CJI से राष्ट्रपति तक पहुंचा मध्य प्रदेश स्टेट बार चुनाव का मामला

जस्टिस धूलिया पर टिप्पणी और CJI को ‘तानाशाह’ कहने से बढ़ा विवाद, सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद कई वकील चुनाव से बाहर

जबलपुर। मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल चुनाव से जुड़ा विवाद अब गंभीर टकराव का रूप ले चुका है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने सख्त रुख अपनाते हुए याचिका को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान “ये धन्य कुमार जैन कौन हैं?” जैसी तीखी टिप्पणी के साथ कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए कि इस तरह के मामलों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। जस्टिस सुधांशु धूलिया के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी ने भी कोर्ट की नाराजगी को और बढ़ा दिया।

इस पूरे विवाद की जड़ बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नए नियम हैं, जिनके तहत हाईकोर्ट बार और स्टेट बार में एक साथ पद पर रहने पर रोक लगाई गई है। अधिवक्ता परितोष त्रिवेदी, ज्योति राय और अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर तर्क दिया था कि कई पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है या हलफनामा देकर चुनाव लड़ने की अनुमति मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। इसके साथ ही “काले कोट के दुरुपयोग” जैसी कड़ी टिप्पणी करते हुए अदालत ने चुनाव याचिका के माध्यम से ही राहत लेने का रास्ता सुझाया। इस फैसले के बाद कई वकीलों का स्टेट बार चुनाव लड़ने का सपना भी खत्म हो गया।

वहीं, इस घटनाक्रम के बाद विवाद और गहरा गया जब हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धन्य कुमार जैन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को “तानाशाह” बताया और न्यायपालिका पर गंभीर आरोप लगाए। बार के भीतर ही इस कदम का विरोध शुरू हो गया है, जहां कई अधिवक्ताओं ने इस तरह की भाषा और बार के लेटरहेड के इस्तेमाल को अनुचित बताया है। अब यह मामला चुनावी विवाद से आगे बढ़कर न्यायपालिका और अधिवक्ताओं के बीच टकराव का रूप लेता नजर आ रहा है।

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