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विधायक के सवाल पर घिरे रानी दुर्गावती विवि के अफसर,हड़कंप

रादुविवि प्रशासन पर विधानसभा को गुमराह करने का मामला, उच्च शिक्षा विभाग ने शुरू की जांच
​छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ या प्रशासनिक चूक, अब होगा बड़ा खुलासा

जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय द्वारा विधानसभा में दी गई जानकारी अब प्रशासन के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद शासन ने इस पूरे प्रकरण पर विश्वविद्यालय से विस्तृत प्रतिवेदन तलब किया है। उच्च शिक्षा विभाग ने 6 अप्रैल 2026 को कुलसचिव को पत्र भेजकर वस्तुस्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
-​विधानसभा में गलत जानकारी का आरोप
​जबलपुर पूर्व क्षेत्र के विधायक लखन घनघोरिया ने दिसंबर 2025 के विधानसभा सत्र के दौरान रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। उन्होंने अतारांकित प्रश्न क्रमांक 373 के माध्यम से बीटेक, बीसीए और एमसीए जैसे तकनीकी पाठ्यक्रमों के लिए उपलब्ध बुनियादी ढांचे और प्रयोगशालाओं का ब्यौरा मांगा था। विश्वविद्यालय द्वारा शासन को भेजे गए जवाब में दावा किया गया था कि सत्र 2024-25 के लिए पर्याप्त लैब सुविधाएं मौजूद हैं और एमसीए व पीजीडीसीए छात्रों हेतु 25 नए कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए हैं। विधायक ने इस जवाब को पूरी तरह असत्य बताते हुए शासन से इसकी शिकायत की थी।
-​उच्च शिक्षा विभाग ने भेजे नोटिस
​विधायक की शिकायत के बाद मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय ने मामले को गंभीरता से लिया है। सचिवालय ने उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस पूरे प्रकरण का परीक्षण करने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में विभाग ने विश्वविद्यालय प्रशासन को नोटिस जारी कर तत्काल जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सदन में दी गई जानकारी और धरातल की स्थिति में अंतर पाया जाना एक गंभीर प्रशासनिक चूक है, जिस पर जवाबदेही तय की जाएगी।
​प्रयोगशालाओं की जर्जर हालत, छात्र परेशान
​शिकायत में विश्वविद्यालय के यूआईसीएसए विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े किए गए हैं। वर्तमान में यहाँ 200 से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं, लेकिन उनके लिए तकनीकी संसाधनों का अभाव बना हुआ है। लैब में रखे अधिकांश कंप्यूटर खराब स्थिति में हैं और सॉफ्टवेयर भी अपडेट नहीं किए गए हैं। स्थिति इतनी विकट है कि छात्रों को अपने प्रैक्टिकल कार्य पूरे करने के लिए निजी लैपटॉप साथ लाने पड़ रहे हैं। शैक्षणिक सत्र के दौरान होने वाली प्रैक्टिकल कक्षाएं केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह गई हैं, जिससे छात्रों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है।
-​सदन को गुमराह करने पर कार्रवाई की मांग
​विधायक लखन घनघोरिया ने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं का अपमान बताया है। उनका तर्क है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने न केवल छात्रों के हितों की अनदेखी की है, बल्कि राज्य विधानमंडल जैसे सर्वोच्च मंच को भी गुमराह करने का प्रयास किया है। उन्होंने अपनी शिकायत में विश्वविद्यालय के कुलगुरु और संबंधित उच्च अधिकारियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्यवाही की मांग की है। साथ ही इस पूरे फर्जीवाड़े की विभागीय जांच कराकर दोषियों को दंडित करने का आग्रह किया है।
​विश्वविद्यालय प्रशासन की बढ़ी मुश्किलें
​शासन की सख्ती के बाद अब रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय प्रबंधन के पास जवाब देते नहीं बन रहा है। एक तरफ तकनीकी पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए भारी भरकम फीस ली जा रही है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं के नाम पर केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। विभाग द्वारा मांगे गए प्रतिवेदन में अब विश्वविद्यालय को उन सभी 25 कंप्यूटरों और लैब संसाधनों का भौतिक सत्यापन देना होगा, जिनका उल्लेख विधानसभा के जवाब में किया गया था। यदि जांच में विसंगतियां पाई जाती हैं, तो विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।

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