
जबलपुर। उच्च न्यायालय ने अनूपपुर जिले के शासकीय सेवकों के स्वत्वों के भुगतान के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय के आदेशों का पालन न करने और अवमानना याचिका पर संतोषजनक जवाब न मिलने के कारण कलेक्टर हर्षल पंचोली सहित चार वरिष्ठ अधिकारियों को न्यायालय में तलब किया गया है। यह पूरा मामला कन्या परिसर अनूपपुर में पदस्थ सहायक ग्रंथपाल संतोष कुमार शुक्ला के देयकों के भुगतान में हुई अत्यधिक देरी और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़ा हुआ है। न्यायमूर्ति ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए 28/04/2026 को सुबह 10.30 बजे कोर्ट रूम नंबर 13 में सभी प्रतिवादियों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी है।
भुगतान में देरी और रिकवरी आदेश पर नाराजगी
प्रकरण के अनुसार संतोष कुमार शुक्ला के नियमितीकरण के पश्चात मिलने वाले एरियर्स और समयमान वेतनमान के लाभों को विभाग द्वारा जानबूझकर लंबित रखा गया था। शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पहली किश्त जारी करने के बाद भुगतान रोकने के साथ ही रिकवरी का आदेश भी जारी कर दिया गया। कोष एवं लेखा विभाग रीवा और जिला कोषालय अनूपपुर द्वारा वांछित जानकारी मांगे जाने के बाद भी सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कार्यालय से कोई प्रत्युत्तर नहीं भेजा गया। इसी बीच 23/01/2025 को याचिकाकर्ता के विरुद्ध रिकवरी निकालते हुए 15 दिन में राशि जमा करने का निर्देश दिया गया, जिससे आहत होकर पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली।
न्यायालय की समयसीमा और अधिकारियों की उपस्थिति
उच्च न्यायालय ने पूर्व में 10/03/2025 को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था, लेकिन विभाग की ओर से प्रस्तुत जवाब में त्रुटियां पाई गईं। इसके पश्चात 16/04/2026 को न्यायालय ने एक सप्ताह के भीतर क्रियान्वयन के आदेश दिए थे। निर्धारित अवधि में आदेश का पालन न होने पर 24/04/2026 की सुनवाई के दौरान कड़ी आपत्ति दर्ज की गई। अब इस मामले में कलेक्टर हर्षल पंचोली, संभागीय उपायुक्त आदिवासी विकास शहडोल, सहायक आयुक्त सरिता नायक और प्राचार्य प्रमिला पांडे को स्वयं उपस्थित होकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
दो वर्षों का विलंब और विधिक कार्रवाई
वरिष्ठ अधिवक्ता के सी घिल्डियाल के माध्यम से प्रस्तुत इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने पाया कि भुगतान में लगभग दो वर्ष की देरी की गई है। प्रशासनिक स्तर पर पत्रों को दबाकर रखने और वरिष्ठ कार्यालयों को जानकारी न भेजने को न्यायालय ने गंभीरता से लिया है। 27/04/2026 को हुई सुनवाई के दौरान प्राचार्य की उपस्थिति के बाद भी न्यायालय संतुष्ट नहीं हुआ और चारों उत्तरदायी अधिकारियों को एक साथ हाजिर होने का फरमान सुनाया। शासन के आदेशों की अवहेलना और कर्मचारी के आर्थिक हितों को नुकसान पहुँचाने के कारण यह सख्त कदम उठाया गया है।


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