मध्य प्रदेश (म.प्र.) में ग्राम पंचायतों का वार्षिक बजट और उनके विकास की स्थिति एक महत्वपूर्ण विषय है, क्योंकि यह सीधे तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के विकास, गरीबी उन्मूलन, सामाजिक उत्थान और ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है। पंचायतों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता, उनके द्वारा कार्यान्वित योजनाओं और विकास की रुकावटों पर विचार करते हुए हम इस विषय पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
1. मध्य प्रदेश में ग्राम पंचायतों का वार्षिक बजट
मध्य प्रदेश में ग्राम पंचायतों का बजट राज्य सरकार, केंद्रीय सरकार, और विभिन्न विकास कार्यक्रमों से मिलने वाले अनुदानों और राजस्व से निर्धारित होता है। पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय शक्तियां प्रदान करने के लिए संविधान के 73वें संशोधन के तहत कुछ प्रावधान किए गए हैं, जिससे उन्हें ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए वित्तीय संसाधन मिलते हैं। पंचायतों के पास निम्नलिखित स्रोतों से बजट आता है:
(i) केंद्र और राज्य सरकार से अनुदान:
ग्राम पंचायतों को केंद्रीय वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग द्वारा समय-समय पर अनुदान दिया जाता है। ये अनुदान मुख्य रूप से ग्रामीण विकास योजनाओं, जल प्रबंधन, सड़क निर्माण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए होते हैं। 14वें वित्त आयोग ने पंचायती राज संस्थाओं के लिए भारी अनुदान की सिफारिश की थी, जिसका उद्देश्य पंचायतों को मजबूत और स्वायत्त बनाना था।
(ii) राजस्व एकत्रण:
ग्राम पंचायतें अपने स्थानीय क्षेत्र में कुछ कर और शुल्क भी एकत्र करती हैं। इनमें गृह कर, पानी का कर, बाजार शुल्क, और अन्य स्थानीय कर शामिल होते हैं। हालांकि, कर संग्रहण की क्षमता ग्राम पंचायतों की वित्तीय स्थिति को विशेष रूप से प्रभावित करती है। कई गांवों में पंचायतों द्वारा पर्याप्त कर संग्रहण नहीं हो पाता है, जिससे उनकी आय सीमित रहती है।
(iii) विकास योजनाएं और अनुदान:
मध्य प्रदेश में पंचायतों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA), प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), स्वच्छ भारत मिशन, और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी योजनाओं के तहत भी अनुदान प्राप्त होते हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य रोजगार सृजन, बुनियादी ढांचे का विकास, आवास की सुविधा और सफाई के स्तर को सुधारना है।
2. ग्राम पंचायतों द्वारा किए जाने वाले विकास कार्य
ग्राम पंचायतें कई प्रकार के विकास कार्यों में शामिल होती हैं, जिनका उद्देश्य ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता को सुधारना है। यह विकास कार्य मुख्यतः निम्नलिखित क्षेत्रों में होते हैं:
(i) सड़क और परिवहन का विकास:
गांवों में बेहतर सड़क और परिवहन की सुविधाएं विकास का एक महत्वपूर्ण पहलू हैं। पंचायतें ग्रामीण सड़कों का निर्माण और रखरखाव करती हैं, जो किसानों, व्यापारियों और छात्रों के लिए आवश्यक होती हैं।
(ii) जल प्रबंधन और सिंचाई:
जल आपूर्ति और सिंचाई सुविधाएं पंचायतों के विकास कार्यों का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मध्य प्रदेश जैसे राज्य में, जहां कृषि का एक बड़ा हिस्सा बारिश पर निर्भर है, पंचायतें जल संरक्षण, सिंचाई योजनाओं, और तालाबों के पुनर्निर्माण पर ध्यान देती हैं।
(iii) स्वास्थ्य और स्वच्छता:
ग्राम पंचायतों का एक और महत्वपूर्ण कार्यक्षेत्र है गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को सुनिश्चित करना और स्वच्छता बनाए रखना। इसके अंतर्गत पंचायतें स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना, कचरा प्रबंधन, और स्वच्छता अभियानों का संचालन करती हैं।
(iv) शिक्षा का विस्तार:
ग्राम पंचायतें अपने क्षेत्र में स्कूलों का संचालन, उनके लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना, और बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होती हैं। पंचायतें यह भी सुनिश्चित करती हैं कि शिक्षा के बुनियादी ढांचे की देखभाल हो और बच्चों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
(v) आवास और रोजगार:
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पंचायतें गरीब परिवारों के लिए पक्के घर बनाने का कार्य करती हैं। इसके साथ ही, MGNREGA जैसी योजनाओं के माध्यम से रोजगार के अवसर प्रदान करना भी पंचायतों की प्राथमिकता होती है।
3. विकास न होने के कारण
हालांकि ग्राम पंचायतों के पास बजट और विकास कार्यों की जिम्मेदारी होती है, फिर भी कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गति धीमी रहती है। इसके कई कारण हो सकते हैं:
(i) वित्तीय संसाधनों की कमी:
ग्राम पंचायतों को मिलने वाले अनुदान और वित्तीय संसाधन कई बार पर्याप्त नहीं होते। कई बार राज्य और केंद्र सरकार से मिलने वाले अनुदान समय पर नहीं आते, जिससे विकास कार्यों में देरी होती है। इसके अलावा, पंचायतों की अपनी आय स्रोत, जैसे कर संग्रहण की क्षमता भी सीमित होती है, जिससे उनके पास वित्तीय संसाधनों की कमी रहती है।
(ii) कुशल प्रशासन की कमी:
कई बार पंचायतों में प्रशासनिक कौशल की कमी होती है। पंचायत सदस्य या सरपंच कई बार विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में कुशल नहीं होते, जिससे विकास कार्यों में रुकावट आती है। उन्हें उचित प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है, ताकि वे योजनाओं को सही तरीके से लागू कर सकें।
(iii) भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी:
ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या हो सकती है। कई बार विकास कार्यों के लिए आवंटित धन का सही उपयोग नहीं होता है, और उसे अन्य कार्यों में बर्बाद कर दिया जाता है। इसके अलावा, विकास योजनाओं में पारदर्शिता की कमी भी विकास कार्यों में बाधा बनती है।
(iv) स्थानीय राजनीति और मतभेद:
ग्राम पंचायतों में स्थानीय राजनीति और आपसी मतभेद विकास कार्यों में बड़ी बाधा बनते हैं। पंचायतों के भीतर विभिन्न समूहों के बीच होने वाले राजनीतिक टकराव या मतभेदों के कारण विकास योजनाएं प्रभावित होती हैं, और कभी-कभी ये योजनाएं ठप पड़ जाती हैं।
(v) जनभागीदारी की कमी:
ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों में ग्रामीण जनता की भागीदारी महत्वपूर्ण होती है। लेकिन कई बार जनता विकास योजनाओं में भागीदारी नहीं करती, जिससे योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं हो पाता। जनजागरूकता और जनता की सक्रिय भागीदारी की कमी के कारण योजनाएं सफल नहीं हो पाती हैं।
(vi) तकनीकी और ज्ञान का अभाव:
ग्राम पंचायतों के पास कई बार तकनीकी संसाधनों और ज्ञान की कमी होती है, जो विकास कार्यों को सुचारु रूप से लागू करने के लिए आवश्यक होते हैं। खासतौर पर, कृषि, जल प्रबंधन, और बुनियादी ढांचे से संबंधित कार्यों में पंचायतों को तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, जो अक्सर उपलब्ध नहीं होती।
(vii) मानव संसाधन की कमी:
ग्राम पंचायतों में मानव संसाधन की कमी भी विकास कार्यों में एक बड़ी बाधा हो सकती है। कई बार पंचायतों के पास प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं होते, जो योजनाओं का क्रियान्वयन कर सकें। इससे योजनाओं में देरी और असफलता होती है।
4. विकास में सुधार के उपाय
ग्राम पंचायतों के विकास में सुधार लाने के लिए कुछ प्रमुख उपाय किए जा सकते हैं:
(i) प्रशिक्षण और जागरूकता:
ग्राम पंचायतों के सदस्यों और अधिकारियों को विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए उचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, ग्रामीण जनता को भी जागरूक किया जाना चाहिए ताकि वे योजनाओं में सक्रिय भागीदारी कर सकें।
(ii) वित्तीय पारदर्शिता:
पंचायतों में वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा सकता है। योजनाओं की निगरानी के लिए तकनीकी उपकरणों का उपयोग करके भ्रष्टाचार को कम किया जा सकता है।
(iii) समन्वय और सहयोग:
स्थानीय प्रशासन, पंचायतें, और ग्रामीण जनता के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए ताकि विकास योजनाओं का सुचारु रूप से क्रियान्वयन हो सके।
(iv) जन भागीदारी को प्रोत्साहन:
जन भागीदारी के महत्व को समझते हुए पंचायतों को ग्रामीण जनता के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए। इससे विकास योजनाओं में सुधार आएगा और जनता का विश्वास बढ़ेगा।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में ग्राम पंचायतों का वार्षिक बजट और उनके विकास कार्य ग्रामीण जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, पंचायतों के सामने कई चुनौतियां हैं, जिनमें वित्तीय संसाधनों की कमी, प्रशासनिक अक्षमता, भ्रष्टाचार, और जनभागीदारी की कमी प्रमुख हैं। इन चुनौतियों का समाधान करके ही ग्राम पंचायतें वास्तविक रूप से ग्रामीण विकास और स्वशासन का सपना पूरा कर सकती हैं।

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Kailash Pandey
Anuppur (M.P.)

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