“फेसबुक पर ‘अनामिका शर्मा’ की साजिश जब असलियत निकली गांधी चौक का शशांक!””जब ‘अनामिका शर्मा’ निकला शशांक सराफ: डिजिटल साजिश का खुलासा!”



कोतमा में फेसबुक के मंच पर पहचान की राजनीति और छवि खराब करने का अजीब खेल सामने आया। ‘अनामिका शर्मा’ नाम की आईडी के जरिए कई प्रतिष्ठित व्यापारियों और समाजसेवियों को निशाना बनाया गया। पर जब पुलिस ने इस ‘अनामिका’ की असलियत उजागर की, तो कहानी ने हास्यास्पद मोड़ ले लिया।
दरअसल, यह ‘अनामिका’ कोई महिला नहीं, बल्कि 25 वर्षीय युवक शशांक कुमार सराफ था, जो गांधी चौक से अपने मोबाइल पर यह फर्जीवाड़ा चला रहा था। लोगों की छवि धूमिल करने के लिए बनाई गई
पुलिस ने शशांक को गिरफ्तार कर लिया और उसके खिलाफ आईटी एक्ट सहित कई धाराओं में मामला दर्ज किया। पूछताछ में शशांक ने माना कि यह फर्जी आईडी उसने खुद बनाई थी।
“सोशल मीडिया पर पहचान बदलने की आज़ादी के नाम पर, जब शशांक ने अनामिका बनने की ठानी, तो पुलिस ने असलियत सामने लाकर उसे जमीन पर ला पटका।”
इस प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी का खेल खेलना अब सस्ता नहीं पड़ेगा। कोतमा थाना प्रभारी सुंदर मरावी ने चेतावनी दी है कि इस तरह के मामलों में कानून सख्त है।
“फेसबुक पर बनना ‘अनामिका’ आसान हो सकता है, लेकिन पकड़े जाने पर असली नाम ही दंड भुगतेगा!”

कोतमा में सोशल मीडिया पर खेला गया नाम और पहचान का खेल आखिरकार पुलिस की साइबर टीम के जाल में फंस गया। ‘अनामिका शर्मा’ नाम की फेसबुक आईडी ने समाजसेवियों और व्यापारियों की छवि धूमिल करने का प्रयास किया, लेकिन असलियत में यह आईडी कोई महिला नहीं, बल्कि शशांक कुमार सराफ चला रहा था।
शिकायतकर्ताओं ने जब पुलिस को यह मामला सौंपा, तो जांच में पता चला कि यह “फर्जी अनामिका” असल में गांधी चौक का 25 वर्षीय युवक है, जो अपने मोबाइल से “डिजिटल ड्रामा” कर रहा था। समाज की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की इस तकनीकी साजिश का अंत हुआ गिरफ्तारी के साथ।
“अब ‘फेक अनामिकाओं’ को संभलकर चलना होगा, क्योंकि साइबर की नज़र हर जगह है!”
इस डिजिटल ‘अनामिका’ की पोल साइबर सेल ने खोल दी।
“शिकायतों का बवंडर, डिजिटल ‘अनामिका’ की उड़ान ठंडी पड़ी!”




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