आईएएस के फार्महाउस पर छापेमारी के बाद निलंबन का मामला पहुंचा अदालत

इंदौर । महू क्षेत्र में स्थित एक फार्महाउस पर की गई जुआ विरोधी कार्रवाई अब कानूनी विवादों में घिर गई है। हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर हुई सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए गए। मानपुर के निलंबित थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह हिरोरे ने अदालत के समक्ष अपनी याचिका में विभाग पर प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। इस प्रकरण में 10 और 11 मार्च की मध्यरात्रि को मध्य प्रदेश वित्त निगम की एमडी और 2009 बैच की आईएएस अधिकारी वंदना वैद्य के फार्महाउस पर पुलिस ने दबिश दी थी। इस दौरान 18 लोगों को जुआ खेलते हुए पकड़ा गया था और मौके से 13 लाख 67 हजार 971 रुपये नकद सहित कुल 28.67 लाख रुपये का सामान जब्त किया गया था।

​प्रशासनिक दबाव और निलंबन के आरोप

​थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह हिरोरे ने न्यायालय को बताया कि कार्रवाई के तुरंत बाद उन पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दबाव बनाया गया था। याचिका के अनुसार उन पर आईएएस अधिकारी का नाम प्राथमिकी से हटाने और घटना के वास्तविक स्थल को बदलने के लिए जोर दिया गया था। जब उन्होंने इस अनुचित मांग को मानने से इनकार कर दिया, तो उन्हें उसी दिन निलंबित कर दिया गया। इसके विपरीत इसी मामले में संलिप्त अन्य पुलिसकर्मियों जैसे एसआई मिथुन ओसारी और एएसआई रेशम गिरवाल को कुछ समय बाद बहाल कर दिया गया, जबकि टीआई को बुरहानपुर स्थानांतरित कर दिया गया।

​न्यायालय की तल्ख टिप्पणी और सवाल

​सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर कड़े सवाल पूछे। अदालत ने जानना चाहा कि जिस स्थान पर इतनी बड़ी कार्रवाई हुई, वहां सीसीटीवी कैमरे क्यों नहीं लगे थे। साथ ही यह प्रश्न भी उठाया गया कि जब फार्महाउस एक आईएएस अधिकारी के नाम पर दर्ज है, तो जांच के दौरान उनके बयान क्यों दर्ज नहीं किए गए। माननीय न्यायाधीश ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि निष्ठापूर्वक ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों को इस तरह निलंबित किया जाएगा, तो भविष्य में कोई भी अधिकारी निष्पक्ष तरीके से काम करने का साहस नहीं जुटा पाएगा।

​भेदभावपूर्ण कार्रवाई पर मांगा जवाब

​निलंबित टीआई ने अपनी याचिका में सिमरोल में हुई एक अन्य बड़ी जुआ विरोधी कार्रवाई का उदाहरण भी दिया। उन्होंने तर्क दिया कि 15 मार्च को सिमरोल में भी बड़ा जुआ पकड़ा गया था, लेकिन वहां के थाना प्रभारी पर प्रशासन ने कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की। इस असमान व्यवहार पर कोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया, हालांकि शासन की ओर से कोई स्पष्ट उत्तर पेश नहीं किया गया। फिलहाल न्यायालय ने दो घंटे की लंबी बहस के बाद निलंबन से जुड़ी याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जबकि विभागीय चार्जशीट को लेकर सुनवाई अभी जारी रहेगी।

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