
जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में व्यवस्थाएं ठप: छात्रों ने दी आंदोलन की चेतावनी
जबलपुर। जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में रविवार की शाम छात्रों ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बड़ी संख्या में एकत्रित हुए विद्यार्थियों ने संस्थान में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर गहरा विरोध दर्ज कराया। छात्रों का मुख्य आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन लंबे समय से उनकी बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज कर रहा है। प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने स्पष्ट किया कि परिसर में शुद्ध पीने के पानी और नियमित बिजली जैसी अनिवार्य सेवाओं का भारी अभाव है। अल्टीमेटम के माध्यम से चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समयावधि में समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया, तो वर्तमान आंदोलन को और अधिक उग्र और व्यापक रूप दिया जाएगा।
-हॉस्टलों की जर्जर स्थिति
आंदोलनकारी छात्रों ने छात्रावासों की दयनीय स्थिति पर विस्तार से जानकारी दी। उनका कहना है कि हॉस्टल भवनों की हालत अत्यंत जर्जर हो चुकी है, जो किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकती है। वर्तमान में बढ़ती गर्मी के बावजूद हॉस्टलों में पर्याप्त संख्या में पंखे उपलब्ध नहीं हैं और न ही वॉटर कूलर सुचारू रूप से कार्य कर रहे हैं। बिजली की बार-बार कटौती के कारण पढ़ाई और सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। साफ-सफाई की व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गई है। विद्यार्थियों ने इस बात पर जोर दिया कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में शैक्षणिक माहौल दूषित हो रहा है और वे एक कठिन परिस्थिति में रहने को मजबूर हैं। हॉस्टल वार्डन से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक को इस संबंध में जानकारी होने के बाद भी धरातल पर कोई सुधार नहीं देखा गया है।
-प्रशासनिक रवैये पर भी सवाल
विद्यार्थियों के इस विरोध प्रदर्शन में समाजसेवी अधिवक्ता सुदीप सिंह सैनी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और छात्रों की मांगों को जायज ठहराया। छात्रों का आरोप है कि उन्होंने पूर्व में कई बार प्राचार्य और वार्डन को लिखित रूप में समस्याओं से अवगत कराया था, लेकिन ठोस कार्रवाई के बजाय उन्हें केवल आश्वासन ही मिले। प्रदर्शनकारियों ने एक गंभीर आरोप यह भी लगाया कि जब भी छात्र अपनी आवाज उठाते हैं, तो कॉलेज प्रबंधन उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई का डर दिखाकर चुप कराने का प्रयास करता है। बार-बार दी जा रही इन धमकियों के कारण छात्रों का धैर्य जवाब दे गया, जिसके परिणामस्वरूप रविवार को यह सामूहिक प्रदर्शन हुआ। छात्र अब केवल मौखिक आश्वासन के बजाय समस्याओं के तत्काल समाधान और लिखित प्रतिबद्धता की मांग कर रहे हैं।


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