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ मानवीयता का था, जिसने कई आवेदकों को तुरंत राहत का भरोसा दिलाया।
प्रमुख आवेदक और उनकी समस्याएं
1. ग्राम चुकान के अरुण कुमार पनिका ने भूमि के फौती नामांतरण का मुद्दा उठाया, जिस पर कलेक्टर ने राजस्व विभाग को शीघ्र कार्यवाही के आदेश दिए।
2. ग्राम लतार के उदय कुमार अहिरवार ने पंचायत सचिव की अनुपस्थिति की शिकायत दर्ज कराई।
3. ग्राम अगरियानार के द्वारिका यादव ने मेकल क्लब में मजदूरी के भुगतान में देरी की समस्या बताई।
4. ग्राम डोंगराटोला की शोभनी बैगा, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आती हैं, ने अपने इलाज के लिए सहायता राशि का अनुरोध किया।
5. ग्राम सिवनी के लक्ष्मी प्रसाद सोनी ने नक्शा तरमीम की नकल प्राप्त करने की मांग की।
6. ग्राम बम्हनी के वेद प्रकाश शुक्ला ने फॉर्मर आईडी बनवाने की आवश्यकता जताई।
7. ग्राम अमदरी के आनंद कुमार चंद्रवंशी ने अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों का समाधान मांगा।
कलेक्टर की संवेदनशीलता की मिसाल
शोभनी बैगा, जो गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं, ने आर्थिक सहायता के लिए आवेदन दिया था। कलेक्टर ने तत्काल स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि उनकी सहायता राशि को प्राथमिकता पर स्वीकृत किया जाए।
एक अन्य मामले में, ग्राम लतार के आवेदक की शिकायत थी कि पंचायत सचिव के लगातार अनुपस्थित रहने से ग्रामीण कार्य बाधित हो रहे हैं। इस पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारी को सख्त निर्देश दिए कि दोषी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
जनसुनवाई की इस प्रक्रिया ने न केवल जिले में बल्कि राज्य स्तर पर प्रशासनिक पारदर्शिता और संवेदनशीलता का उदाहरण प्रस्तुत किया। कलेक्टर हर्षल पंचोली के नेतृत्व में समस्याओं को सुलझाने की गति और उनकी मानवीय दृष्टिकोण ने यह साबित किया कि एक प्रभावी प्रशासन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि लोगों की समस्याओं को समझने और समाधान देने के उनके प्रयासों से बनता है।
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लागू की गई जनसुनवाई की इस व्यवस्था ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों को अपनी समस्याएं सीधे अधिकारियों तक पहुंचाने का मंच प्रदान किया है। अनूपपुर की इस जनसुनवाई ने एक बार फिर इसे सफलतापूर्वक लागू करने की मिसाल पेश की
कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली ने कहा, “जनसुनवाई का उद्देश्य केवल आवेदन लेना नहीं है, बल्कि हर एक व्यक्ति की समस्या को समझकर, उसका समाधान प्राथमिकता के साथ करना है। प्रशासन का उद्देश्य लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना है।




Leave a Reply