रीवा में पुल से नदी में छलांग लगाकर युवक की मौत पुलिस के दावे और परिजनों के आरोपों से गहराया सस्पेंस
रीवा। पुलिस को देखकर नदी में छलांग लगाने वाले 3,000 रुपये के इनामी युवक की मौत के मामले ने सस्पेंस पैदा कर दिया है। 16 वर्षीय रोहित केवट, जिसे पुलिस बालिग बता रही है, की मौत पर परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि पुलिस मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही थी और घटना के वक्त मदद नहीं की।
घटना तब हुई जब पुलिस निपनिया पुल के पास मौजूद थी। रोहित के रिश्तेदारों के अनुसार, उसने पुलिस को देखकर डर के मारे भागते हुए नदी में छलांग लगा दी। पत्थर पर गिरने से घायल रोहित ने मदद की गुहार लगाई, लेकिन पुलिस ने कोई सहायता नहीं की। बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई
परिजनों ने आधार कार्ड दिखाते हुए दावा किया कि रोहित नाबालिग था और उसकी जन्मतिथि 2008 है। वहीं, पुलिस का कहना है कि वह बालिग था और उस पर चोरी और मारपीट के 5 मामले दर्ज थे।
परिवार का आरोप
पिता सुरेश केवट ने कहा, “मेरा बेटा मानसिक रूप से परेशान था। पुलिस बार-बार उसका पीछा कर रही थी। आखिर क्यों? क्या कानून से ऊपर उठकर उसकी जान ले ली गई?” परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने रोहित को जबरन भगाने पर मजबूर किया और घायल हालत में कोई सहायता नहीं दी।
पुलिस का पक्ष
कोतवाली थाना प्रभारी अरविंद सिंह ने बताया कि पुलिस किसी अन्य काम से इलाके में थी। उन्होंने कहा, “हमने आरोपी का पीछा नहीं किया। वह खुद ही डरकर भागने लगा और यह हादसा हुआ।”
क्या कहता है कानून?
नाबालिग होने की स्थिति में आरोपी को विशेष सुरक्षा दी जानी चाहिए थी। अगर वह बालिग था, तो भी पुलिस पर लगे आरोप गंभीर हैं।
जांच का आदेश
रीवा के पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह ने कहा कि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है।
क्या यह मौत बचाई जा सकती थी?
घटना के बाद यह सवाल उठता है कि अगर पुलिस तुरंत मदद करती, तो क्या रोहित की जान बचाई जा सकती थी? इसके अलावा, बालिग और नाबालिग का विवाद मामले को और उलझा रहा है।




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