भोपाल। प्रदेश में त्रुटी के कारण अधिक वेतन पाने वाले वन रक्षकों की जानकारी वन मुख्यालय ने मांगी है। उनसे वसूली की जाएगी। वन मुख्यालय की एपीसीसीएफ प्रशासन-2 कमलिका मोहंता ने समस्त सीसीएफ को इस संबंध में भी पत्र लिखा है। वन रक्षकों का वेतन घटाने की तैयारी की जा रही है, ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि वन विभाग के अधिकारियों की गलती से वन कर्मियों को मूल वेतन 5410 व ग्रेड-पे 1900 के अनुसार भुगतान किया जा रहा था। यह गैरप्रशिक्षत जूनियर वनकर्मियों के वेतन से कम था। उसके बावजूद इसके विभाग ने भर्ती व भुगतान संबंधी नियमों में संशोधन नहीं किया। अब वित्त विभाग की आपत्ति के बाद वन कर्मियों के वेतन से कटौती कर वसूली की तैयारी शुरू कर दी है। इतना ही नहीं बढ़े हुए वेतन के साथ ब्याज की भी वसूली होगी। इधर, इस प्रकरण में देखा जाए तो वन रक्षकाें के वेतन निर्धारण की गलती जितनी वन विभाग के अधिकारियों की है, इनमें उतने ही जिम्मेदार वित्त विभाग के अधिकारी भी है।
सातवें वेतनमान निर्धारण से पकड़ में आया मामला
वेतन निर्धारण और वित्त विभाग से अनुमोदन में ही नौ वर्ष लग गए थे। साल 2009 से 2011 तक वन रक्षकों की सेवा पुुस्तिकाओं के परीक्षण के दौरान जिला कोषालय अधिकारी ने इसी वेतन को सही ठहराया था। यह पूरा मामला वर्ष 2016 में सातवें वेतनमान निर्धारण के समय पकड़ में आया और वेतन निर्धारण पर आपत्ति की गई।

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Kailash Pandey
Anuppur (M.P.)

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