
अनूपपुर की चौपाल:कैलाश पाण्डेय
अनूपपुर में रामलाल रौतेल के स्वागत में उमड़े जनसैलाब के बाद अब सियासी पारा चौपाल पर चढ़ता नजर आ रहा है। शाम ढलते ही अनूपपुर इंदिरा चौराहे और चाय की दुकानों पर जुटी भीड़ के बीच चर्चा का केंद्र स्वागत नहीं, बल्कि 2028 के विधानसभा चुनाव की संभावित बिसात रही। स्थानीय अंदाज़ में हुई यह बहस अब राजनीतिक मायनों में भी खास मानी जा रही है।
चौपाल पर बैठे कक्का ने बातचीत की शुरुआत करते हुए सवाल उठाया, “भीड़ तो ठीक है, लेकिन क्या यह सिर्फ स्वागत था या आने वाले चुनाव का संकेत?”
इस पर घसीटा ने तुरंत जवाब दिया, “कक्का, अब स्वागत में भी राजनीति छुपी होती है। इतना बड़ा जनसैलाब यूं ही नहीं उमड़ता, इसके पीछे संदेश साफ होता है तैयारी शुरू हो चुकी है।”
तभी चौरंगी लाल भी चर्चा में शामिल हुए और बोले, “राजनीति में हर चीज का समय होता है। जो आज दिख रहा है, वही कल पद के लिए दावेदारी करेगा।”
घसीटा ने तंज कसते हुए कहा, “तो क्या दिशा तय करने के लिए ही लोग रंग बदल रहे हैं? कल तक विरोध, आज समर्थन ये कैसी राजनीति है?”
चौरंगी लाल ने सफाई दी, “इसे रंग बदलना मत कहिए, यह रणनीति है। पार्टी को मजबूत रखने के लिए सबको साथ आना पड़ता है।”
कक्का ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए पूछा, “या फिर टिकट की उम्मीद सबको एक कर रही है?”
इस सवाल पर थोड़ी देर के लिए चौरंगी लाल चुप रहे, फिर बोले, “देखिए, नियुक्ति आगामी विधानसभा चुनाव के बाद तक बताई जा रही है ऐसे में 2028 के चुनाव में नया चेहरा आना तय माना जा रहा है।”
घसीटा ने तुरंत कहा, “यानी साफ है कि पुराने दावेदारों की छुट्टी हो सकती है। इसलिए आज सब लाइन में लगे हैं।”
कक्का ने गंभीर लहजे में पूछा, “क्या यही वजह है कि ‘दो लाल’ अब आगामी विधान सभा चुनाव में चर्चा से बाहर हो सकते हैं?”
चौरंगी लाल ने संभलकर जवाब दिया, “राजनीति संभावनाओं का खेल है। जो समय के साथ पाला बदलने में आगे रहेगा।”
घसीटा ने मुस्कुराते हुए फिर तंज कसा, “मतलब जो सबसे जल्दी रंग बदलेगा, वही सबसे आगे रहेगा… यही आपका सिद्धांत है?”
चौपाल पर बैठे लोगों में हल्की हंसी गूंज उठी।
कक्का ने अगला सवाल रखा, “लेकिन जो नेता आज एक मंच पर साथ दिख रहे हैं, क्या यह स्थायी एकता है या सिर्फ दिखावा?”
चौरंगी लाल ने जवाब दिया, “चुनाव से पहले एकजुटता दिखाना जरूरी होता है। इससे संगठन मजबूत संदेश देता है।”
घसीटा ने जवाब दिया, “या फिर यह ऊपर से आया आदेश होता है कि सब साथ दिखो, चाहे अंदर कितना भी मतभेद हो?”
कक्का ने अंतिम चरण की ओर बढ़ते हुए पूछा, “तो क्या इस पूरे आयोजन को शक्ति प्रदर्शन माना जाए?”
घसीटा ने स्पष्ट कहा, “बिल्कुल, यह शक्ति प्रदर्शन भी है और संकेत भी कि आगे बदलाव संभव है।”
चौरंगी लाल ने भी सहमति जताते हुए कहा, “पर अंतिम फैसला जनता ही करेगी। 2028 में असली तस्वीर साफ होगी।”
अंत में कक्का ने चौपाल की बात समेटते हुए कहा, “स्वागत तो बहाना है, असली लड़ाई टिकट और नेतृत्व की है।”
चाय के खाली गिलासों के बीच खत्म हुई इस चौपाल की बहस ने यह साफ कर दिया कि अनूपपुर की राजनीति में हलचल तेज हो चुकी है। जनसैलाब के बाद अब नजरें 2028 के चुनाव पर टिक गई हैं,क्योंकि कुछ पाला बदलने में माहिर नेताओं को लग रहा है की चुनाव के पहले परिसीमन होगा और संभव हो कि अनूपपुर विधानसभा सामान्य सीट हो जाएं और और हम अपनी दावेदारी कर सके ।जहां यह तय होगा कि सियासत के इस रंग बदलती राजनीत में कुछ भी संभव है।


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