बीच सड़क ‘हांफ’ गई मालगाड़ी: इंजन फेल होने से दो फाटक ब्लॉक, घंटों लगा रहा भीषण जाम

जबलपुर। सतना जिले में रेलवे की एक बड़ी तकनीकी चूक के कारण आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बिरला सीमेंट कंपनी की साइडिंग से क्लिंकर लोड करके निकली एक मालगाड़ी का इंजन अचानक बीच रास्ते में बंद हो गया। यह घटना बरदाडीह और मारुति नगर रेलवे फाटक के बीच घटित हुई। इंजन फेल होने की वजह से मालगाड़ी ट्रैक पर ही खड़ी हो गई, जिसके कारण मुख्य सड़क मार्ग का यातायात पूरी तरह से ठप हो गया। ट्रेन के बीच रास्ते में रुकने से सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया।

​रेलवे क्रॉसिंग बंद होने से सैकड़ों वाहन फंसे

​प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मालगाड़ी ट्रैक पर ऐसी जगह रुकी कि उससे दो महत्वपूर्ण रेलवे क्रॉसिंग पूरी तरह से ब्लॉक हो गए। ट्रेन के आगे न बढ़ने के कारण फाटक बंद रहे और देखते ही देखते सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन दोनों तरफ फंस गए। इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों को एक तरफ से दूसरी तरफ जाने का कोई रास्ता नहीं मिला, जिससे लोग काफी देर तक परेशान होते रहे। लगभग 1 घंटे तक स्थिति जस की तस बनी रही और जाम का दायरा लगातार बढ़ता गया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मौके पर काफी समय तक रेलवे की ओर से कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए गए थे।

​जबलपुर मंडल के हस्तक्षेप से बहाल हुआ यातायात

​इंजन फेल होने की सूचना मिलते ही जबलपुर मंडल के रेलवे अधिकारियों में हड़कंप मच गया। तकनीकी खराबी को दूर करने और मार्ग प्रशस्त करने के लिए आनन-फानन में दूसरा इंजन मौके पर रवाना किया गया। नया इंजन पहुंचने के बाद खराब मालगाड़ी को खींचकर सतना स्टेशन लाया गया। इसके बाद ही रेलवे फाटकों को खोला जा सका और यातायात सुचारू रूप से शुरू हुआ। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंच गई थी, जिसने सड़क पर फंसे वाहनों को व्यवस्थित करने और भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

​रेलवे की कार्यप्रणाली और रखरखाव पर उठे सवाल

​इस पूरे घटनाक्रम ने रेलवे की कार्यप्रणाली और इंजनों के रखरखाव की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। औद्योगिक साइडिंग से निकलने वाली ट्रेनों की रवानगी से पहले होने वाली तकनीकी जांच की कमी के कारण सैकड़ों लोगों को मानसिक और शारीरिक कष्ट झेलना पड़ा। यदि समय रहते इंजन की सही ढंग से जांच की जाती या आपातकालीन स्थिति के लिए वैकल्पिक व्यवस्था दुरुस्त होती, तो आम जनता को इस तरह की अव्यवस्था का शिकार नहीं होना पड़ता। पुलिस द्वारा वाहनों को सुरक्षित निकालने के बाद स्थिति सामान्य होने में काफी समय लगा।

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