
मध्यप्रदेश में गायों की सुरक्षा और उनके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नई पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कल बरखेड़ी डोब में प्रदेश की पहली हाई-टेक गौशाला का भूमि पूजन करेंगे। यह गौशाला आधुनिक तकनीकों और संसाधनों से युक्त होगी
यह गौशाला लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में फैली होगी।
इसमें 10,000 गायों को रखने की क्षमता होगी।
15 करोड़ रुपये की लागत से इसका निर्माण किया जाएगा।
गायों की 24×7 मॉनिटरिंग के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
गायों को भूसा, हरा घास, और पशु आहार कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएग
गोबर और गौमूत्र से जैविक खाद और अन्य सामग्री का निर्माण किया जाएगा।
गौशाला में जैविक खाद संयंत्र लगाया जाएगा।
जैविक उत्पादों का उपयोग खेती और अन्य उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
गायों के उपचार के लिए एक आधुनिक चिकित्सा वार्ड बनाया जाएगा।
यह वार्ड सभी आवश्यक उपकरणों और संसाधनों से सुसज्जित हो
गाय भारतीय संस्कृति और कृषि व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
गाय को भारतीय परंपरा में ‘गौ माता’ कहा जाता है।
धार्मिक ग्रंथों में गाय की पूजा का विशेष उल्लेख है
दूध उत्पादन: गाय दूध का प्रमुख स्रोत है, जो पोषण का मुख्य आधार है।
गोबर और गौमूत्र: गोबर से जैविक खाद, और गौमूत्र से कीटनाशक और औषधि बनाई जाती है।
गोशालाओं से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती
गोबर और गौमूत्र से बनी जैविक खाद रासायनिक खादों का बेहतर विकल्प है।
यह पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने में मदद करती है।
जैविक खेती में गाय के उत्पादों का विशेष महत्त्व है।
गोबर और गौमूत्र का उपयोग औषधीय उत्पादों के निर्माण में किया जा रहा है
गायों की देखभाल के लिए आधुनिक प्रबंधन प्रणाली स्थापित करना।
जैविक उत्पादों को बढ़ावा देकर कृषि में स्थिरता लाना।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गौ-आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देना।
बरखेड़ी डोब में बनने वाली यह हाई-टेक गौशाला भारत के गौशाला प्रबंधन का आधुनिक मॉडल प्रस्तुत करेगी। यह पहल न केवल गायों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यह पहल मध्यप्रदेश को गौ संरक्षण और उपयोगिता के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाएगी।









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