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ईओडब्ल्यू की दबिश में सेवानिवृत्त एसडीओ की करोड़ों की काली कमाई का खुलासा

जबलपुर। भ्रष्टाचार के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ यानी ईओडब्ल्यू जबलपुर की टीम ने लोक निर्माण विभाग के सेतु निर्माण खंड से सेवानिवृत्त हुए एसडीओ महेंद्र नागवंशी के ठिकानों पर दबिश दी है। इस छापेमारी में अधिकारी के पास करोड़ों रुपये की ऐसी संपत्ति मिली है जो उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक है। विभाग को लंबे समय से उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार के माध्यम से अवैध धन अर्जित करने की शिकायतें प्राप्त हो रही थीं, जिनकी जांच के बाद यह कदम उठाया गया है।

​भ्रष्टाचार की शिकायत पर ईओडब्ल्यू का कड़ा प्रहार

​सेवानिवृत्त एसडीओ महेंद्र नागवंशी के विरुद्ध मिली शिकायतों का गोपनीय सत्यापन करने के बाद ईओडब्ल्यू ने ठोस आधार पर यह कार्रवाई की है। आरोपी छिंदवाड़ा के आदर्श नगर, परासिया रोड के निवासी हैं और विभाग में सेतु निर्माण के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत रहे हैं। प्राथमिक जांच में भ्रष्टाचार के साक्ष्य मिलने पर ईओडब्ल्यू जबलपुर ने अपराध क्रमांक 0/26 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की संशोधित धारा 13(1)बी और 13(2) के अंतर्गत मामला दर्ज किया। इसके बाद 16 अप्रैल की सुबह ईओडब्ल्यू की तीन अलग-अलग टीमों ने एक साथ उनके आवास और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया।

​आवासीय और घरेलू संपत्तियों का विस्तृत विवरण

​दबिश के दौरान जांच दल ने महेंद्र नागवंशी के परासिया रोड स्थित आलीशान आवास की तलाशी ली, जिसकी अनुमानित कीमत 40,00,000 रुपये आंकी गई है। घर के अंदर से 91,500 रुपये की नकद राशि बरामद हुई है। इसके अलावा घर में मौजूद सुख-सुविधाओं और घरेलू सामान की इन्वेंट्री तैयार की गई, जिसका मूल्य लगभग 24,00,000 रुपये पाया गया। अधिकारी और उनके परिजनों के नाम पर कुल 22 बीमा पॉलिसियों के दस्तावेज मिले हैं, जिनमें निवेश की गई राशि 20,00,000 रुपये है। निवेश के यह दस्तावेज आरोपी की वित्तीय स्थिति और पद के दुरुपयोग की ओर संकेत कर रहे हैं।

​सोने के आभूषण और वाहनों का विशाल काफिला

​तलाशी अभियान में महेंद्र नागवंशी के घर से बड़ी मात्रा में कीमती आभूषण भी बरामद किए गए हैं। जांच टीम को 187 ग्राम सोने के जेवर मिले हैं, जिनकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग 9,00,000 रुपये है। इसके साथ ही 1 किलोग्राम चांदी के आभूषण भी मिले हैं, जिनका मूल्य 1,50,000 रुपये निर्धारित किया गया है। परिवहन के साधनों की बात करें तो आरोपी के पास 3 चार पहिया वाहन मिले हैं जिनकी कीमत 20,00,000 रुपये है, जबकि 3 दो पहिया वाहन भी बरामद हुए हैं जिनका मूल्य 2,10,000 रुपये आंका गया है। इसके अतिरिक्त एक दुकान के स्वामित्व के दस्तावेज भी मिले हैं जिसकी कीमत 13,00,000 रुपये है।

​बैंक खातों और कृषि भूमि में भारी निवेश

​वित्तीय लेन-देन की पड़ताल के दौरान जांच अधिकारियों को आरोपी और उनके परिवार के नाम पर संचालित कई बैंक खातों की जानकारी मिली है। महेंद्र नागवंशी के नाम पर 8 बैंक खाते, उनकी पत्नी सीमा नागवंशी के नाम पर 10 बैंक खाते और पुत्र ऋत्विक के नाम पर 3 बैंक खाते पाए गए हैं। इन खातों में वर्तमान में लगभग 30,00,000 रुपये जमा होने की पुष्टि हुई है। अचल संपत्ति की बात करें तो आरोपी ने विभिन्न स्थानों पर 25 एकड़ कृषि भूमि और 2 बड़े भूखंड खरीदे हैं, जिनका सरकारी और बाजार मूल्य मिलाकर 1,76,21,000 रुपये तक पहुंच रहा है।

​औद्योगिक इकाई और कुल संपत्ति का आकलन

​महेंद्र नागवंशी ने अपने सेवाकाल और उसके बाद अपनी आय से कहीं अधिक संपत्ति खड़ी की, जिसमें ग्राम उसरिया की ग्राम पंचायत गुरैया में स्थित एक विशाल आटा मिल भी शामिल है। नागदा इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के नाम से संचालित इस आटा मिल की कीमत लगभग 2,50,00,000 रुपये बताई जा रही है। अब तक की पूरी कार्रवाई में ईओडब्ल्यू की टीम ने कुल 5.47 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति का खुलासा किया है। वर्तमान में भी टीम द्वारा विभिन्न दस्तावेजों, बैंक लॉकरों और अन्य निवेशों की बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस आंकड़े में और भी अधिक बढ़ोतरी होने की प्रबल संभावना है।

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