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हिन्दू धर्म में माता की उपाधि पानें बाली गायों की इतनीं दुर्दशा क्यों ? कौन है इसका जिम्मेंदार

हिन्दू धर्म में माता की उपाधि पानें बाली गायों की इतनीं दुर्दशा क्यों ? कौन है इसका जिम्मेंदार

आखिर गौ-वंश व आवारा पशुओं के सुरक्षा की जिम्मेंदारी किसकी है ?

हाइवे और मुख्य मार्गो पर बसे गांव और रहवासी अपने गौ वंश को आवारा छोड़ रहे हैं यही हाल नगरीय प्रशासन क्षेत्र का है ।


प्रदेश सरकार नें गौ-वंश की सुरक्षा के लिए जगह-जगह प्रत्येक ग्राम पंचायतों में गौ-शालाओं का निर्माण करवाया है ताकि ये आवारा घूमते गौ-वंश की सड़क में किसी भी प्रकार की दुर्घटना से मौत न हो।ये आवारा जानवर गौ-शालाओं पर आराम से रहें।गौ-शालाओं पर शासन द्वारा गौ-वंशों के रहनें-खानें की भी व्यवस्था की गई है फिर भी इन आवारा गौ-वंशों की सड़क दुर्घटना पर आए दिन मौत हो रही है।सड़कों पर आवारा घूमती गायों की मौत हो रही है साथ ही सड़क दुर्घटना में आदमियों की भी मौत हो रही है और प्रत्येक जगह बनी गौ-शालाएँ शो पीस बन कर रह गई है। प्रदेश  भर में बनीं हुई गौ-शालाओं में उसके संचालको का  क्या कर्तव्य  नही बनता है कि  आवारा जानवरों को पकड़वा कर उसमें रखना चाहिए ताकि सड़कों पर धमा चौकड़ी से न तो गौ-वंशों की मौत हो और न इंसानों की मौत हो। स्थानीय प्रशासन को चाहिए की इन आवारा जानवरों को पकड़वा कर गौ-शालाओं में छोड़ दे ताकि हिन्दू धर्म में माता का दर्ज पानें बाली गायों की मौत  लावारिश की तरह सड़कों पर न हो।
मध्यप्रदेश सरकार नें अरबों रूपये खर्च कर के प्रत्येक ग्राम पंचायतों में बनवाया गौ-शालाएँ फिर भी गौ-वंशों को मिल रही है दर-दर की ठोकरें
                                            गौ-वंशों की रक्षा, सुरक्षा , आवास व भोजन की चिन्ता करते हुए प्रदेश सरकार नें प्रत्येक ग्राम पंचायतों में गौ-शालाओं का निर्माण कराया ताकि गौ-वंशों की दुर्दशा व असामयिक मौत न हो किन्तु सरकार की यह योजना फ्लाप होते दिख रही है क्योंकि आए दिन देखनें को मिलता है कि सड़क दुर्घटना में किसी न किसी मवेशी का मृत शरीर सड़क पर पड़ा ही रहता है जिसको कुत्ते नोंच-नोंच कर खाते हैं।इतना ही नहीं कभी-कभी तो देखनें को मिलता है कि यदि कोई मवेशी किसी ब्यक्ति के खेत की फसल को नष्ट कर देता है तो उस ब्यक्ति द्वारा बेरहमीं के साथ इन मवेशियों को मारा-पीटा जाता है यहाँ तक की धारदार हथियार से उसके किसी न किसी अंग को छतिग्रस्त कर दिया जाता है ये है वर्तमान की स्थिति।
                               उपरोक्त बातों पर सरकार व शासन-प्रशासन को गौर करना चाहिए तथा कोई न कोई ऐसी उचित ब्यवस्था करनीं चाहिए ताकि माँ की उपाधि पानें वाली गाय तथा गौ-वंशों की रक्षा सुरक्षा की जा सके,उनकी दुर्दशा व दुर्घटनाओं से मौत न हो। शासन प्रशासन का आदेश हवा हवाई ।
         

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