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शिक्षा के मंदिर में भ्रष्टाचार का यज्ञ कुलपति और उनकी ‘कार्यपरिषद’ का अनोखा तमाशा

शिक्षा के मंदिर में भ्रष्टाचार का यज्ञ कुलपति और उनकी ‘कार्यपरिषद’ का अनोखा तमाशा



अनूपपुर। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU) के कुलपति प्रो. प्रकाशमणि त्रिपाठी ने शिक्षा को ऐसे प्रयोगशाला में बदल दिया है जहां भ्रष्टाचार की नई-नई विधियां तैयार की जाती हैं। जो विश्वविद्यालय छात्रों को ज्ञान का प्रकाश देना था, वह अब भ्रष्टाचार के अंधकार में डूबता नजर आ रहा है। भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी राजेश सिंह ने कुलपति और उनके साथियों के खिलाफ ऐसे आरोप लगाए हैं जिन्हें सुनकर लगता है कि विश्वविद्यालय नहीं, कोई “भ्रष्टाचार प्रशिक्षण केंद्र” चल रहा हो।

“कार्यपरिषद या प्राइवेट क्लब?”

कहा जाता है कि “शिक्षा मंदिर में शुद्धता जरूरी है,” लेकिन यहां कुलपति ने इसे “अपना क्लब” बना लिया है। बिना शिक्षा मंत्रालय की अनुमति के, उन्होंने अपने “करीबी पायादों” को कार्यपरिषद में शामिल कर लिया। बताया जाता है कि बैठकों के मिनट्स पर किसी सदस्य का हस्ताक्षर तक नहीं होता—लगता है कि मिनट्स भी “ऑनलाइन शॉपिंग” की तरह तैयार हो रहे हैं।

एक बैठक में फर्जी सदस्य और बिना दस्तखत के मिनट्स को “शिक्षा में नवाचार” का उदाहरण माना जा सकता है। कुलपति के इस इनोवेशन से छात्र भी हैरान हैं कि यह शिक्षा व्यवस्था है या कोई कॉमेडी शो।

“भर्तियां या भ्रष्टाचार का ‘लकी ड्रॉ’?”

नॉन-टीचिंग स्टाफ की भर्ती के लिए निजी कंपनियों को ठेके दिए गए, जिसमें से एक आरडी इंस्टीट्यूट तो “कुलपति के पुराने परिचित” निकले। ऐसा लगता है कि परीक्षा से पहले ही “लकी विनर” तय हो चुके थे। क्वेश्चन पेपर लीक किए गए, और उत्तर पुस्तिकाओं पर न नंबरिंग थी न हस्ताक्षर।

क्या यह भर्ती प्रक्रिया है या “डिवाइन गेम शो”? चुने गए उम्मीदवारों को 15 दिन पहले ही क्वेश्चन पेपर देकर तैयारी कराई गई। लगता है कि कुलपति “कैरियर कंसल्टेंसी” भी चलाने वाले हैं।

“घूसखोरी का नया फॉर्मूला”

SC/ST/OBC के आरक्षित पदों को सामान्य वर्ग में बदलकर उम्मीदवारों से मोटी रकम ली गई। लगता है कि रोस्टर सिस्टम को “पैसे का टेलीपैथी” से बदल दिया गया। सवाल उठता है कि कुलपति और उनके सहयोगियों ने इसे घूसखोरी का “गोल्ड स्टैंडर्ड” बनाने का मन बना लिया है

भवन निर्माण में ‘ईंट से ईंट जोड़ने’ का खेल”

भवन निर्माण और अन्य टेंडर में गड़बड़ी की शिकायतें तो अब IGNTU के कैंपस का हिस्सा बन चुकी हैं। यह तो तय है कि यदि किसी इमारत में भ्रष्टाचार की ईंटें जुड़ती हैं, तो वह शिक्षा के नाम पर खड़ी होती है।

कुलपति का एजेंडा: पढ़ाई नहीं, मलाई”

भाजपा मीडिया प्रभारी का आरोप है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो “शिक्षा के भविष्य का संस्कार” होने की बजाय “भ्रष्टाचार का संस्कार” हो जाएगा। राजेश सिंह का कहना है कि “इस विश्वविद्यालय ने भ्रष्टाचार को इस स्तर पर पहुंचा दिया है कि इसे आईजीएनटीयू के बजाय ‘आई गोट नथिंग टू यू’ (IGNTU) कहा जाना चाहिए

IGNTU के अधिनियम के तहत, राष्ट्रपति इस विश्वविद्यालय के विजिटर हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या राष्ट्रपति इस “भ्रष्टाचार महायज्ञ” को रोकने के लिए हस्तक्षेप करेंगे, या कुलपति और उनकी मंडली को “शिक्षा जगत के जोकर” बने रहने देंगे

शिक्षा के इस मंदिर में भ्रष्टाचार की गूंज इतनी तेज हो गई है कि छात्रों की आवाज कहीं दबकर रह गई है। कुलपति और उनके साथी शायद भूल गए हैं कि विश्वविद्यालय छात्रों के लिए है, उनकी मलाईदार रोटी के लिए नहीं। जरूरत है कि ऐसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो, वरना IGNTU को “इंडिया गॉड्स नेवर थिंक यूनिवर्सिटी” के नाम से जाना जाएगा।

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