पर जीत हासिल की। इस बार के चुनावों में भाजपा के प्रमुख नेता और मुख्यमंत्री नयाब सिंह सैनी ने अपनी सीट पर जीत दर्ज की, वहीं कांग्रेस के भूपिंदर सिंह हुड्डा ने भी अपनी सीट गरही सांपला-किलोई से जीत दर्ज की।
भाजपा के प्रमुख उम्मीदवारों में से भव्य बिश्नोई ने आदमपुर सीट से जीत दर्ज की, जबकि अनिल विज जैसे वरिष्ठ भाजपा नेता अंबाला कैंट सीट पर हार गए। कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में उदय भान ने अपनी सीट होडल से जीत हासिल की। वहीं, निर्दलीय उम्मीदवार सवित्री जिंदल, जो भारत की सबसे धनी महिला हैं, हिसार से जीत दर्ज करने में कामयाब रहीं।
कुल मिलाकर, भाजपा और कांग्रेस के बीच वोट शेयर के मामले में भी कड़ी प्रतिस्पर्धा थी। भाजपा को कुल 49 सीटों पर बढ़त हासिल हुई थी जबकि कांग्रेस 35 सीटों पर आगे थी। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) का प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा और वह कोई सीट नहीं जीत पाई। निर्दलीय उम्मीदवारों ने 4 सीटों पर बढ़त बनाई थी, जबकि INLD और BSP ने एक-एक सीटों पर बढ़त हासिल की।
इस चुनाव की खास बात यह थी कि कई वरिष्ठ नेता हार गए, जिनमें प्रमुख रूप से INLD के अभय सिंह चौटाला और JJP के दुष्यंत चौटाला शामिल थे, जिनकी हार ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया।
इन चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर किया है, जो भविष्य की राजनीति पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव 2024 के नतीजों में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के नेता उमर अब्दुल्ला ने बड़ी जीत हासिल की है। उन्होंने बडगाम और गांदरबल दोनों सीटों से जीत दर्ज की है। नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन ने मिलकर चुनाव लड़ा, जिससे उमर अब्दुल्ला के मुख्यमंत्री बनने की संभावना मजबूत हो गई है। गठबंधन ने बीजेपी के खिलाफ बढ़त बनाई, खासकर घाटी में।
चुनाव में कुल 90 सीटों के लिए मुकाबला हुआ। जम्मू क्षेत्र में बीजेपी को कुछ सीटों पर बढ़त मिली, लेकिन घाटी में कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन ने प्रमुखता से जीत दर्ज की। कुछ प्रमुख सीटों पर कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार विजयी रहे, जबकि पीडीपी और निर्दलीय उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा।
उमर अब्दुल्ला ने बडगाम सीट से 18,485 वोटों के अंतर से और गांदरबल सीट से 10,574 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। वहीं, बीजेपी के लिए जम्मू क्षेत्र की कुछ सीटों पर मोहन लाल, विक्रम रंधावा, और सतीश कुमार शर्मा जैसे उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, लेकिन घाटी में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा।
कुल मिलाकर, यह चुनाव नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन के पक्ष में रहा, जिससे बीजेपी को राज्य में मजबूत सरकार बनाने में असफलता का सामना करना पड़ा।
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