मध्यप्रदेश के पुलिस महकमे में हाल ही में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन की तैयारी की जा रही है, जिसके तहत अब नॉन आईपीएस (इंडियन पुलिस सर्विस) अधिकारी भी पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद पर नियुक्त किए जा सकेंगे। इस निर्णय का उद्देश्य राज्य पुलिस सेवा (एसपीएस) के अधिकारियों के लिए प्रमोशन के नए अवसर प्रदान करना है और यह परिवर्तन राज्य पुलिस सेवा के कॉडर रिव्यू के माध्यम से संभव होगा।
मुख्यमंत्री का निर्णय
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उठाए गए इस कदम को राज्य में पुलिस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह निर्णय उन अधिकारियों के लिए एक नया मार्ग प्रशस्त करेगा जो नॉन आईपीएस हैं, लेकिन जिन्होंने पुलिस सेवा में उत्कृष्टता प्रदर्शित की है।
बदलाव के तहत क्या होगा?
1. पदों का विस्तार: इस निर्णय के तहत राज्य के 16 जिलों में एसपी और सात बटालियनों में कमांडेंट के पदों पर नॉन आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। इस बदलाव से अधिकारियों को बेहतर अवसर मिलेंगे और पुलिस महकमे में विभिन्न स्तरों पर नेतृत्व की गुणवत्ता में सुधार होगा।
2. अशोक चिह्न और स्टार: नॉन आईपीएस अधिकारियों के कंधे पर अशोक के चिह्न के साथ ‘एक स्टार’ लगाया जाएगा, जिससे उनकी नई स्थिति और जिम्मेदारी को दर्शाया जाएगा।
3. प्रमोशन की प्रक्रिया: राज्य पुलिस सेवा (एसपीएस) के सीनियर अफसरों के प्रमोशन की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए राज्य सरकार ने कॉडर रिव्यू की तैयारी कर ली है। इससे राज्य पुलिस सेवा के भीतर अधिकारियों के लिए उन्नति के नए रास्ते खुलेंगे।
प्रभाव और लाभ
1. प्रशिक्षण और अनुभव: नॉन आईपीएस अधिकारियों के पास भी पुलिसिंग का अच्छा अनुभव होता है, और उन्हें इस पद पर नियुक्ति देने से पुलिस सेवा में विभिन्न दृष्टिकोण और अनुभवों का समावेश होगा।
2. सामाजिक समरसता: पुलिस महकमे में विविधता लाने से समाज के विभिन्न वर्गों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी, जिससे पुलिस की छवि को भी सुधारने में मदद मिलेगी।
3. प्रभावी संचालन: विभिन्न स्तरों पर स्थानीय अधिकारियों की नियुक्ति से पुलिस व्यवस्था अधिक प्रभावी और प्रतिक्रिया देने वाली बनेगी, जो स्थानीय समस्याओं को समझने और हल करने में मदद करेगी।
4. प्रेरणा और मनोबल: इस फैसले से नॉन आईपीएस अधिकारियों में उत्साह और मनोबल बढ़ेगा, जो उन्हें अपने कार्यों में और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगा।
चुनौतियाँ
1. प्रशिक्षण की आवश्यकता: नॉन आईपीएस अधिकारियों को एसपी बनने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और कौशल विकसित करने की आवश्यकता होगी। इसके लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम्स की व्यवस्था की जानी चाहिए।
2. सामाजिक धारणा: कुछ लोगों में यह धारणा हो सकती है कि केवल आईपीएस अधिकारी ही एसपी के पद के लिए योग्य हैं। इस धारणा को बदलने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाना आवश्यक होगा।
3. नियामकीय और प्रशासनिक बदलाव: इस निर्णय को लागू करने के लिए कई प्रशासनिक और नियामकीय बदलावों की आवश्यकता होगी, जो समय और संसाधनों की मांग कर सकते हैं।
चयनित जिलों और बटालियनों की सूची
राज्य के 16 जिलों और सात बटालियनों में नॉन आईपीएस अधिकारियों को एसपी और कमांडेंट बनाने की योजना में शामिल हैं:
जिलें:
1. मैहर
2. पांढुर्ना
3. मऊगंज
4. आलीराजपुर
5. डिंडोरी
6. हरदा
7. राजगढ़
8. आगर मालवा
9. निवाड़ी
10. अनूपपुर
11. उमरिया
12. बड़वानी
13. श्योपुर
14. नीमच
15. इंदौर देहात
16. भोपाल देहात
बटालियन्स:
1. 5वीं वाहिनी मुरैना
2. 17वीं वाहिनी भिण्ड
3. 18वीं वाहिनी शिवपुरी
4. 23वीं वाहिनी भोपाल
5. 34वीं वाहिनी जावरा
6. 10वीं वाहिनी सागर
7. 29वीं वाहिनी दतिया
इसके अतिरिक्त, RAPTC इंदौर में भी सेनानी के रूप में पदस्थ किए जाने का प्रस्ताव है।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश पुलिस महकमे में यह बदलाव एक सकारात्मक दिशा में कदम है। नॉन आईपीएस अधिकारियों को एसपी के पद पर नियुक्त करने से न केवल उनके लिए नए अवसर खुलेंगे, बल्कि पुलिस सेवा की कार्यप्रणाली में भी सुधार होगा। यह निर्णय स्थानीय स्तर पर पुलिसिंग को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
इस बदलाव से यह सुनिश्चित होगा कि पुलिस महकमा अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए समाज के प्रति जिम्मेदार और उत्तरदायी बना रहे। यह न केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे समाज में पुलिस की छवि को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इस तरह के प्रयासों से मध्यप्रदेश की पुलिस व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बन सकेगी।

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Kailash Pandey
Anuppur (M.P.)

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